निठारी कांड के एक मामले में नर पिशाच सुरेन्द्र कोली बरी

-13वें मामले में कोर्ट ने किया बरी, 12 मामलों में हो चुकी फांसी की सजा

गाजियाबाद। बहुचर्चित निठारी कांड मेंं 10 साल की बच्ची से दुष्कर्म व हत्या के 13वें प्रकरण में नर पिशाच सुरेंद्र कोली को सीबीआई की विशेष अदालत ने साक्ष्यों को अपर्याप्त मानकर दोष मुक्त करार दिया है। निठारी कांड के 13वें मामले में शुक्रवार को सीबीआई के विशेष न्यायाधीश अमित वीर सिंह की कोर्ट ने सुरेंद्र कोली को बरी करने का निर्णय लिया। यह मामला 10 साल की बच्ची से दुष्कर्म के बाद हत्या करने का था। वर्ष-2006 मेंं नोएडा के निठारी कांड के 13वें मामले में सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक जेपी शर्मा ने बताया कि इस मामले में मौके से बच्ची के शव के टुकड़े मिले थे। जबकि उसके कपड़े भी बरामद नहीं हुए थे। सीबीआई ने परिस्थिति जन्य साक्ष्यों के आधार पर सुरेंद्र कोली के खिलाफ आरोप पत्र पेश किया था। विशेष न्यायाधीश अमित वीर सिंह की कोर्ट ने साक्ष्यों को अपर्याप्त मानकर सुरेंद्र कोली को बरी करने के आदेश दिए। सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक जेपी शर्मा ने बताया कि 19 अप्रैल 2006 को 10 वर्षीय बच्ची रहस्यमय हालात में गायब हो गई थी। काफी तलाश के बाद भी वह नहीं मिली तो उसके पिता ने नोएडा सेक्टर-20 थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई थी। 29 दिसंबर 2006 को निठारी में मोनिंदर सिंह पंधेर की कोठी के पीछे नाले में पुलिस को 19 बच्चों और महिलाओं के कंकाल मिले थे। इसके बाद पुलिस ने मोनिंदर सिंह पंधेर और उसके नौकर सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार किया था। निठारी कांड से संबंधित सभी मामले सीबीआई को स्थानांतरित कर दिए गए थे। 10 वर्षीय बच्ची की दुष्कर्म व हत्या के केस में सीबीआई ने सुरेंद्र कोली के खिलाफ आरोप पत्र पेश किया था। मामले में अभियोजन की तरफ से 33 गवाह पेश किए गए। कुल 265 दिन अदालत में सुनवाई चली थी। बता दें कि निठारी कांड के 12 मामलों में पूर्व में सुरेंद्र कोली को फांसी की सजा हो चुकी है। निठारी कांड के 13वें मामले में सुरेंद्र कोली को पुख्ता सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया। निठारी में काफी छानबीन के बाद डी-5 कोठी मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर और नौकर सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार कर सीबीआई ने बड़ा खुलासा किया था।