नगर निगम की टेंडर प्रक्रिया सही, हाईकोर्ट ने लगाई मुहर

– हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने वाली त्रिवेणी इंजीनियरिंग कंपनी को झटका, कोर्ट ने खारिज की याचिका

गाजियाबाद। नगर निगम की टेंडर प्रक्रिया सही है और इसमें नियमानुसार ही कंपनियों का चयन किया गया है। त्रिवेणी इंजीनियरिंग एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड कंपनी की याचिका को हाईकोर्ट द्वारा खारिज किये जाने के बाद नगर निगम की टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता और नियमबद्धता पर मुहर लग गई है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब जल्द ही नगर निगम की महत्वाकांक्षी टर्शियरी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (टीएसटीपी) का काम शुरू होने की उम्मीद बढ़ गई है। इस योजना से जहां औद्योगिक क्षेत्रों में नगर निगम द्वारा उद्योगों को पर्याप्त जल उपलब्ध कराकर औद्योगिक विकास में मदद मिलेगी वहीं नगर निगम को भी आर्थिक लाभ होगा। नगरायुक्त महेंद्र सिंह तंवर के निर्देशन में ऐसी योजना तैयार की गई है जिससे गाजियाबाद में भू-जल दोहन रूकेगा और नगर निगम आर्थिक रूप से स्वाबलंबी बनेगा। इस योजना के लिए नगर निगम ने मार्केट से बांड के जरिये फंड जुटाया है।

इंदिरापुरम में लगभग 319 करोड़ रुपए की लागत से टर्शियरी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण किया जाएगा। चेन्नई की कंपनी वीए टेक वबाग कंपनी अब इसका निर्माण कराएगी। टेंडर प्रक्रिया में निविदा डालने वाली त्रिवेणी इंजीनियरिंग कंपनी के मैनेजमेंट ने दूसरी कंपनी की तकनीकी निविदा को गलत तरीके से फेल किए जाने का आरोप लगाया था।इस टेंडर प्रक्रिया में तीन कंपनियां वीए टेक वबाग, त्रिवेणी इंजीनियरिंग और इन्वायरो कंट्रोल एसोसिएट्स प्राइवेट लिमिटेड ने भाग लिया था। टू बिड सिस्टम के जरिए निविदा प्रक्रिया को पूरा करने के लिए पहले तीनों कंपनी की तकनीकी निविदा को खोला गया। नगर निगम की ओर से तय शर्तोंं को पूरा न करने पर टेंडर कमेटी ने त्रिवेणी इंजीनियरिंग एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड को डिस्क्वॉलीफाई कर दिया था। इसके बाद टेंडर में सबसे न्यूनतम रेट पर काम करने का आफर देने वाली कंपनी वीए टेक वबाग को कांट्रेक्ट देकर वर्कऑर्डर जारी किया गया। इसके विरोध में त्रिवेणी इंजीनियरिंग एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड कंपनी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका पर सुनवाई करने के बाद कोर्ट ने उसे खारिज कर दिया।

इस मामले में नगर निगम की ओर से ठोस दलीलें दी गई। सभी पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने चुनौती के बिंदुओं को निराधार पाया और याचिका को खारिज कर दिया। 40 एमएलडी की क्षमता वाले इस प्लांट से साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र की 1445 इकाइयों को सीवरेज का पानी ट्रीट कर आपूर्ति की जाएगी। जिससे भूगर्भीय जल का संरक्षण हो सकेगा। इस प्लांट से उद्योगों को भी फायदा होगा। उन्हें भूगर्भीय जल का शोधन भी करना पड़ता है। नगर निगम द्वारा इंदिरापुरम स्थित 56 एमएलडी के एसटीपी के पास इस प्लांट को प्रस्तावित किया है। यह दो चरणों में तैयार होगा। पहले प्लांट बनाया जाएगा और फिर यहां से औद्योगिक क्षेत्र तक पानी पहुंचाने के लिए पाइपलाइन बिछाई जाएगी। नगर निगम द्वारा 150 करोड़ रुपए दिया जाएगा। बाकी का पैसा कंपनी खुद लगाएगी। प्लांट बनने के बाद इसका संचालन भी कंपनी करेगी। इस योजना के लिए नगर निगम द्वारा ग्रीन म्यूनिसिपल बॉंन्ड से 150 करोड़ रुपए जुटाए गए हैं और साहिबाबाद इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के साथ औद्योगिक इकाईयों को पानी उपलब्ध कराने को लेकर करार भी किया है।

आनंद त्रिपाठी
महाप्रबंधक जल
गाजियाबाद नगर निगम

टेक्निकल रूप से क्वालीफाई नहीं करने के कारण त्रिवेणी इंजीनियरिंग एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड कंपनी द्वारा डाली गई टेंडर को खारिज कर दिया गया था। कंपनी के पास इस क्षेत्र में काम करने का कोई अनुभव नहीं था। इसके बाद त्रिवेणी इंजीनियरिंग ने हाईकोर्ट में याचिका डाली थी कि नगर निगम ने उन्हें गलत तरीके से अयोग्य करार दिया है। नगर निगम ने सभी दस्तावेज और विभिन्न एजेंसियों की रिपोर्ट के साथ कोर्ट में अपना जवाब रखा। कोर्ट ने सुनवाई के बाद त्रिवेणी इंजीनियरिंग की याचिका खारिज कर दी।
आनंद त्रिपाठी
महाप्रबंधक जल
गाजियाबाद नगर निगम