गाजियाबाद के अब हर घर की होगी डिजिटल पहचान

नगर निगम ने जारी किया 17 अंकों का यूआईडी नंबर, ब्रिज विहार से हुई शुरुआत। आधार यूनिक आईडी की तर्ज पर हर घर की यूनिक आईडी मिलेगी। नगर निगम एरिया की हर प्रॉपर्टी की एक यूनीक आईडी बनेगी। कंप्यूटर स्क्रीन पर एक क्लिक से पूरी आईडी का बायोडाटा निकल आएगा। कॉमर्शियल या रेजिडेंशियल बिल्डिंग कितनी मंजिल की है। कितना एरिया कवर है और लोकेशन क्या है, इन सब की जानकारी नगर निगम के पास उपलब्ध रहेगी। 

गाजियाबाद। शहरवासियों के घर की एक डिजिटल पहचान होगी। आधार यूनिक आईडी की तर्ज पर हर घर की यूनिक आईडी मिलेगी। नगर निगम एरिया की हर प्रॉपर्टी की एक यूनीक आईडी बनेगी। कंप्यूटर स्क्रीन पर एक क्लिक से पूरी आईडी का बायोडाटा निकल आएगा। कॉमर्शियल या रेजिडेंशियल बिल्डिंग कितनी मंजिल की है। कितना एरिया कवर है और लोकेशन क्या है, इन सब की जानकारी नगर निगम के पास उपलब्ध रहेगी। नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर की कुशल योजनाओं के तहत शहरवासियों के लिए सुविधा प्रारंभ कर दी गई है। इसी क्रम में शुक्रवार को वंसुधरा जोन के ब्रिज विहार निवासियों को यूनिक यूआईडी नंबर जारी किया गया।

नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर ने बताया कि नगर निगम सीमा अंतर्गत आने वाली संपत्ति का रिकॉर्ड व्यवस्थित करने के क्रम में शहर के आवासों को यूनिक आईडी दी जा रही है। जिसमें 17 अंकों का यूआईडी नंबर जारी किया जा रहा है। जिससे शहर वासियों को लाभ प्राप्त होगा। किस आवास का कितना क्षेत्रफल है, किस आवास का कितना टैक्स होना चाहिए, आवास शहर में किस लोकेशन पर है, इस प्रकार की अन्य कई सुविधाएं नगर निगम इस रिकॉर्ड से मेंटेन कर पाएगा। जारी की जाने वाले 17 डिजिट की यूआईडी नंबर में पहले 2 अंक जिसमें स्टेट कोड को दर्शाया गया है, उसके उपरांत 3 नंबर जिसमें यूएलबी कोड को दर्शाया गया है। उसके उपरांत 2 अंक जिसमे जोन कोड को दिखाया गया है। इसके बाद 3 अंक में वार्ड कोर्ट को दर्शाया गया है, 6 अंक के अंदर रनिंग सीरियल नंबर को दिखाया गया है। इसके बाद लास्ट में अल्फाबेटिक से प्रॉपर्टी का टाइप दिखाया गया है कि वह रेजिडेंशियल है या कमर्शियल, इस प्रकार कुल 17 नंबरों का यूआईडी नंबर जनरेट कर नगर निगम द्वारा आवासों के बहार नंबर प्लेट लगाई जा रही है।

मुख्य का निर्धारण अधिकारी डॉ संजीव सिन्हा को निर्देश दिए गए हैं कि संपत्ति संबंधित सभी ब्यूरो की शहर वासियों को पारदर्शिता रहने के लिए जल्द से जल्द जोन स्तर पर प्रीति एक मकान के बाहर नगर निगम द्वारा दिए गए यूआईडी नंबर को सकुशल लगाया जाए। डॉक्टर संजीव सिन्हा ने बताया कि शहर में संपत्ति के ब्योरे को डिजिटल रूप से मेंटेन करने के लिए कार्य चल रहा है। जिसके अंतर्गत यूआईडी नंबर भी प्रत्येक संपत्ति का जनरेट किया गया है। कार्य जीआईएस की टीम द्वारा किया जाएगा। शहर वासियों को इसका लाभ प्राप्त होगा। 17 अंकों के लास्ट में अल्फाबेटिक आर से रेजिडेंशियल तथा सी से कमर्शियल की जानकारी भी प्राप्त हो जाएगी और शहर को इसका लाभ प्राप्त होगा। ऐसे कमर्शियल तथा रेजिडेंशियल क्षेत्र जो टैक्स के दायरे से यदि बचे हुए हैं तो वह भी टैक्स के दायरे में आ जाएंगे और गाजियाबाद नगर निगम की आय भी प्रभावित होगी। नगर निगम द्वारा किए जा रहे योजनाबद्ध तरीके से शहर हित में कार्यों को पार्षदों द्वारा भी सराहा जा रहा है। शहर वासियों को भी नगर निगम के कार्यों पर खुशी जाहिर की जा रही है।

राजस्व वसूली में होगा काफी फायदा 
अब तक लोग अव्यवस्थित ढंग और मनमाने तरीके से नियमों को ताकपर रखकर जमीनों की खरीद बिक्री और निर्माण कराते चले आ रहे थे। हालांकि निगम प्रशासन उन पर कार्रवाई तो करता है। पर अब इसे पूरी तरह से रोकने में यूनिक कोड नंबर प्लेट सिस्टम बहुत कारगर साबित होगा। यूआईडी से यह पता लगाया जा सकेगा कि प्रॉपर्टी किसकी है, इसका एरिया क्या है। कितना निर्माण और कितना खाली हिस्सा है। राजस्व वसूली में भी इससे काफी फायदा होगा। मकान नक्शा पास कर बनाया गया है या नहीं, बिल जमा है या बकाया बस एक क्लिक पर मिल जाएगी। नगर निगम जब चाहे किसी भी प्रॉपर्टी की जांच बेहद आसानी से कर सकेगी। नगर निगम द्वारा शुरू हुई यह हाईटेक व्यवस्था यूपी के और शहरों में भी लागू होगी।