पिछले छह दिन में बगैर फिटनेस जांच के चल रहीं 56 स्कूलीं बसों को सीज किया गया। जबकि 62 बसों के चालान काटे गए। इसके बावजूद सिर्फ 122 ही फिटनेस की जांच के लिए पहुंची हैं। इनमें से 22 को प्रमाण पत्र जारी किया गया। डासना स्थित फिटनेस सेंटर पर कम्प्यूटराइज्ड मशीनों द्वारा बसों की चेकिंग की जाती है। बस के गियर, ब्रेक, शीशाए टायर, ग्रिल, सीसीटीवी, सीट, इंजन ऑयल हैड लाइट आदि में कोई भी कमी होने पर बस को वापस कर दिया जा रहा है। एसे में स्कूल संचालक अपनी तरफ से पूरी तैयारी के बाद ही बस स्कूल भेज रहे हैं।
गाजियाबाद। मोदीनगर स्थित दयावती पब्लिक स्कूल की बस में छात्र अनुराग की मौत के बाद संभागीय परिवहन विभाग ने अब स्कूलीं बसों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। जिलाधिकारी राकेश कुमार सिंह के निर्देश पर स्कूल की बसों की जांच करते हुए अब कार्रवाई की जा रही है। पिछले छह दिन में बगैर फिटनेस जांच के चल रहीं 56 स्कूलीं बसों को सीज किया गया। जबकि 62 बसों के चालान काटे गए। इसके बावजूद सिर्फ 122 ही फिटनेस की जांच के लिए पहुंची हैं। इनमें से 22 को प्रमाण पत्र जारी किया गया। फिटनेस प्रमाण पत्र की मियाद पूरी हो जाने के बाद भी 643 बसें बच्चों को लाने व ले जाने में लगी हुई हैं। इनमें बड़ी संख्या में ऐसी हैं जिन्होंने खिड़की पर ग्रिल लगवाने जैसे सुरक्षा उपाय भी नहीं किए हैं।
एआरटीओ प्रशासन राघवेंद्र सिंह ने बताया कि स्कूल बसों की रोजाना जांच की जा रही है। फिटनेस बगैर बसों को सीज करने और चालान बनाने की कार्रवाई की जा रही है। वहीं, आरटीओ दफ्तर के कर्मचारी स्कूलों में जाकर प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों से कह रहे हैं कि बसों की फिटनेस जांच के साथ ही सुरक्षा के मानक पूरे करें। ऐसा न करने वाली बसों को काली सूची में डाला जा रहा है। प्रदेश शासन ने जिलाधिकारी और आरटीओ को निर्देश दिए हैं कि स्कूली बसों की फिटनेस की जांच और सुरक्षा के मानकों पर पड़ताल कर 28 अप्रैल तक रिपोर्ट भेजी जाए। जिलाधिकारी राकेश कुमार सिंह ने बताया कि आरटीओ को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि बगैर फिटनेस प्रमाण पत्र और सुरक्षा उपाय के कोई भी स्कूल बस चलने न दी जाए।
आरटीओ दफ्तर के तकनीकी अधिकारी शेर सिंह ने बताया कि 8 साल तक पुराने वाहन के फिटनेस प्रमाण पत्र का हर 2 साल बाद नवीनीकरण कराना आवश्यक है। इसके बाद 15 साल तक हर साल प्रमाण पत्र लेना पड़ता है। प्रदूषण नियंत्रण के प्रमाण पत्र का हर साल नवीनीकरण कराना होता है। डासना स्थित फिटनेस सेंटर पर कम्प्यूटराइज्ड मशीनों द्वारा बसों की चेकिंग की जाती है। बस के गियर, ब्रेक, शीशाए टायर, ग्रिल, सीसीटीवी, सीट, इंजन ऑयल हैड लाइट आदि में कोई भी कमी होने पर बस को वापस कर दिया जा रहा है। एसे में स्कूल संचालक अपनी तरफ से पूरी तैयारी के बाद ही बस स्कूल भेज रहे हैं। जिला संभागीय परिवहन अधिकारी अरुण कुमार ने बताया कि स्कूली बसों का सफर सुरक्षित बनाने के लिए तीन चरण में काम कर रहे हैं। सभी स्कूलों में जाकर हमारी टीमें लोगों को जागरुक कर रही हैं कि वे बसों की फिटनेस जांच तुरंत करा लें।
21 अप्रैल से अब तक की कार्रवाई:
संभागीय परिवहन विभाग द्वारा 21 अप्रैल से लेकर अब तक स्कूलों की बसों की फिटनेस जांच की जा रही है। इनमें 21 अपै्रल-1 बस, 22 को 2 बस,23 को 60 बस, 24 को 27 बस,25 को 22 बस और 26 अपै्रल को 27 बसों की फिटनेस जांच की गई। जबकि 56 स्कूल बसों का सीज किया गया और 62 बसों के चालान बनाए गए। इन पर जुर्माना भी लगाया गया। फिटनेस पर 5 हजार रुपए, बीमा पर 2 हजार रुपए, बीमा नहीं होने पर 10 हजार रुपए, लाइसेंस पर 5 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया। फिलहाल जिले में बगैर फिटनेस और जांच के 12 स्कूलों की बसें दौड़ रही है। इनमें प्रेसीडियम इंदिरापुरम की 31 बसें, दिल्ली पब्लिक स्कूल मेरठ रोड-20 बसें, जेकेजी इंटरनेशनल स्कूल-13 बसें, देहरादून पब्लिक स्कूल-10 बसें, प्रीती फाउंडेशन-9 बसें, इंद्रप्रस्थ पब्लिक स्कूल-8 बसें, एलके इंटरनेशनल-8 बसें, माउंट लिटेरा जी स्कूल-8 बसें, मुरादनगर पब्लिक स्कूल-8 बसें, सेठ आनंदपुरम जयपुरिया स्कूल-8 बसें, डायमंड पब्लिक स्कूल-7 बसें बगैर जांच और फिटनेस के दौड़ रही हैं।
















