विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर यशोदा कौशांबी के विशेषज्ञों ने लोगों को किया जागरुक

-हेपेटाइटिस की रोकथाम के लिए सफाई और पेयजल तथा आहार का प्रदूषण दूर करना जरुरी

गाजियाबाद। विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर गुरुवार को यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल्स, कौशांबी के गैस्ट्रो एवं लिवर डिपार्टमेंट द्वारा हॉस्पिटल में प्रात: 10 बजे से 1 बजे तक निशुल्क परामर्श शिविर का आयोजन किया गया और विशेष जांच के पैकेज भी उपलब्ध कराए गए। शिविर में 50 से भी ज्यादा मरीजों ने पहुंचकर लाभ उठाया। हॉस्पिटल के वरिष्ठ लिवर एवं पेट रोग विशेषज्ञ डॉ कुणाल दास, डायरेक्टर एवं एचओडी एवं डॉ हरित कोठारी, विशेषज्ञ पेट एवं लिवर रोग ने मरीजों को परामर्श दिया। मरीजों एवं सामान्य लोगों के लिए हेपिटाइटिस की बीमारी से बचाव एवं उपचार विषय पर एक जागरूकता व्याख्यान का भी आयोजन हुआ।

विश्व हेपेटाइटिस डे के अवसर पर यशोदा हॉस्पिटल कौशांबी में विशेष हेपेटाइटिस जांच शिविर में मरीज को परामर्श देते हुए डॉक्टर कुणाल दास

डॉ कुणाल दास ने कहा लिवर (जिगर) शरीर का दूसरा सबसे बड़ा अंग है, जिसका वजन लगभग 1.5 किलो होता है। इसे शरीर की प्रयोगशाला और कारखाने के रूप में जाना जाता है, क्योंकि इसमें शरीर के महत्वपूर्ण कामकाज के लिए कई कार्य होते हैं। लिवर रक्त में कई रसायनों को नियंत्रित करता है और पित्त नामक पदार्थ यानी उत्पाद को उत्सर्जित करता है जो लिवर से अपशिष्ट उत्पादों को दूर करता है। लिवर इस रक्त को संशोधित करता है। इस दौरान जब रक्त टूटता है, तो लिवर उसे संतुलित करता है। यह पोषक तत्व बनाता है और दवाओं को भी डिटॉक्सीफाई करता है। यह 500 से अधिक महत्वपूर्ण कार्य करता है, जिन्हें भोजन के यकृत प्रसंस्करण के साथ पहचाना गया है। हेपेटाइटिस यकृत की सूजन को संदर्भित करता है और क्रोनिक का अर्थ है कि यह रोग पिछले 6 महीनों से अधिक समय से मौजूद है। क्रोनिक हेपेटाइटिस लगभग 170 मिलियन भारतीयों या 130 करोड़ की भारतीय आबादी का लगभग 15 फिसदी प्रभावित करता है। रोकथाम के लिए सफाई तथा पेयजल और आहार का प्रदूषण दूर करना आवश्यक है।

क्रोनिक हेपेटाइटिस का कारण वायरल हेपेटाइटिस
डॉ हरित कोठारी ने कहा कि क्रोनिक हेपेटाइटिस का सबसे आम कारण वायरल हेपेटाइटिस है- हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी, अल्कोहलिक हेपेटाइटिस और फैटी लिवर को गैर-अल्कोहल स्टीटोहेपेटाइटिस (एनएएसएच) के रूप में भी जाना जाता है। वायरल हेपेटाइटिस भारत में एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या है, क्योंकि लगभग 40 मिलियन हेपेटाइटिस बी से संक्रमित हैं और 6-12 मिलियन हेपेटाइटिस सी के साथ। यह अनुमान है कि भारत में सामान्य आबादी के 16-32 फिसद (लगभग 120 मिलियन) में एनएएफएलडी है और उनमें से लगभग 31 फिसद एनएएसएच से पीडि़त हैं। फैटी लिवर रोग (एनएएफएलडी/एनएएसएच) के सबसे सामान्य कारण मधुमेह, हाइपोथायरायड और हाइपरलिपिडेमिया हैं।

2025 तक भारत बन जाएगा मधुमेह की राजधानी
डॉ कुणाल दास ने कहा कि डब्ल्यूएचओ का मानना है कि भारत 2025 तक दुनिया की मधुमेह राजधानी बन जाएगा। इन बीमारियों का निदान करने का सबसे अच्छा तरीका एक डॉक्टर से मिलना है जो एलएफटी (लिवर फंक्शन टेस्ट), वी जैसे रक्त परीक्षण का आदेश दे सकता है। वह वाइरल सीरोलॉजी परीक्षण (एचबीएस- एजी, एंटी-एचसीवी एबी), पेट का अल्ट्रासाउंड आदि करवा सकता है। वहीं, फाइब्रोस्कैन जैसे आगे के परीक्षण रोग की अवस्था और गंभीरता का निदान करने में मदद करते हैं। क्रोनिक हेपेटाइटिस की जटिलताओं में पेट में पानी (जलोदर), खून की उल्टी, हेपेटिक कोमा, लिवर कैंसर, लीवर की विफलता के कारण पीलिया आदि शामिल हैं। एक बार जटिलता आने पर 5 साल के जीवित रहने में 85 फिसद से 15 फिसद तक की भारी कमी आती है।

पुरानी बीमारियों के उपचार में मौखिक गोलियां (जैसे हेपेटाइटिस बी और सी, एनएएसएच), एनएएसएच की अंतर्निहित स्थितियों जैसे मधुमेह, हाइपोथायरायड और हाइपरलिपिडिमिया का उपचार, रक्त स्राव की घटनाओं को कम करने के लिए दवाएं जैसे कार्वेडियोल शामिल हैं। यदि रोगी रक्त उल्टी के साथ प्रस्तुत करता है तो यूजीआई एंडोस्कोपी का उपयोग किया जाता है। वर्तमान में हेपेटाइटिस बी टीकाकरण भारत की सरकार द्वारा सार्वभौमिक बाल टीकाकरण कार्यक्रम का एक हिस्सा है। डब्ल्यूएचओ अनुशंसा करता है कि हेपेटाइटिस बी किसी को भी और कभी भी, बिना टीकाकरण वाले को दिया जा सकता है। आहार और व्यायाम कार्यक्रमों सहित उचित जीवनशैली में बदलाव को बढ़ावा देकर एनएएफएलडी/एनएएसएच को रोका जा सकता है। हमें 2030 तक हेपेटाइटिस मुक्त विश्व के लिए प्रयास करना चाहिए, यह संभव है।

बरसात के मौसम में बढ़ता है इसका असर
बारिश के मौसम में हेपेटाइटिस का खतरा काफी बढ़ जाता है, क्योंकि यह वायरस से फैलने वाला रोग है। हेपेटाइटिस-ए (एचएवी) एक प्रकार का वायरल संक्रमण है, जो बरसात के कारण संक्रमित भोजन से होता है। बारिश के मौसम में वैसे भी कहा जाता है कि पानी जरा देखभाल कर पिएं। इससे हमारा लिवर प्रभावित होता है। बरसात का ही मौसम हेपेटाइटिस-ई के खतरे को और बढ़ा देता है। वैसे तो हेपेटाइटिस ई साल में कभी भी हो सकता है, लेकिन बरसात के दौरान और बरसात के बाद इसका प्रकोप अधिक रहता है।

खान-पान और साफ-सफाई जरुरी
विशेषज्ञों के अनुसार हेपेटाइटिस-डी, एक डेल्टा वायरस है, जो बी के साथ मिलता है तथा ए और ई का संक्रमण दूषित खान-पान और प्रदूषित पानी पीने से होता है। इसके अलावा अपने आसपास ठीक ढंग से साफ-सफाई और ठीक से हाथ न धोने की वजह से इस रोग का जोखिम और बढ़ जाता है। बी और सी का संक्रमण कई वजहों से रक्त के जरिये होता है, जैसे इंजेक्शन द्वारा नशीले पदार्थों का सेवन, सुई से लगी चोट, हेपेटाइटिस संक्रमित किसी व्यक्ति के रक्त के संपर्क में आना है। आपको संक्रमण नहीं है, बावजूद इसके अपने आसपास साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखें। खान-पान के दौरान बहुत गर्म और तेज मसालेदार भोजन से परहेज करें। जहां तक हो सके, शाकाहारी भोजन करें। फल खाएं। आम, अंगूर और बादाम खाने से फायदा होगा। अधिक मात्रा में डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ, सरसों का तेल, मैदा, पेस्ट्री, चॉकलेट, कोल्ड ड्रिंक्स, हींग, मटर जैसी चीजों के सेवन से बचें। चावल, गेहूं का आटा, आंवला, टमाटर, सूखे खजूर, इलायची, नींबू, केला आदि का सेवन करें। धूप में ज्यादा न निकलें, जरूरत से ज्यादा तनाव न लें और अत्याधिक कसरत से भी बचें। शराब और तंबाकू का सेवन न करें।