केजरीवाल सरकार को दिल्ली हाईकोर्ट से झटका

80 प्रतिशत बेड आरक्षित रखने के आदेश पर रोक
-निजी अस्पतालों को राहत, 16 अक्तूबर को अगली सुनवाई

उदय भूमि ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट से अरविंद केजरीवाल सरकार को जोर का झटका लगा है। कोर्ट ने 33 निजी अस्पतालों में कोविड-19 (कोरोना वायरस) के मरीजों के लिए 80 प्रतिशत आईसीयू बिस्तर आरक्षित रखने के आदेश पर रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति नवीन चावला ने कहा कि दिल्ली सरकार का आदेश प्रथम दृष्टया मनमाना, अनुचित एवं नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन प्रतीत होता है। एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स ने इस संबंध में केजरीवाल सरकार के फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। दिल्ली हाईकोर्ट ने आईसीयू बेड आरक्षित रखने के आदेश को खारिज करने वाली याचिका पर दिल्ली सरकार और केंद्र को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इस मामले की अगली सुनवाई 16 अक्तूबर को होगी। अगली सुनवाई तक इस आदेश के क्रियान्वयन पर रोक रहेगी। एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स का कहना है कि यह 33 अस्पताल उसके सदस्य हैं। दिल्ली सरकार के आदेश को रद्द किया जाना चाहिए। उधर, केजरीवाल सरकार ने अपने आदेश का बचाव किया है। सरकार का कहना है कि यह सिर्फ 33 अस्पताल हैं और 20 प्रतिशत आईसीयू बेड अन्य मरीजों (जिन्हें कोरेाना वायरस नहीं है) के लिए आरक्षित रहेंगे। बता दें कि 80 प्रतिशत आईसीयू बेड आरक्षित करने के दिल्ली सरकार के आदेश पर निजी अस्पतालों ने ऐतराज जताया था। सरकार से इस फैसले को बदलने की अपील की गई थी। सरकार द्वारा सुनवाई न करने पर एसोसिएशन को हाईकोर्ट जाना पड़ा। उधर, दिल्ली में कोविड-19 का प्रकोप रूक नहीं पाया है। प्रतिदिन नए केस सामने आ रहे हैं। इसके चलते सरकार की मुश्किलें भी बढ़ी हुई हैं। दिल्ली हाईकोर्ट से झटका लगने के बाद केजरीवाल सरकार अब नए विकल्पों पर विचार करेगी।