केंद्रीय मंत्री की गिरफ्तारी के बहाने किसे संदेश ?

महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना एक बार फिर आमने-सामने हैं। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के खिलाफ विवादित बयानबाजी के चलते केंद्रीय मंत्री नारायण राणे की गिरफ्तारी ने मामले को और तूल दे दिया है। केंद्रीय मंत्री राणे को कुछ घंटे की पुलिस कस्टडी के बाद बेशक जमानत मिल गई, मगर यह घटनाक्रम कतई सामान्य नहीं है। पिछले 2 दशक में पहली बार किसी केंद्रीय मंत्री की इस प्रकार गिरफ्तारी होने से सियासी हल्कों में बवंडर मच गया है। आक्रामक भाजपा ने शिवसेना पर पलटवार किया है।

भाजपा का कहना है कि शिवसेना के 27 मंत्रियों के विरूद्ध एफआईआर दर्ज है, जिन्हें आज तक अरेस्ट नहीं किया गया है। बदले की भावना से केंद्रीय मंत्री राणे पर कार्रवाई किए जाने का आरोप भाजपा ने लगाया है। फिलहाल दोनों दल एक-दूसरे पर तीखे शब्द बाण छोड़ रहे हैं। मौजूदा विवाद की असल वजह केंद्रीय मंत्री राणे का वह बयान है, जिसमें उन्होंने सीएम उद्धव ठाकरे को थप्पड़ मारने की बात कही थी। मंत्री राणे का कहना है कि स्वतंत्रता दिवस समारोह के दरम्यान उद्धव ठाकरे यह भूल गए कि देश की आजादी को कितने साल गुजर चुके हैं।

उन्होंने दावा किया है कि मंच पर भाषण देते समय ठाकरे पीछे मुड़ कर इस बारे में पूछताछ करते दिखाई दिए थे। इस पर नाराजगी जाहिर कर मंत्री राणे ने यह तक कह डाला कि यदि मैं वहां होता तो उन्हें (उद्धव ठाकरे) को थप्पड़ मार देता। उनका यह बयान सामने आने से शिवसेना का पारा चढ़ गया। शिवसैनिकों को महाराष्ट्र को सिर पर उठा लिया। केंद्रीय मंत्री राणे के विरूद्ध आनन-फानन में 3 एफआईआर दर्ज करा दी गई। महाराष्ट्र में भाजपा कार्यालय पर उग्र शिवसैनिकों द्वारा पथराव तक किया गया।

विवादित बयान पर बवाल मचने के बावजूद केंद्रीय मंत्री नारायण राणे नरम पड़ते दिखाई नहीं दिए। राजनीति में तीखी बयानबाजी कोई नई बात नहीं है। समय-समय पर राजनीति में तल्ख शब्द बाण छोड़े जाते रहे हैं, मगर बात तब बिगड़ जाती है कि जब मर्यादा की लक्ष्मण रेखा को लांघकर कोई बात कह दी जाए। केंद्रीय मंत्री राणे ने भी यह गलती कर दी है। महाराष्ट्र की सियासत में नारायण राणे नया चेहरा नहीं हैं। वह जाना-पहचाना नाम हैं। वह महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी भी बखूवी निभा चुके हैं।

भाजपा में आने से पहले वह शिवसेना और कांग्रेस के साथ रह चुके हैं। शिवसेना में रहते समय वह बाला साहेब ठाकरे के नजदीकी रहे थे। पहले शिवसेना फिर कांग्रेस और बाद में वह भाजपा में आ गए। करीब 2 साल पहले उन्होंने भाजपा के साथ नई सियासी पारी की शुरुआत की थी। अलबत्ता सियासत को वह भली-भांति जानते हैं। लगभग 5 दशक पहले नारायण राणे चिकन बेचने का काम करते थे। चेंबूर में वह पॉल्ट्री की दुकान चलाकर अपनी गुजर-बसर करते थे। उनके पुराने कारोबार को ध्यान में रखकर शिवसैनिकों ने उन पर कोम्बड़ी चोर (चिकन चोर) होने की तोहमत लगाई है।

राणे के खिलाफ जगह-जगह पोस्टर तक लगा दिए गए। इन पोस्टर में उन पर बेहद आपत्तिजनक बातें लिखी गई हैं। महाराष्ट्र में पिछले कुछ साल की सियासत पर नजरें डाले तो मालूम पड़ जाएगा कि जो भाजपा और शिवसेना कभी बड़े भाई-छोटे भाई की भूमिका में नजर आते थे। वह अब एक-दूसरे को नापसंद करते हैं। पिछले विधान सभा चुनाव के बाद से दोनों दलों में दूरियां बढ़ती चली गई। महाराष्ट्र विधान सभा चुनाव में भाजपा और शिवसेना ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया था।

चुनाव परिणाम आने के बाद शिवसेना ने मुख्यमंत्री पद के लिए दावेदारी की थी। इस कारण दोनों दलों में तनातनी बढ़ती चली गई। बाद में शिवसेना ने भाजपा से नाता तोड़ लिया था। वर्तमान में वहां महाविकास अघाड़ी संगठन की सरकार है। सरकार के मुखिया उद्धव ठाकरे हैं। इस संगठन में कांग्रेस, एनसीपी भी शामिल हैं। शिवसेना के दूर चले जाने की पीड़ा आज भी भाजपा को जब-तब परेशान करती रहती है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कुछ वक्त पहले दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। इस मुलाकात ने तब सियासी गलियारों में भाजपा-शिवसेना को लेकर चर्चाओं का बाजार गरम कर दिया था। कहा जाने लगा था कि महाराष्ट्र में सत्ता परिवर्तन की रणनीति तैयार हो चुकी है। हालाकि उद्धव ठाकरे ने बयान देकर स्थिति को साफ कर दिया था।

केंद्रीय मंत्री नारायण राणे की गिरफ्तारी से भाजपा और शिवसेना के संबंधों में कड़वाहट आने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। फिल्म अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद महाराष्ट्र सरकार और पुलिस की कार्यप्रणाली पर तरह-तरह के सवाल उठे थे। सरकार और पुलिस पर सुशांत सिंह प्रकरण में निष्पक्ष ढंग से जांच न करने का आरोप लगाया गया था। बाद में यह केस सीबीआई को सौंप दिया गया था। इसके अलावा महाराष्ट्र सरकार के तत्कालीन गृहमंत्री को गंभीर आरोपों में घिरने के बाद पद छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा था।

ऐसे कई मामले हैं, जब उद्धव ठाकरे सरकार किसी न किसी मुसीबत में फंसती रही है। हालाकि सहयोगी दलों ने ठाकरे का साथ कभी नहीं छोड़ा। अभिनेत्री कंगना रनौत पर शिकंजा कसने में भी ठाकरे सरकार ने कोई कसर नहीं छोड़ी थी। कंगना रनौत के कार्यालय के काफी हिस्से पर बीएमसी द्वारा बुलडोजर चला देने से यह विवाद खासा गरमा गया था, मगर कंगना ने कभी हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने सीधे मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर तीखे हमले किए थे। कंगना रनौत को भाजपा का सपोर्ट मिलने से शिवसेना तिलमिला गई थी। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अभिनेत्री को सुरक्षा मुहैया कराकर महाराष्ट्र सरकार को संदेश देने की कोशिश की थी। जानकारों का कहना है कि केंद्रीय मंत्री नारायण राणे पर कार्रवाई करने में सरकार ने जिस तरह की तेजी दिखाई है, उससे भविष्य में भाजपा और शिवसेना में तल्खी और बढ़ सकती हैं।