पूर्व विधायक अब्दुल वारिस राव ने थामा रालोद का दामन

-पार्टी की नीतियों से प्रभावित होकर बदला मन

गाजियाबाद/शामली। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) को मजबूत करने की कवायद तेज हो गई है। इसके चलते पार्टी में नए एवं प्रभावशाली चेहरों को शामिल किया जा रहा है। इसी कड़ी में बुधवार को थानाभवन (शामली) के पूर्व विधायक अब्दुल वारिस राव अपनी माता राव मुसरत बेगम के साथ रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी की उपस्थिति में रालोद में शामिल हुए। इस दौरान रालोद प्रमुख जयंत चौधरी ने कहा कि पार्टी को संगठित कर आगे बढाने का अभियान जारी रहेगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से एकजुट होकर पार्टी को मजबूत बनाने का आह्वन किया। जयंत चौधरी ने कहा कि जनता की समस्याओं के खिलाफ पार्टी कार्यकर्ता संघर्ष करें। साथ ही आमजन को पार्टी की नीतियों एवं कार्यक्रमों की जानकारी समय-समय पर देते रहें। उन्होंने कहा कि दिवंगत अजीत चौधरी की नीतियों पर चलकर पार्टी को मजूबत बनाने की हर संभव कोशिश की जाएगी। राष्ट्रीय लोक दल का कुनबा रोज दिन प्रतिदिनबढ़ रहा है। प्रत्येक जाति प्रत्येक धर्म का व्यक्ति पुराने सभी नेता राष्ट्रीय लोकदल में आस्था रखने वाले है। रालोद में शामिल होने के बाद थानाभवन के पूर्व विधायक अब्दुल वारिस राव ने कहा कि वह पार्टी को आगे बढाने के लिए कोई कसर नही छोड़ेगें। जो जिम्मेवारी उन्हें दी जाएगी, उसको बखूबी निभाएंगे। पूर्व विधायक राव ने कहा कि रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी के हाथों को मजबूत करने के लिए कोई कसर बाकी नही छोड़ेंगे। रालोद के पूर्व मुखिया चौ. अजीत सिंह में आस्था रखने वाले कई पूर्व विधायक एवं सांसद अब इस पार्टी के साथ जुडऩे में दिलचस्पी दिखा रहे है। इसका मुख्य कारण उनका अजीत सिंह की नीतियों से प्रभावित होना है।
बता दें कि पूर्व विधायक वारिस 2007 में रालोद से विधायक चुने गए थे और दो बार बसपा के टिकट पर विधायक का चुनाव लड़ चुके हैं। वारिस 2007 में रालोद के टिकट पर थानाभवन से पहली बार विधायक बने थे। इसके बाद वह बसपा में शामिल हो गए तथा 2012 और 2017 का विधानसभा चुनाव बसपा के टिकट पर लड़ा। 2012 के चुनाव में उन्हें करीब 50 हजार तथा 2017 में करीब 74 हजार वोट मिले थे। नसीमुद्दीन सिद्दीकी के बसपा छोडऩे के बाद उन्होंने भी पार्टी से किनारा कर लिया था। वारिस के पिता राव अब्दुल राफे खां थानाभवन से ही स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह की पार्टी से 1969 में विधायक चुने गए थे। उनकी माता राव मसर्रत बेगम भी 2000 में भारतीय किसान कामगार पार्टी से चुनाव लड़ीं।