निवेशकों के सिर चढ़कर बोलता क्रिप्टो करेंसी का जादू

क्रिप्टो करेंसी का जादू आज निवेशकों के सिर चढ़कर बोल रहा है। पिछले कुछ साल के भीतर दुनियाभर में किप्टो करेंसी की लोकप्रियता दिन दूनी-रात चौगनी बढ़ गई है। इसके प्रति निवेशकों की दिलचस्पी निरंतर बढ़ रही है। ऐसे में भारत सरकार को भी इस तरफ ध्यान देना पड़ा है। किप्टो करेंसी को लेकर सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) का अलग-अलग रूख है। सरकार बेहद सोच-विचार कर इस मुद्दे पर कदम उठाती नजर आ रही है। यह भी साफ हो गया है कि देश में क्रिप्टो को मुद्रा के तौर पर मंजूरी नहीं मिलेगी। किप्टो करेंसी में उतार-चढ़ाव का सिलसिला आए दिन देखने को मिलता है। इस करेंसी ने आरबीआई की चिंता भी बढ़ा रखी है।

क्रिप्टो करेंसी का बढ़ता प्रचलन चर्चाओं में है। क्रिप्टो करेंसी किसी मुद्रा का एक डिजिटल रूवरूप है। यह किसी सिक्के अथवा नोट की तरह ठोस रूप में उपभोक्ता की जेब में नहीं होता है। यह पूरी तरह से ऑनलाइन होती है। व्यापार के तौर पर बिना किसी नियम के इसके जरिए व्यापार होता है। इसे कोई सरकार या विनियामक प्राधिकरण (अथॉरिटी) जारी नहीं करती है। भारत में दस करोड़ से ज्यादा नागरिकों के पास इस समय क्रिप्टो एसेट हैं। जबकि क्रिप्टो ट्रेडर की संख्या 10 लाख को पार कर चुकी है। जानकारों के मुताबिक देश में हाई फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स की संख्या अस्सी हजार के पार जा पहुंची है। साल 2017-18 के बुल रन में यह संख्या लगभग पच्चीस हजार थी।

देश में इसके निवेशकों की संख्या तेजी के साथ बढ़ रही है। इस बीच भारत सरकार ने भी क्रिप्टो करेंसी के लिए दरवाजे बंद नहीं करने का निर्णय लिया है। सरकार ने क्रिप्टो पर अलग रूख अपनाने का फैसला किया है। देश में क्रिप्टो करेंसी को मुद्रा के रूप में मंजूरी नहीं मिलेगी। मतलब साफ कि यदि किसी के पास बिटकॉइन या इथेरियम जैसी क्रिप्टो करेंसी है तो वह उससे शेयर, गोल्ड या बॉन्ड की तरह रख सकता है, मगर उसे करेंसी की भांति किसी सेवा या सामान के लिए भुगतान करने में उपयोग नहीं कर सकते हैं। क्रिप्टो करेंसी के नियमन के मसले पर भारत सरकार की समिति और ब्रोकरेज एवं ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म की बैठक में जिस एक मुद्दे पर सहमति हुई है उसमें से एक यह है कि भारत में क्रिप्टो करेंसी का एक्टिव सॉलीसिटेशन नहीं किया जाएगा।

यानी निवेशकों को किसी भी प्रकार से क्रिप्टो करेंसी में निवेश करने को प्रेरित नहीं किया जाएगा। इसका एक मतलब यह भी है कि क्रिप्टो करेंसी के भाव में होने वाले भारी उतार-चढ़ाव को दिखाकर निवेशकों को शानदार रिटर्न का वादा भी नहीं किया जा सकेगा। एक्टिव सॉलीसिटेशन का अर्थ यह है कि किसी निवेशक या संस्था द्वारा आमजन को एक संवाद के रूप में उसके फायदे बताकर अपनी सेवाओं को खरीदने या सब्सक्राइब करने के लिए लुभाना। यदि कोई कंपनी निवेशकों को कुछ साल बाद के वित्तीय लक्ष्य को पूरा करने के लिए किसी निवेश विकल्प में जाने को प्रेरित करती है तो उसे एक्टिव सॉलीसिटेशन कहते हैं।

मसलन यदि आप पांच साल बाद कार खरीदने के लिए दस लाख रुपए जोड़ना चाहते हैं तो आपको यह कहा जा सकता है कि प्रतिमाह इस स्कीम में सिर्फ दस हजाररुपए निवेश करने की जरूरत है। भारत में मौजूदा नियमों के मुताबिक शेयर बाजार में निवेश का विकल्प उपलब्ध कराने वाले ऑप्शन भी भी निवेशकों को गारंटीड रिटर्न का वादा नहीं करते। ऐसे में क्रिप्टो एक्सचेंज यदि शानदार रिटर्न की तस्वीर दिखा कर निवेशकों को अपने प्लेटफार्म पर आने को लुभाते हैं तो यह नियमों का सीधा-सीधा उल्लंघन है। हालाकि आरबीआई गवर्नर ने एक बार फिर क्रिप्टो करेंसी को लेकर चेताया है। आरबीआई गवर्नर ने कहा है कि क्रिप्टो करेंसी ने आरबीआई के लिए गंभीर चिंता उत्पन्न कर दी है।

एक रेगुलेटर के तौर पर आरबीआई के सामने क्रिप्टो करेंसी को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो गई है। माइक्रोइकनॉमिक संतुलन और वित्तीय स्थिता दोनों लिहाज से क्रिप्टो करेंसी चिंता पैदा करती है। क्रिप्टो करेंसी में बिटक्वाइन सबसे लोकप्रिय है। बिटक्वाइन साल 2008 में शुरू हुई थी। क्रिप्टो के जानकारों का मानना है कि साल के अंत तक बिटक्वाइन की कीमत 98 हजार डॉलर तक पहुंच सकती है। केंद्रीय रिजर्व बैंक ने डिजिटल करेंसी के कारण साइबर धोखाधड़ी के मुद्दे को उठाया है। 2018 में आरबीआई ने क्रिप्टो करेंसी के लेन-देन का समर्थन करने को लेकर बैंकों और विनियमित वित्तीय संगठनों को प्रतिबंधित कर दिया था, मगर मार्च 2020 में सर्वोच्च न्यायालय ने आरबीआई के प्रतिबंध के खिलाफ फैस्ला सुनाया था।

शीर्ष अदालत ने कहा था कि सरकार को कोई निर्णय लेकर इस मामले पर कानून बनाना चाहिए। वहीं, जानकारों का कहना है कि बिटकॉइन और ईथर जैसी क्रिप्टो करेंसी एक सार्वजनिक संपत्ति है, जिसे किसी राष्ट्र की मान्यता नहीं है या कोई मालिक नहीं है। यदि आपके पास इंटरनेट है तो आप क्रिप्टो करेंसी ले सकते हैं। यदि कोई सरकार राष्ट्र की अर्थव्यवस्था और मौद्रिक नीति के लिए क्रिप्टो करेंसी का प्रयोग करना चाहती है तो उसे इसे नियंत्रित करने के लिए कुछ नियम बनाने होंगे। इनकी प्रतियोगिता की कोई जरूरत नहीं है। क्रिप्टो करेंसी के सार्वजनिक और केंद्रीय बैंक साथ-साथ चल सकते हैं।

क्रिप्टो एक्सचेंज पॉइंट नो यॉर कस्टमर (केवाईसी) एकत्र कर इसकी लेन-देन सिर्फ बैंक अकाउंट के जरिए कर सकते हैं। इस तरीके से कुछ बुरे तत्व इसका लाभ नहीं उठा पाएंगे, क्योंकि ब्लॉक चेन तकनीक में यह सार्वजनिक पारदर्शिता की व्यवस्था कर पाएगा। बताया यह भी जाता है कि भारत सरकार फरवरी-2022 में पेश होने वाले बजट में क्रिप्टो करेंसी को विनियमित करने की तैयारी में है। आगामी बजट में क्रिप्टो करेंसी को कवर करने वाले कानून पर भी चर्चा संभव है। यह भी जान लें कि क्रिप्टो करेंसी कोई जल्द रईस बनने की योजना नहीं है। निवेशकों को यह समझना चाहिए कि सभी प्रकार के निवेश में एक जोखिम होता है।

क्रिप्टो करेंसी अभी भी एक अन-रेगुलेटेड एसेट क्लास है, इसलिए इसमें जोखिम और ज्यादा है। निवेशकों को क्रिप्टो में अपनी कुल संपत्ति का पांच प्रतिशत से ज्यादा निवेश नहीं करना चाहिए। यदि आप क्रिप्टो में निवेश आरंभ कर रहे हैं तो आपको पहले क्रिप्टो एक्सचेंज से शुरूआत करनी चाहिए। क्रिप्टो एक्सचेंज वह प्लेटफॉर्म होता है, जहां निवेशक शेयर मार्केट की तरह क्रिप्टो करेंसी खरीदते-बेचते हैं और इसकी ट्रेडिंग करते हैं, मगर शेयर मार्केट के उलट, क्रिप्टो मार्केट सातों दिन चौबीसों घंटे चलता है। इसे रेगुलेट करने वाली कोई संस्था नहीं होती है। यह खुद ही खुद को रेगुलेट करता है।