लेखक:- प्रदीप गुप्ता
(समाजसेवी एवं कारोबारी हैं। व्यापारी एकता समिति संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष है और राजनीतिक एवं सामाजिक विषयों पर बेबाकी से राय रखते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर वोकल फॉर लोकल को मजबूत करने का अपना मंत्र दोहराया है। उन्होंने नागरिकों से विशेष रूप से इस दीपावली पर्व के मौके पर स्वदेश में निर्मित सामान को खरीदने की गुजारिश की है। पीएम मोदी की ये अपील बेहद प्रासंगिक है और निश्चित रूप से लोगों को स्थानीय सामान खरीदने के लिए प्रभावित और प्रोत्साहित करेगी। पिछले साल पीएम मोदी की अपील के बाद व्यापारी एकता समिति संस्थान ने एक आक्रामक राष्ट्रीय अभियान चलाया था, जिसमें व्यापारियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था।
अभियान के दौरान न सिर्फ चीनी सामानों का बहिष्कार किया गया था बल्कि उसकी होली भी जलाई गई थी। जिसके परिणामस्वरूप भारतीय व्यावसायिक समुदाय और देश के लोगों की सक्रिय मदद से चीन को रक्षाबंधन से नए साल के त्योहारी सीजन तक 70 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का व्यापार घाटा उठाना पड़ा है और इस बार किसी भी भारतीय व्यापारी ने चीन को दीपावली उत्सव के सामान से संबंधित कोई ऑर्डर नहीं दिया है। अगर चीन को भारत के त्योहारी मौसम में बड़ा घाटा उठाना पड़ा है और देश के लोग भारतीय सामान के प्रति जागरूक हुए है तो इसमें व्यापारी एकता समिति संस्थान भी व्यापारियों के सहयोग से बेहद महत्वपूर्ण निभा रही है। जिससे आम लोगों में भी अपने देश में बने सामानों को खरीदने के प्रति जागरूकता आई है।
व्यापारी एकता समिति संस्थान आगे भी चीनी सामानों के बहिष्कार की ये मुहिम जारी रखेगी ताकि ड्रैगन को झटका दिया जा सके और उसे सबक सिखाया जा सके। प्रधानमंत्री मोदी ने आत्मनिर्भर भारत के लिए कदम बढ़ाकर वोकल फॉर लोकल पर ध्यान देने के लिए कहा है। वोकल फॉर लोकल का मतलब है की देश में निर्मित वस्तुओं को केवल खरीदें नहीं बल्कि साथ में गर्व से इसका प्रचार भी करें। क्योंकि हर ब्रांड पहले लोकल ही थे, उसके बाद ही ग्लोबल ब्रांड बने है, ठीक उसी तरह हमे अपने लोकल प्रोडक्ट्स को ग्लोबल ब्रांड बनाना है। पहले खादी भी लोकल था पर अब यह भी ब्रांड है, इसे आपने ही ब्रांड बनाया है। इस संकट की घड़ी में यह लोकल ही हैं, जिन्होंने हमारी जरूरतों को पूरा किया है।
अब समय आ गया है की जो हमारे कुटीर उद्योग, गृह उद्योग, लघु-मंझोले उद्योग, एमएसएमई के लिए हैं, उन पर हम भरोसा दिखाएं। अगर देखा जाये तो विज्ञापन के कारण धड़ल्ले से हम बाहरी प्रोडक्ट्स उपयोग में ला रहे हैं और देश में निर्मित वस्तुओं को नहीं खरीद रहे। लोकल फॉर वोकल के बाद बहुत सी संस्थाएं और सेलेब्रटीज इसके लिए आगे आए हैं और लोगों से अपील कर रहे हैं की लोकल खरीदने में शर्माए नहीं। आविष्कार तभी होता है जब जरुरत होती है। कोरोना जैसे महामारी के कारण नौकरियों का हालत भी खराब है तो नए तरीके निकाले जाते हैं उन्ही में से एक है वोकल फॉर लोकल जो की स्थानीय क्षेत्रों में रोजगार उत्पन्न करेगा।
















