15 फीसद टैक्स का विरोध, 3.64 लाख करदाताओं पर पड़ेगा आर्थिक बोझ: प्रदीप गुप्ता

गाजियाबाद। नगर निगम द्वारा 15 फीसद संपत्ति कर बढ़ाने के निर्णय का हर तरफ विरोध शुरू हो गया है। पार्षदों के साथ अब व्यापारी भी इसका विरोध कर रहें है। पिछले वर्ष लॉकडाउन के चलते भी व्यापार पर असर पड़ा था और इस साल भी बीते एक माह से ज्यादातर दुकानें और प्रतिष्ठान बंद पड़े हैं। यही कारण है कि एक साथ 15 फीसद संपत्ति कर बढ़ाने का विरोध शुरू हो गया है। ऐसे में सबसे ज्यादा भार कमर्शियल करदाताओं पर पड़ेगा। एक जून से हाउस टैक्स के बिल पांचों जोन से जारी होने लगेंगे। एक साथ 15 फीसद हाउस टैक्स बढऩे से करदाताओं को भी परेशानी होगी। व्यापारी एकता समिति इंदिरापुरम संयोजक प्रदीप गुप्ता ने कहा एक जून से हाऊस टैक्स में 15 प्रतिशत की जो बढ़ोत्तरी की जा रही है, वह उचित नहीं है। पिछले करीब एक वर्ष से कोरोना महामारी के कारण व्यापार पूरी तरह से ठप चल रहा है। इसका असर लोगों की रोजी-रोटी पर पड़ा है। लोगों की नौकरी चली गई हैं और उनका वेतन भी कम हो गया है। कोरोना महामारी लोगों का पीछा नहीं छोड़ रही है। बीमारी का असर शहर के हर परिवार पर पड़ा है। ऐसा कोई परिवार नहीं है जिनके कोई सगे संबंधी, रिश्तेदार या जानकार की कोरोना से मौत नहीं हुई हो। शहर वासियों को निगम राहत देने के बजाए टैक्स और बढ़ाने जा रहा है। संकट के इस दौर में हमारी मांग है कि पिछले करीब एक वर्ष का हाऊस टैक्स नगर निगम माफ कर शहर की जनता को राहत देने का कार्य करे। हाउस टैक्स बढ़ाने का इस समय निर्णय लेना व्यापारियों के साथ ही जनता पर दोहरी मार है। उन्होंने मेयर आशा शर्मा को पत्र जारी करते हुए निवेदन किया कि वह हाऊस टैक्स में बढोत्तरी को वापस लेने का कार्य करें। उन्होने कहा बिल में 15 फीसदी की बढ़ोतरी की जाएगी। यानि कि 3.64 लाख करदाताओं पर इसका आर्थिक बोझ पड़ेगा। मेयर को तत्काल अपना फैसला वापस लेना चाहिए नहीं तो आम लोगों के साथ इंदिरापुरम को शांति पूर्वक असहयोग आंदोलन करने के लिए आगे आना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि नगर निगम लोगों पर मनमाने तरीके से टैक्स का भार नहीं थोप सकता है।