लखनऊ/गाजियाबाद। जम्मू-कश्मीर के बिजली विभाग के निजीकरण के विरोध में जम्मू-कश्मीर के 21 हजार बिजलीकर्मियों द्वारा किये जा रहे आन्दोलन के समर्थन में देशभर के बिजलीकर्मियों द्वारा से उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मचारियों ने 3 दिवसीय विरोध कर निजीकरण का विरोध तथा जम्मू-कश्मीर के बिजलीकर्मियों का समर्थन किया। सोमवार को लखनऊ के शक्तिभवन पर हुई विरोध सभा में बिजलीकर्मियों ने जम्मू-कश्मीर के बिजली विभाग पावर डेवलपमेंट डिपार्टमेंट के निजीकरण एवं अन्य मांगों के लिए किये जा रहे आन्दोलन को अपना समर्थन देते हुए जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल को ज्ञापन भेजकर उनसे तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के पदाधिकारी शैलेन्द्र दुबे, प्रभात सिंह, जय प्रकाष, जीवी पटेल, गिरीश पांडेय, सदरुद्दीन राना, सुहेल आबिद, राजेन्द्र घिल्डियाल, विनय शुक्ल, डीके मिश्र, महेंद्र राय, वीसी उपाध्याय, शशिकांत श्रीवास्तव, विपिन वर्मा, कुलेन्द्र सिंह चौहान, परशुराम, भगवान मिश्र, पूसे लाल, सुनील प्रकाश पाल, शम्भू रत्न दीक्षित, एके श्रीवास्तव, पीएस बाजपेई, वीके सिंह कलहंस, जीपी सिंह बताया कि जम्मू-कश्मीर के 21000 बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों द्वारा अपनी चार सूत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार किया जा रहा है, जिसमें जम्मू-कश्मीर पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन लिमिटेड और पावर ग्रिड कारपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के बीच प्रस्तावित संयुक्त उद्यम को बंद करना, अनबंडलिंग रिपोर्ट की सिफारिशों को पूरा न करने और राजपत्रित और अराजपत्रित स्तरों पर समिति द्वारा अनिवार्य पदों को बनाने में विफलता, दैनिक वेतन भोगियों के नियमितीकरण और सभी बिजली विकास विभाग इंजीनियर के नियमितीकरण पर एक श्वेत पत्र जारी करना शामिल है।
उन्होंने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में अनबंडलिंग, निगमीकरण, निजीकरण, फ्रेंचाईजीकरण के सभी प्रयोग विफल हो चुके हैं तथा उन्हीं विफल प्रयोगों को अलग-अलग नामों से ऊर्जा क्षेत्र में दोहराया जा रहा है। जिससे देश के ऊर्जा क्षेत्र जहां एक ओर भारी घाटे में जा रहा है, वहीं दूसरी ओर ऊर्जा क्षेत्र में अनावश्यक टकराव का वातावरण उत्पन्न हो रहा है। इससे अन्तत: उपभोक्ताओं में विभाग एवं सरकार की छवि पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है तथा उपभोक्ताओं को मंहगी बिजली मिलने के आसार भी प्रबल होते हैं।
ऊर्जा क्षेत्र के स्वस्थ विकास के लिए किसी भी प्रयोग से पहले वहां के बिजली कर्मचारियों एवं इंजीनियरों के साथ द्विपक्षीय वार्ता करनी चाहिए, आंख मूंद कर एकतरफा प्रयोग नहीं किये जाने चाहिए।
उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मियों ने घोषणा की कि यदि जम्मू-कश्मीर के बिजली कर्मियों के शान्तिपूर्ण आन्दोलन को बलपूर्वक कुचलने की कोशिश की गयी तो प्रदेश के बिजलीकर्मी चुप नहीं रहेंगे एवं उनके समर्थन में एनसीसीओईईई के आह्वान पर कोई भी कदम उठाने के लिए बाध्य होंगे।















