मामला वर्ष 2009 में मिनी एसडीजेड (स्पेशल डेवलपमेंट जोन) योजना के तहत हुए भूखंड आवंटन का है। भारत के महालेखा परीक्षक ( सीएजी ) ने जमीन आवंटन को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए आवंटियों से पाई-पाई वसूल करने का निर्देश दिया है। सीएजी ने कहा है कि भूखंड आवंटन के लिए आवंटियों से 3244 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से पैसा लिया जाना चाहिए। जबकि तत्कालीन आवंटन समिति ने 1629 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से भूखंड आवंटित कर दिए। यानी योजना के लाभार्थियों को महज आधी कीमत पर जमीन आवंटित कर दी गई।
उदय भूमि ब्यूरो
ग्रेटर नोएडा। यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी के इंस्टीट्यूशनल लैंड एलॉटमेंट मामले में लाभ कमाने वालों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। यमुना प्राधिकरण के सख्त रूख के बाद अब सीएजी ने भी इन पर डंडा चलाया है। मामला वर्ष 2009 में मिनी एसडीजेड (स्पेशल डेवलपमेंट जोन) योजना के तहत हुए भूखंड आवंटन का है। भारत के महालेखा परीक्षक ( सीएजी ) ने जमीन आवंटन को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए आवंटियों से पाई-पाई वसूल करने का निर्देश दिया है। सीएजी ने कहा है कि भूखंड आवंटन के लिए आवंटियों से 3244 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से पैसा लिया जाना चाहिए। जबकि तत्कालीन आवंटन समिति ने 1629 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से भूखंड आवंटित कर दिए। यानी योजना के लाभार्थियों को महज आधी कीमत पर जमीन आवंटित कर दी गई। विदित हो कि पिछले दिनों उत्तर प्रदेश सरकार ने अनुचित लाभ हासिल करने वाले सभी 13 संस्थानों से 2,201 करोड़ रुपये वसूली करने का आदेश जारी किया था। अब सीएजी की आपत्तियों और दिशा निर्देश से इस मामले में नया पेंच फंस गया है।
यमुना प्राधिकरण के सेक्टर-17 में 13 आवंटियों को तय दर से कम में जमीन आवंटित करने के मामले में सीएजी ने कड़ी आपत्ति जताई है। अब अगर सीएजी की आपत्ति पर अमल हुआ तो इन आवंटियों से 1615 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से अंतर राशि की वसूल की जाएगी। इसके साथ ही यमुना प्राधिकरण ब्याज और जुमार्ना भी वसूल सकता है। 1 जुलाई 2009 को मिनी एसडीजेड (स्पेशल डेवलपमेंट जोन) की योजना सेक्टर-17 में लाई गई। इसमें संस्थागत, आईटी, आईटीएस, बायोटक, रिक्रिएशनल ग्रीन, सर्विस आदि श्रेणी के 13 भूखंड आवंटित किए गए थे। अधिकतर भूखंड संस्थागत के थे। योजना के नियमों के अनुसार, भूखंड के 75 प्रतिशत में कोर गतिविधि करनी थी। इसके अलावा 10 प्रतिशत में व्यावसायिक, 10 प्रतिशत में ग्रुप हाउसिंग व 5 प्रतिशत में संस्थागत की अनुमति थी। उस समय जमीन की आवंटन दर 2670 रुपये प्रति वर्गमीटर थी। बावजूद इसके आवंटन समिति ने 1629 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से भूखंड आवंटित कर दिए। तय दर से कम मूल्य में आवंटन से प्राधिकरण को 1041 रुपये प्रति वर्गमीटर का नुकसान हुआ। यमुना प्राधिकरण ने यह अंतर राशि वसूलने के लिए आवंटियों को नोटिस जारी किए हैं। 15 अगस्त तक सभी को पैसा जमा करना है। प्राधिकरण के नोटिस के मुताबिक, 13 आवंटियों को बढ़ी दर के हिसाब से 982.85 करोड़ रुपए बतौर आवंटन राशि चुकाने पड़ेंगे। अब तक का ब्याज और लीज रेंट जोड़कर कुल धनराशि 2201.83 करोड़ रुपये बन गई है। लेकिन इसी बीच आॅडिट में सीएजी ने इस अंतर राशि को कम माना है। सीएजी का कहना है कि भूखंड की लागत से कम दर पर आवंटन हुआ। सीएजी के अनुसार यह आवंटन 3244 रुपये प्रति वर्ग मीटर से होना चाहिए। जबिक आवंटन 1629 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से हुआ था। इससे प्राधिकरण को काफी नुकसान हुआ है। सीएजी के मुताबिक इन आवंटियों से 1615 रुपये प्रति वर्ग मीटर की अंतर राशि की दर से वसूली की जानी चाहिए।
इन आवंटियों ने कमाया अनुचित लाभ
त्याग बिल्डस्पेस प्राइवेट लिमिटेड, एमएमए ग्रेन्स मिल्स प्राइवेट लिमिटेड, शकुंतला एजुकेशनल सोसायटी,
शांति एजुकेशनल सोसायटी, बाबू बनारसी दास ट्रस्ट, सतलीला एजुकेशनल फाउंडेशन ट्रस्ट, मारुति एजुकेशनल ट्रस्ट, जीएल बजाज एजुकेशनल ट्रस्ट, एक्सआइएमए एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड, एसके कॉन्ट्रेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, चंद्रलेखा कंस्ट्रक्शंस प्राइवेट लिमिटेड, इंडियन नॉलेज सिटी एचपीएस आईटी सोल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड।
















