-ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की 15 स्थानों पर मियावाकी वन विकसित करने की योजना
-शहर में हरियाली बढ़ाने की इस पहल में एनजीओ की मदद ली जा रही
उदय भूमि संवाददाता
ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ी पहल की है। मियावाकी पद्धति से चार स्थानों पर घने वन विकसित करने का काम शुरू कर दिया गया है। दो स्थानों पर पौधरोपण का काम पूरा हो चुका है। इसमें एनजीओ की मदद भी ली जा रही है। इन चार स्थानों पर 30 हजार से अधिक पौधे लगाए जाएंगे।
बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए प्राधिकरण ने हरियाली बढ़ाने की योजना तैयार की है। सामान्य तरीके से पौधरोपण करने के साथ शहरी वन विकास योजना के तहत मियावाकी पद्धति से भी प्रमुख स्थानों पर घने वन विकसित किए जाएंगे। सीमित जगह में ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाए जाएंगे। इस विधि से तैयार वन इतने घने होते हैं कि सूर्य की रोशनी नीचे नहीं आ पाती। प्राधिकरण ने इस पर काम शुरू कर दिया है। अधिकारी के मुताबिक हरित क्षेत्र (ग्रीन बेल्ट) व खाली पड़ी जगह पर मियावाकी वन विकसित किए जा रहे हैं। क्षेत्र के खानपुर गांव और सेक्टर पी-3 के पास मियावाकी वन का काम पूरा हो चुका है,जबकि सेक्टर-16 और जुनपत गांव के पास एक बड़े क्षेत्रफल में पौधरोपण का काम चल रहा है।
सेक्टर-16 में 10-12 एकड़ में मियावाकी वन विकसित किया जाएगा। वहीं जुनपत गांव के पास हाईटेंशन लाइन के नीचे खाली पड़ी जगह उपयोग में लाई जा रही है। यहां भी पौधरोपण का काम चल रहा है। प्राधिकरण के सहायक निदेशक उद्यान बुद्ध विलास ने बताया कि लगभग 15 स्थानों पर मियावाकी वन विकसित किए जाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। शहर के सभी प्रमुख हरित क्षेत्र को मियावाकी वन के रूप में विकसित किया जाएगा। इसमें एनजीओ की मदद ली जा रही है। कई एनजीओ इस काम के लिए आगे आए हैं।
कलेक्ट्रेट में मियावाकी वन हो चुके विकसित
सूरजपुर स्थित कलेक्ट्रेट परिसर में मियावाकी वन विकसित किया गया है। लगभग पांच साल पहले तत्कालीन जिलाधिकारी बीएन सिंह के कार्यकाल में यह काम हुआ था। इसके अलावा कुछ अन्य स्थानों पर इस पद्धति के तहत वन विकसित किए गए हैं।
















