-कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप, मोदी सरकार में सिखों को न्याय की उम्मीद
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व सदस्य एवं भाजपा महानगर के पूर्व संयोजक सरदार एस.पी. सिंह ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से 1984 के दंगों को सिख नरसंहार घोषित करने की माँग की है। उन्होंने कहा कि 1984 में कांग्रेस सरकार के शासनकाल में हजारों निर्दोष और निहत्थे सिखों की हत्या की गई, उनके घरों को लूटा गया, महिलाओं पर अत्याचार किए गए और सिखों को जिंदा जलाने तक की क्रूर घटनाएँ हुईं। यह एक योजनाबद्ध नरसंहार था, जो सिर्फ दिल्ली ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश और देश के अन्य राज्यों में भी कराया गया। सरदार एस.पी. सिंह ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने कभी भी इस नरसंहार की निंदा नहीं की, दोषियों के खिलाफ न तो मु$कदमे दर्ज कराए और न ही पीडि़त परिवारों को कोई मुआवज़ा दिया। उन्होंने कहा कि इस नरसंहार में कई बड़े कांग्रेसी नेताओं की संलिप्तता जगजाहिर थी, लेकिन सत्ता के दबाव में मामले दबा दिए गए।
उन्होंने बताया कि 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए एसआईटी का गठन किया, जिससे दोषियों पर दोबारा कार्रवाई शुरू हुई। अब कई मामलों में कड़ी सजा दिलाने की प्रक्रिया जारी है। सरदार एस. पी. सिंह ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और विभिन्न देशों की सरकारों ने 1984 की घटनाओं को सिख नरसंहार के रूप में मान्यता दी है। न्यूयॉर्क राज्य की सीनेट ने भी इसे सिख नरसंहार घोषित किया और सिखों पर हुए अत्याचारों की निंदा की। उन्होंने कहा कि देशभर में सिख समुदाय यह माँग कर रहा है कि 1984 के दंगों को आधिकारिक रूप से सिख नरसंहार घोषित किया जाए, दायरा बढ़ाया जाए, दोषियों को सख़्त सज़ा दी जाए और पीडि़त परिवारों को पर्याप्त मुआवजा दिया जाए। उन्होंने कहा कि सिख समुदाय का देश की रक्षा और धर्म की सेवा में अहम योगदान रहा है। मोदी सरकार गुरु ते$ग बहादुर जी की शहादत के 350 वर्ष पूरे होने पर इस गौरवशाली इतिहास को देशभर में प्रचारित कर रही है, जिससे देशभक्ति की भावना और मजबूत हो रही है। सरदार एस.पी. सिंह ने केंद्र सरकार से अपील की कि संसद में इस विषय पर चर्चा कर 1984 के दंगों को सिख नरसंहार घोषित किया जाए, ताकि कांग्रेस के असली चेहरे को जनता के सामने लाया जा सके और पीडि़त परिवारों को न्याय दिलाया जा सके।
















