सफाई व्यवस्था पर नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक की सख्ती: लापरवाही नहीं, चाहिए परिणाम

-10 दिन में नाले-सीवर साफ करने का लक्ष्य, ठेकेदार का टेंडर रद्द, अधिकारियों को चेतावनी

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। बरसात से पहले शहर को जलभराव से बचाने और सफाई व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने शुक्रवार को नगर निगम मुख्यालय में हुई समीक्षा बैठक में अफसरों को स्पष्ट शब्दों में संदेश दिया कि काम चाहिए, कोताही नहीं। बैठक के दौरान मोहन नगर जोन की सफाई व्यवस्था पर असंतोष जताते हुए नगर आयुक्त ने ठेकेदार का टेंडर तत्काल प्रभाव से निरस्त करने के आदेश दे दिए और कहा कि अब निगम खुद शेष नालों की सफाई करेगा। उन्होंने नगर स्वास्थ्य अधिकारी को सख्त हिदायत दी कि विभागीय संसाधनों से क्षेत्र की सफाई हर हाल में कराई जाए। नगर आयुक्त ने सभी जोनल प्रभारियों और विभागाध्यक्षों को 10 दिनों का समय देते हुए निर्देश दिया कि सभी 474 नालों की सफाई मानसून से पहले पूरी हो जानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर निर्धारित समय के बाद निरीक्षण में कोई गड़बड़ी या अधूरी सफाई पाई गई, तो जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई अनिवार्य रूप से होगी।

स्वास्थ्य विभाग की ओर से जब यह बताया गया कि कई स्थानों पर नालों पर अवैध पक्के निर्माण होने से सफाई बाधित हो रही है, तो नगर आयुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए कि ऐसे अतिक्रमण तत्काल चिन्हित कर हटाए जाएं, और संबंधित ज़ोनल प्रभारी इसकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी लें। बैठक में बताया गया कि नगर निगम ने अपने संसाधनों से 474 नालों की सफाई शुरू कर दी है, जबकि 81 नालों की सफाई अब तक ठेके पर कराई जा रही थी। बड़े नाले 89, मंजले नाले 257 और छोटे नाले 209 की पहचान कर ली गई है, जिनकी सफाई अब तेजी से की जा रही है। महाप्रबंधक जल, कामाख्या प्रसाद आनंद को भी सख्त निर्देश मिले कि सीवर से जुड़ी शिकायतों का तत्काल समाधान किया जाए। वाबाग कंपनी को खास तौर पर कहा गया कि आंतरिक वार्डों में जनता की शिकायतों पर तेजी से कार्रवाई की जाए और फील्ड लेवल पर सफाई व्यवस्था में सुधार लाया जाए।

नगर आयुक्त ने कहा कि अब हर नाले की सफाई का डेली रिपोर्टिंग सिस्टम लागू किया जाएगा। स्वास्थ्य, जलकल और निर्माण विभागों को आपस में समन्वय बनाकर काम करने को कहा गया है, ताकि एक भी क्षेत्र में सफाई अधूरी न रह जाए। विक्रमादित्य सिंह मलिक का प्रशासनिक रवैया न सिर्फ निगरानी और जवाबदेही का परिचायक बन रहा है, बल्कि इससे गाजियाबाद नगर निगम की कार्यप्रणाली में एक नई सख्ती और पारदर्शिता की लहर भी महसूस की जा रही है। नगर आयुक्त ने कहा कि जनहित के किसी भी कार्य में लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। नालों और सीवर की सफाई बरसात से पहले हर हाल में पूरी होनी चाहिए। सभी ज़ोनल प्रभारी अपने क्षेत्रों में सक्रिय रहकर कार्यों की निगरानी करें और सफाई व्यवस्था में कोई कमी न रहे। अगर किसी भी नाले की सफाई अधूरी मिली तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई तय होगी। नगर निगम अब खुद सफाई की कमान संभालेगा। अतिक्रमणों को चिन्हित कर तत्काल हटाया जाए और हर विभाग समन्वय के साथ कार्य करे। हमारी प्राथमिकता स्पष्ट है शहर को स्वच्छ, सुरक्षित और जलभराव मुक्त बनाना है।