-जिला आबकारी अधिकारी संजय कुमार प्रथम की आक्रामक रणनीति से ध्वस्त हुआ अवैध शराब का पूरा नेटवर्क
-शराब माफियाओं का सफाया, आबकारी विभाग की चौतरफा कार्रवाई से टूटा तस्करी का नेटवर्क
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। जनपद में आबकारी विभाग की आक्रामक रणनीति और मजबूत नेटवर्किंग ने जिले को शराब तस्करी के चंगुल से बाहर निकालने में एक ऐतिहासिक कामयाबी हासिल की है। दिल्ली से सटे इस जिले को अब तक शराब माफियाओं का सुरक्षित ठिकाना माना जाता था, लेकिन बीते कुछ महीनों में जिस पैमाने पर कार्रवाई हुई है, उसने पूरे सिस्टम की छवि बदल दी है। आबकारी विभाग ने शराब तस्करों के खिलाफ जिस सख्ती और सतर्कता के साथ मोर्चा खोला है, उसने न सिर्फ उन्हें जिले से खदेड़ दिया है, बल्कि एक स्पष्ट संदेश भी दिया है कि गाजियाबाद अब अपराधियों की सुरक्षित पनाहगाह नहीं रह गया। जिला आबकारी अधिकारी संजय कुमार प्रथम की निगरानी में विभाग ने तस्करी के पूरे तंत्र को तहस-नहस कर दिया है। लोनी, ट्रॉनिका सिटी, हिंडन खादर और सीमावर्ती क्षेत्रों में जहां पहले कच्ची शराब का खुलेआम निर्माण होता था, अब वहां सन्नाटा पसरा है। हिंडन खादर, जो एक समय पर कच्ची शराब की भट्टियों से भरा रहता था, वहां आज एक भी लीटर शराब का निर्माण नहीं हो रहा।
यह परिवर्तन अचानक नहीं हुआ, बल्कि इसके पीछे है महीनों की प्लानिंग, सटीक खुफिया तंत्र और मैदान में डटी टीमों की सतत मेहनत। आबकारी विभाग की टीमों ने लगातार दबिश देकर, माफियाओं के ठिकानों को ध्वस्त किया और उनके तंत्र को तोड़ा। शराब माफियाओं की रीढ़ तोडऩे के लिए संजय कुमार प्रथम ने एक साथ कई मोर्चों पर काम किया। उन्होंने अपनी टीमों को इलाकेवार जिम्मेदारी दी और हर निरीक्षक को यह टारगेट सौंपा कि वे अपने क्षेत्र को पूरी तरह अवैध शराब से मुक्त कराएं। आबकारी निरीक्षक मनोज शर्मा, अखिलेश कुमार, डॉ राकेश त्रिपाठी, अनुज वर्मा, कीर्ति सिंह, चमन सिंह और चंद्रजीत सिंह ने दिन-रात की मेहनत से इलाके की हर गली, हर नुक्कड़, हर खेत और हर झोपड़ी को खंगाला। ये अधिकारी महज औपचारिक जांच नहीं कर रहे थे, बल्कि पूरी संवेदनशीलता और रणनीति के साथ काम कर रहे थे। उन्हें यह मालूम था कि शराब तस्करी सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि समाज के लिए एक धीमा जहर है। अब तस्कर इतने डरे हुए हैं कि उन्होंने अपने पुराने ठिकाने तक छोड़ दिए हैं।
हाल ही में ट्रॉनिका सिटी के कासिम बिहार और लोनी बॉर्डर स्थित बेहटा हाजीपुर जैसे इलाकों में दबिश दी गई, लेकिन वहां कुछ भी बरामद नहीं हुआ। यह कोई नाकामी नहीं, बल्कि विभाग की बड़ी जीत थी तस्करों को पहले ही भनक लग गई थी और वे डर के मारे भाग चुके थे। यही डर अब उनकी आदत बन चुका है। गाजियाबाद में अब शराब तस्करी करना आसान नहीं रहा। सिर्फ कार्रवाई से बात नहीं बनी, विभाग ने जागरूकता को भी हथियार बनाया। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को बताया गया कि कच्ची शराब न सिर्फ गैरकानूनी है, बल्कि जानलेवा भी है। विभाग ने स्थानीय मुखबिरों का नेटवर्क भी मजबूत किया, जिससे हर संदिग्ध गतिविधि की सूचना समय रहते मिल सके। ड्रोन, GPS और CCTV जैसे तकनीकी संसाधनों का इस्तेमाल कर निगरानी को और पैना किया गया। यह एक आधुनिक, स्मार्ट और संवेदनशील आबकारी विभाग की तस्वीर पेश करता है, जो सिर्फ डंडे के बल पर नहीं, बल्कि समझदारी और भागीदारी के साथ काम कर रहा है। जिला आबकारी अधिकारी संजय कुमार प्रथम खुद हर मोर्चे पर नजर बनाए हुए हैं। उनका कहना है कि यह अभियान केवल कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य समाज को इस लत से मुक्ति दिलाना है। उनका साफ संदेश है कि जो भी कानून तोड़ेगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा। विभाग का अगला लक्ष्य तस्करों की बची-खुची जड़ों को भी पूरी तरह उखाड़ फेंकना है।
हिंडन खादर: जो कल तक था ‘कच्ची शराब का किला’, आज बना सन्नाटे का गवाह
एक समय था जब हिंडन खादर क्षेत्र में हजारों लीटर कच्ची शराब का निर्माण होता था। दर्जनों अवैध भट्टियां धड़ल्ले से चलती थीं, और माफिया खुलेआम व्यापार करते थे। लेकिन आज स्थिति पूरी तरह पलट गई है। आबकारी विभाग की टीम की निगरानी और चौतरफा रणनीति ने इस पूरे क्षेत्र को साफ कर दिया। यहां अब एक भी भट्टी सक्रिय नहीं, न कोई शराब निर्माण का अड्डा।
मुखबिर तंत्र और तकनीक का नया गठजोड़
संजय कुमार प्रथम की अगुवाई में आबकारी विभाग ने केवल पुलिसिया शैली नहीं अपनाई, बल्कि इंटेलिजेंस नेटवर्किंग, डिजिटल निगरानी, और स्थानीय मुखबिरों का ऐसा ताना-बाना बुना है कि तस्करों के कदम पड़ते ही खबर पहुंच जाती है।
सिर्फ लाठी नहीं, तकनीक और नेटवर्क भी बना हथियार
गाजियाबाद आबकारी विभाग ने पारंपरिक कार्यशैली को छोड़ नई सोच के साथ काम किया। मुखबिरों का नेटवर्क मजबूत किया गया, स्थानीय समाज के लोगों को साथ जोड़ा गया, अवैध शराब के प्रभाव को लेकर घर-घर जाकर जागरूकता फैलाई गई, तकनीकी निगरानी (ड्रोन, सीसीटीवी, जीपीएस) का इस्तेमाल बढ़ाया गया। साथ ही इस संयुक्त कार्यशैली ने विभाग को हर क्षेत्र में सफलता दिलाई।
गाजियाबाद बन रहा राज्य का आदर्श मॉडल
प्रदेश के अन्य जिलों में जहां शराब तस्करी अभी भी चुनौती बनी हुई है, वहीं गाजियाबाद की तस्वीर पूरी तरह से बदलने लगी है। अब यहां पुलिस और आबकारी विभाग एक संगठित ढंग से काम कर रहे हैं। गांव से शहर तक हर इलाके में आबकारी विभाग की मजबूत मौजूदगी, शराब तस्करी की हर संभावना को पहले ही समाप्त कर रही है।


















