-आयात निर्भरता घटाने, अनुसंधान-विकास, आधारभूत ढाँचे और कौशल विकास पर दिया गया जोर
उदय भूमि संवाददाता
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में चल रहे इंडिया मेडटेक एक्सपो 2025 के दूसरे दिन शुक्रवार को स्वास्थ्य उपकरण क्षेत्र से जुड़े अहम मुद्दों पर सार्थक और गहन विमर्श हुआ। इस अवसर पर विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत और विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने भागीदारी कर भारत को चिकित्सा उपकरण निर्माण में आत्मनिर्भर और वैश्विक मानकों पर अग्रणी बनाने की रणनीति पर प्रकाश डाला। सुबह 10:30 बजे से प्रारम्भ हुए सत्र में वैश्विक नियामक प्रस्तुतिकरण (ग्लोबल रेग्युलेटरी सबमिशन) आयोजित हुआ। इसमें भारत सरकार की ओर से आसीम साहू, उप औषधि नियंत्रक ने पैनल सदस्य के रूप में भाग लिया। इस सत्र का संचालन डॉ. राजीव छिब्बर, उपाध्यक्ष- बाह्य मामलों, सहजानंद मेडिकल प्रौद्योगिकी ने किया। क्यूबा और रूस से आए नियामक प्रतिनिधियों ने अपने-अपने देशों के अनुभव साझा करते हुए चिकित्सा उपकरण क्षेत्र में सहयोग की संभावनाएँ जताईं।
दोपहर 12 बजे से प्रारम्भ हुए तीसरे सत्र का विषय था, भारत के चिकित्सा उपकरण पार्कों को सशक्त बनाना, वैश्विक मानक निर्माण की रूपरेखा तय की गई। इस सत्र में यह स्पष्ट हुआ कि भारत का चिकित्सा उपकरण उद्योग वर्ष 2030 तक 30 अरब डॉलर (लगभग ढाई लाख करोड़ रुपये) तक पहुँचने का अनुमान है। विशेषज्ञों ने कहा कि वर्तमान समय में भारत लगभग 70 से 80 प्रतिशत उपकरणों के लिए आयात पर निर्भर है। यदि देशभर में स्थापित किए जा रहे मेडिकल डिवाइस पार्क्स को सुदृढ़ और सशक्त बनाया गया तो यह न केवल आयात निर्भरता को घटाएगा बल्कि भारत को चिकित्सा उपकरणों के निर्यातक देश के रूप में भी स्थापित करेगा। भारत के चिकित्सा उपकरण पार्क्स आयात निर्भरता घटाने और वर्ष 2030 तक 30 अरब डॉलर के लक्ष्य तक पहुँचने में अहम भूमिका निभाएँगे।
आधारभूत ढाँचे, अनुसंधान एवं विकास और कौशल विकास में निवेश आवश्यक है। सरकार, उद्योग जगत और शिक्षा संस्थानों के बीच सहयोग से भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बढ़त मिलेगी। इस विशेष सत्र की अध्यक्षता हिमानी पांडे, अतिरिक्त सचिव, उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने की। सह-अध्यक्ष के रूप में आर. पी. सिंह, संयुक्त सचिव, औषधि विभाग उपस्थित रहे। संचालन का दायित्व रोहित सहानी, प्रबंध निदेशक एवं भागीदार, बीसीजी ने निभाया। इंडिया मेडटेक एक्सपो 2025 में राकेश कुमार सिंह, मुख्य कार्यपालक अधिकारी, यमुना प्राधिकरण एवं उत्तर प्रदेश चिकित्सा उपकरण पार्क, राजेश राठौर, कार्यकारी निदेशक, एमपीआईडीसी, मध्य प्रदेश, सेल्वी ए. कैथरीन सारन्या, कार्यकारी निदेशक, तमिलनाडु राज्य उद्योग संवर्द्धन निगम, डॉ. जितेंद्र शर्मा, संस्थापक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी, आंध्र प्रदेश मेडटेक जोन मौजूद रहे।
यमुना प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी राकेश कुमार सिंह ने कहा कि भारत चिकित्सा उपकरण निर्माण के क्षेत्र में जिस गति से आगे बढ़ रहा है, वह आने वाले वर्षों में देश को न केवल आत्मनिर्भर बनाएगा, बल्कि वैश्विक मंच पर भी भारत को एक मजबूत पहचान दिलाएगा। उत्तर प्रदेश के जेवर क्षेत्र में विकसित किया जा रहा मेडिकल डिवाइस पार्क इस दिशा में क्रांतिकारी कदम साबित होगा। यहाँ स्थापित होने वाले उद्योग न केवल लाखों लोगों को रोजगार देंगे बल्कि विदेशी निवेश को भी आकर्षित करेंगे। हमारा लक्ष्य है कि यमुना प्राधिकरण के सहयोग से बनने वाला यह पार्क भारत को चिकित्सा उपकरणों का वैश्विक निर्यातक केन्द्र बनाए। विशेषज्ञों ने कहा कि यदि भारत सरकार की मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसी पहलों को चिकित्सा उपकरण क्षेत्र में प्रभावी ढंग से लागू किया गया तो भारत निकट भविष्य में चिकित्सा उपकरण निर्माण का वैश्विक केन्द्र (ग्लोबल हब) बन सकता है। यह आयोजन इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भारत आने वाले वर्षों में न केवल घरेलू जरूरतें पूरी करेगा बल्कि चिकित्सा उपकरणों का एक बड़ा निर्यातक बनकर उभरेगा।

















