-वाद-विवाद प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने दिखाया अदम्य उत्साह, निर्णायकों ने की सराहना
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। आनंद औद्योगिक क्षेत्र, मोहन नगर स्थित मॉडर्न कॉलेज ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज में हिंदी दिवस के पावन अवसर पर शुक्रवार को एक भव्य वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता का संयोजन महाविद्यालय की सांस्कृतिक एवं सह-पाठ्यक्रम समिति तथा भारतीय भाषा, संस्कृति एवं कला प्रकोष्ठ ने संयुक्त रूप से किया। प्रतियोगिता का विषय था- भारतवर्ष में विकास और प्रगति की असली ध्वनि हिंदी भाषा से ही संभव है। इस विषय ने विद्यार्थियों के मस्तिष्क और हृदय दोनों को झकझोरने का कार्य किया और उन्हें हिंदी की प्रासंगिकता, उसकी ताकत और समाज में उसकी उपयोगिता पर गंभीर चिंतन प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान किया। कार्यक्रम की शुरुआत दोपहर दो बजे हुई। महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर (डॉ.) निशा सिंह, महाविद्यालय के सचिव श्री विनीत गोयल तथा सभी विभागाध्यक्षों ने माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। पूरे वातावरण में पवित्रता और सांस्कृतिक गरिमा का भाव व्याप्त हो गया। सरस्वती वंदना के मधुर स्वर के बीच उपस्थित जनसमूह ने हिंदी दिवस की महत्ता को आत्मसात किया।
इस प्रतियोगिता में विभिन्न विभागों के लगभग पचास से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया। विद्यार्थियों ने उत्साह और आत्मविश्वास के साथ हिंदी भाषा की गरिमा, उसकी उपयोगिता, भाषा नीति, समाज और संस्कृति पर उसके प्रभाव तथा वैश्विक परिप्रेक्ष्य में उसकी स्थिति पर पक्ष और विपक्ष में तर्कपूर्ण विचार रखे। किसी ने हिंदी को राष्ट्र की आत्मा बताया तो किसी ने इसे विकास की अनिवार्य ध्वनि कहा। वहीं विपक्ष रखने वाले विद्यार्थियों ने भी तार्किक दृष्टिकोण से बताया कि आधुनिक युग में अंग्रेज़ी जैसी अंतरराष्ट्रीय भाषाओं का महत्व कम करके नहीं आँका जा सकता। लेकिन अंतत: सभी के वक्तव्यों ने हिंदी की प्रासंगिकता और उसकी महत्ता को ही और अधिक स्पष्ट किया।
महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. (डॉ.) निशा सिंह ने कहा कि हिंदी हमारी सांस्कृतिक धरोहर है। यह केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी पहचान, हमारी सोच और हमारी भावनाओं की अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। हमें हिंदी को केवल बोलचाल या लेखन की भाषा न मानकर इसे आत्मसम्मान और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों को मातृभाषा के प्रति सम्मान और उसमें विचार अभिव्यक्ति की शक्ति को प्रोत्साहित करते हैं। प्रतियोगिता का मूल्यांकन एक सशक्त निर्णायक मंडल द्वारा किया गया, जिसमें प्रबंधन एवं वाणिज्य विभाग की विभागाध्यक्षा डॉ. निधि अग्रवाल, कंप्यूटर अनुप्रयोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. मनीष अग्रवाल तथा शिक्षा विभाग की विभागाध्यक्षा डॉ. निशि त्यागी सम्मिलित थे। तीनों निर्णायकों ने विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों को गंभीरता और निष्पक्षता के साथ सुना और निर्धारित मानदंडों के आधार पर उनका मूल्यांकन किया। विद्यार्थियों की तार्किक शैली, वक्तृत्व कला, आत्मविश्वास और प्रस्तुतीकरण को आधार मानते हुए विजेताओं का चयन किया गया। पूरा माहौल हिंदीमय और ऊर्जावान रहा। महाविद्यालय का सभागार विद्यार्थियों की ऊँची आवाज़ों और गूँजते नारों से जीवंत हो उठा। उपस्थित दर्शकों ने भी हर वक्ता के विचारों का जोरदार तालियों से स्वागत किया। विद्यार्थियों के उत्साह और जोश को देखकर निर्णायक मंडल तथा समस्त प्राध्यापकगण ने उनकी सराहना की।
कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालय के सभी विभागाध्यक्ष, प्रवक्ता गण और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में माना कि हिंदी केवल भाषा ही नहीं, बल्कि राष्ट्र की धड़कन है। इस प्रतियोगिता ने विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, चिंतनशीलता और मातृभाषा के प्रति सम्मान की भावना को प्रबल किया। अंत में प्राचार्या प्रो. (डॉ.) निशा सिंह ने विजेताओं को शुभकामनाएँ दीं और सभी प्रतिभागियों को उनके उत्साह एवं समर्पण के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया। सचिव विनीत गोयल ने भी विद्यार्थियों के प्रयासों की प्रशंसा की और उन्हें निरंतर हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए प्रेरित किया। मॉडर्न कॉलेज ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज में आयोजित यह प्रतियोगिता केवल एक शैक्षणिक आयोजन नहीं, बल्कि हिंदी की शक्ति और भविष्य की संभावनाओं का सशक्त उत्सव सिद्ध हुई। विद्यार्थियों की ऊर्जावान प्रस्तुतियों ने यह साबित कर दिया कि भारतवर्ष के विकास और प्रगति की असली ध्वनि सचमुच हिंदी से ही संभव है।


















