नवरात्रि पर विवादित नारे, सोशल चौकीदार ने उठाए गंभीर सवाल, चौकीदार ने मौलवियों से पूछा-यह प्रेम केवल हिंदू त्योहार पर क्यों?

-‘आई लव मोहम्मद’ के विवादित नारे पर जांच और सामाजिक चेतावनी
-नवरात्रि के पवित्र पर्व पर सड़कों पर ‘आई लव मोहम्मद’ के नारे और स्टिकर लगाने की घटना ने बढ़ाई चिंता; सोशल 

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। नवरात्रि के दौरान जहां गरबा और पूजा-उपासना का शांतिपूर्ण आयोजन चल रहा था, वहीं कुछ स्थानों पर सार्वजनिक स्थानों पर विवादित नारे लगने और स्टिकर चिपकाने की घटनाओं ने त्योहार का माहौल तनावपूर्ण कर दिया। सोशल चौकीदार के संस्थापक के.के. शर्मा ने इस प्रकरण को गंभीरता से लिया और मौलवियों, मुफ्तियों, उलेमाओं, हाफिजों और इमामों से सीधे सवाल किए कि यदि पैगंबर के प्रति प्रेम सच्चा है तो वह सार्वजनिक उकसावे के रूप में ही क्यों प्रकट हो रहा है और विशेषकर हिंदू धार्मिक अवसरों पर ही क्यों माना जा रहा है। के.के. शर्मा ने कहा कि धर्म-आधारित प्रेम और आस्था निजी और शांतिपूर्ण ढंग से प्रकट की जानी चाहिए, न कि किसी अन्य समुदाय के धार्मिक अवसरों पर जाकर माहौल भड़काने के लिए। उनका आरोप है कि कुछ गुटों द्वारा सड़कों पर जुलूस निकालकर और वाहनों पर स्टिकर चिपकाकर जानबूझकर तनाव पैदा करने का प्रयास किया गया, जिससे समाज में विभाजन की संभावना बढ़ी। शर्मा ने पूछा, “यह प्यार केवल नवरात्रि जैसे हिंदू पर्वों पर ही क्यों दिखता है? क्या यह देश में दंगा भड़काने की चाल नहीं है? पुलिस ने कहा है कि गिरफ्तारियां ‘आई लव मोहम्मद’ नारा लगाने के कारण नहीं हुईं, बल्कि जिन पर एफआईआर दर्ज हुईं, वे तोडफ़ोड़, मारपीट और सार्वजनिक शांति भंग करने के आरोपों के तहत हैं।

गाडिय़ों को रोककर स्टिकर और बैनर लगाने की घटनाएं दर्ज की गईं और घटनास्थल से कई साक्ष्य मिल चुके हैं। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून के दायरे में रहकर किसी भी प्रकार का धार्मिक प्रदर्शन स्वीकार्य है, पर सार्वजनिक व्यवस्था और अन्य समुदायों की भावनाओं को भड़काने वाला हर काम आपराधिक कृत्य बनता है। के.के. शर्मा ने धार्मिक पधरियों और नेताओं से अपील करते हुए कहा कि वे अपने अनुयायियों को शांत रहने और संवेदनशील मौके पर संयम बरतने की सलाह दें। उन्होंने विशेष रूप से पूछा कि क्या धर्मप्रियता का मतलब सार्वजनिक उकसाना और धमकी देना हो सकता है, जब कुछ लोगों ने सार्वजनिक जगहों पर ‘सर तन से जुदा’ जैसी घृणास्पद धमकियां भी दीं। शर्मा का कहना है कि ऐसे बेबुनियाद और हिंसक इशारों से समाज का सौहार्द प्रभावित होता है और इससे किसी की भी जान तथा समाज की शांति को खतरा होता है।

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने भी मामले की निंदा की है। कई लोगों ने कहा कि त्योहार घरों और मंदिरों में ही मनाए जाने चाहिए और सड़कों पर सार्वजनिक तौर पर भड़काऊ नारे लगाने से बचा जाना चाहिए। हम अपने त्योहार शांतिपूर्ण तरीके से मनाना चाहते हैं; किसी भी तरह की उकसॉवा और तथ्यविहीन प्रदर्शनों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कई व्यापारियों ने भी कोर्ट से प्रशासन की शीघ्र कार्रवाई और सुरक्षा कड़ी करने का आग्रह किया ताकि व्यापार तथा आमजन की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित न हो। पुलिस ने कहा कि मामले की जांच जारी है और जिन लोगों से तोडफ़ोड़ तथा हिंसा के संबंध में साक्ष्य मिले हैं, उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही पुलिस ने समुदायों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाह पर भरोसा न करें और किसी भी संवेदनशील जानकारी के लिए आधिकारिक चैनलों का ही सहारा लें।

के.के. शर्मा ने धार्मिक नेतृत्व से भी सीधा आग्रह करते हुए कहा कि अगर धर्मों का सच्चा सम्मान करना है तो सार्वजनिक स्थानों पर अलग समुदायों के त्योहारों पर जाकर उकसावे भरे प्रदर्शन करना बंद किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर पीछे कोई साजिश है तो उसे बेनकाब किया जाना चाहिए और ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। शर्मा ने अंत में सभी नागरिकों से शांति बनाए रखने और किसी भी प्रकार की उकसाव भरी भाषा या व्यवहार को अस्वीकार करने का आह्वान किया। स्थानीय प्रशासन ने भी स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी समुदाय की भावनाओं को आहत करने वाले कार्यों के लिए कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी और सार्वजनिक सुरक्षा प्राथमिकता रहेगी।

के.के. शर्मा ने कहा कि धार्मिक प्रेम निजी और शांतिपूर्ण रूप से होना चाहिए, न कि किसी अन्य समुदाय के अवसरों पर जाकर माहौल भड़काने के लिए। उन्होंने पूछा कि क्या यह प्रेम केवल नवरात्रि पर ही क्यों उमड़ रहा है और क्या इसके पीछे दंगा भड़काने का इरादा नहीं है।

के.के. शर्मा ने अंत में सभी नागरिकों से शांति बनाए रखने और किसी भी उकसावे भरे व्यवहार को अस्वीकार करने का आह्वान किया। प्रशासन ने भी स्पष्ट किया कि किसी भी समुदाय की भावनाओं को आहत करने वाले कार्यों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन ने धर्मगुरुओं और सामाजिक संगठनों को भी संयम बरतने और समाज को यथासंभव शांत रखने का अनुरोध किया है। यह प्रकरण एक बार फिर यह दिखाता है कि संवेदनशील मौकों पर संवेदनशीलता और संयम का महत्त्व कितना अधिक होता है। सोशल चौकीदार के सवाल समाज में एक बहस का आगाज़ कर रहे हैं कि धार्मिक प्रेम और आस्था का सही तरीका क्या होना चाहिए और किन सीमाओं के भीतर इसे अभिव्यक्त किया जाना चाहिए, ताकि सामूहिक शांति, सौहार्द और देश की सुरक्षा बनी रहे।