अवैध शराब पर आबकारी विभाग की नो-टॉलरेंस नीति, अवैध शराब की भट्टी व 600 किलोग्राम लहन को किया नष्ट

  • देहात में छापेमारी के दौरान अवैध शराब और लहन नष्ट, ग्रामीणों को जागरूक कर कानून का बढ़ाया सम्मान
  • घर, खेत और नदी किनारे छिपाई गई अवैध शराब बरामद, तस्करों को सुधारने का मौका देने के साथ ठोस कार्रवाई की
  • मुखबिर तंत्र और छापेमारी के जरिए गाँव-देहात में अवैध शराब की भट्टियों का पता, टीम लगातार जागरूकता और सख्ती के साथ अभियान

उदय भूमि संवाददाता
लखनऊ। प्रदेश में अवैध शराब पर नकेल कसने के लिए आबकारी विभाग की टीमें पूरी तरह सतर्क हो गई हैं। राजधानी लखनऊ और उसके देहात क्षेत्र में चल रहे विशेष प्रवर्तन अभियान के तहत आबकारी विभाग ने अवैध शराब के निर्माण और तस्करी को पूरी तरह समाप्त करने के लिए मोर्चा संभाल लिया है। अभियान में जिला आबकारी अधिकारी करुणेन्द्र सिंह स्वयं मैदान में उतरकर कार्रवाई की निगरानी कर रहे हैं और अपनी टीम को रणनीति के साथ दिशा दे रहे हैं। आबकारी विभाग की टीमें घर, खेत, आम के बाग, नदी किनारे और झाडिय़ों के बीच छिपाई जा रही अवैध शराब की भट्टियों और जमीन के नीचे छिपाई गई शराब को ढूंढ निकाल रही हैं। विभाग की यह रणनीति इतनी प्रभावशाली है कि शराब तस्करों में हर दिन हड़कंप मचता है। विभाग की टीम ने तस्करों को न केवल पकडऩे बल्कि उन्हें सुधरने का मौका भी दिया है। ऐसे लोग जिन्होंने मौके का फायदा नहीं उठाया और अवैध शराब के धंधे में संलिप्त पाए गए, उन्हें सीधे सलाखों के पीछे भेजा जा रहा है।
जिला आबकारी अधिकारी करुणेन्द्र सिंह ने बताया कि शनिवार को आबकारी निरीक्षक विवेक सिंह और राहुल सिंह की टीम के साथ थाना गोसाईगंज क्षेत्र में ग्राम बलियाखेड़ा और आसपास के संदिग्ध स्थलों व बगीचों में दबिश दी गई। इस छापेमारी के दौरान लगभग 15 लीटर अवैध कच्ची शराब बरामद की गई और 600 किलोग्राम लहन मौके पर नष्ट किया गया। इसके साथ ही आबकारी अधिनियम की विभिन्न धाराओं में एक अभियोग पंजीकृत किया गया।

करुणेन्द्र सिंह ने बताया कि यह कार्रवाई न केवल शराब तस्करों के लिए चेतावनी है, बल्कि प्रदेश में कानून के प्रति जनता का विश्वास भी मजबूत करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शराब के धंधे में लिप्त लोगों को न केवल पकडऩा, बल्कि उन्हें सुधार का अवसर देना भी अभियान का हिस्सा है। इस नीति से कई तस्कर अवैध धंधा छोड़कर सामान्य जीवन की ओर लौट रहे हैं, जबकि जो नहीं मानते, उन्हें सख्त कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है।
आबकारी विभाग की टीमें लगातार नई रणनीतियों के साथ अभियान चला रही हैं। हर दिन अलग-अलग गांव, खेत और बागों में छापेमारी की जा रही है। नदी किनारे, झाडिय़ों और आम के बागों में छिपाई गई शराब की भट्टियों को पकडऩे के लिए टीमों ने मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया है। विभाग स्थानीय लोगों से भी सहयोग ले रहा है और उन्हें अवैध शराब के खिलाफ जागरूक कर रहा है। इस पहल से न केवल अवैध शराब की खेप रोकी जा रही है, बल्कि ग्रामीणों में सतर्कता और कानून का सम्मान भी बढ़ रहा है।

करुणेन्द्र सिंह ने कहा कि उनकी टीम दिन-रात अभियान में लगी हुई है। विभाग की कार्रवाई इतनी प्रभावशाली है कि शराब तस्करों की योजना हर बार विफल हो जाती है। इसके लिए टीम सटीक रणनीति और गहन सर्वेक्षण का इस्तेमाल कर रही है, जिससे अवैध शराब की भट्टियों का पता लगाया जा सके। अवैध शराब के खिलाफ अभियान में करुणेन्द्र सिंह की कार्यशैली और नेतृत्व प्रशंसनीय है। वह न केवल टीम को प्रेरित करते हैं, बल्कि हर छापेमारी में व्यक्तिगत रूप से शामिल रहते हैं। उनकी सक्रियता और सतर्कता के कारण ही अभियान प्रभावी बन पाया है। टीम के सदस्य बताते हैं कि करुणेन्द्र सिंह के नेतृत्व में कार्य करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण होने के साथ-साथ सीखने योग्य अनुभव भी है।

जिला आबकारी अधिकारी ने यह भी बताया कि अभियान का उद्देश्य केवल अवैध शराब को रोकना नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में कानून और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना पैदा करना भी है। शराब के अवैध धंधे से होने वाली सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को कम करने के लिए विभाग सक्रिय है। इस अभियान के चलते ग्रामीणों में जागरूकता बढ़ रही है और लोग आबकारी विभाग की कार्रवाई का समर्थन कर रहे हैं। करुणेन्द्र सिंह की अगुवाई में चल रही टीमें यह सुनिश्चित कर रही हैं कि कोई भी अवैध शराब का निर्माण या तस्करी बिना रोक-टोक के न हो। उनका कहना है कि यह अभियान लंबे समय तक चलेगा और अवैध शराब के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।