हाउस टैक्स पर सियासी व कानूनी रार : नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक के नेतृत्व में दौड़ रही डेवलपमेंट रेल, धन्ना सेठों की कोशिशें बनीं बाधा

नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक के नेतृत्व में गाजियाबाद नगर निगम द्वारा शहर को स्वच्छ, सुंदर, सुव्यवस्थित और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाये गये हैं। एक हजार करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि नगर निगम विकास को केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रख रहा, बल्कि उसे जमीन पर उतार रहा है। लेकिन इस विकास यात्रा में बाधाएं खड़ी करने की कोशिशें भी हो रही हैं। हाउस टैक्स की नई दर से जुड़ा मामला इस समय माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद में विचाराधीन है। सुनवाई के दौरान याचिकाकतार्ओं के अधिवक्ताओं की अनुपस्थिति के कारण निर्णय में देरी होना दुर्भाग्यपूर्ण है, क्योंकि इससे शहर के विकास की रफ्तार भी अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हो रही है। 27 जनवरी को प्रस्तावित सुनवाई और उसके बाद आने वाला निर्णय ही आगे की दिशा तय करेगा। विकास केवल सरकार या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि नागरिक सहभागिता से ही संभव है। अफवाहों और भ्रम के बजाय शहरवासियों को तथ्य और न्यायालय के निर्णय पर भरोसा रखना चाहिए। 

विजय मिश्रा (उदय भूमि संवाददाता)
गाजियाबाद। शहर में विकास कार्य तेजी से हो रहे हैं। नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक के नेतृत्व में गाजियाबाद नगर निगम की डेवलपमेंट रेल तेजी से आगे बढ़ रही है, जिसका उद्देश्य शहर को सुव्यवस्थित, स्वच्छ और आत्मनिर्भर बनाना है। नगर निगम के इस डेवलपमेंट रेल को शहर के कुछ प्रभावशाली धन्ना सेठों द्वारा पटरी से उतारने की कोशिशें की जा रही है। नगर निगम के टैक्स वसूली अभियान में अड़ंगा डालकर विकास की रफ्तार को रोक रहे हैं। इसके उलट, आम शहरवासी जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभाते हुए ईमानदारी से टैक्स जमा कर रहे हैं और गाजियाबाद के विकास को मजबूती से आगे बढ़ाने में सहयोग दे रहे हैं। गौर करने वाली बात यह है कि आम कर दाताओं को बढ़ी हुई दर पर टैक्स जमा करने से कोई गुरेज नहीं है। वह शहर में विकास कार्य चाहते हैं। लेकिन कुछ लोगों द्वारा भ्रम फैलाया जा रहा है।

विकास कार्यों को गति देने के लिए फंड की उपलब्धता जरूरी है। सरकार की योजना है कि सभी नगर निगम आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनें। नगर निगम को आमदनी के स्रोत बढ़ाने होंगे। जिस नगर निगम की आमदनी घटेगी या आमदनी में आपेक्षित बढ़ोत्तरी नहीं होगी उन्हें शासन से कोई फंड नहीं मिलेगा। नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक के सशक्त नेतृत्व में डेवलपमेंट रेल पूरे दमखम के साथ आगे बढ़ रही है। सड़कों, नालों, जल निकासी, प्रकाश व्यवस्था और नागरिक सुविधाओं से जुड़े कई बड़े प्रोजेक्ट पर एक साथ काम हो रहा है, जिनकी कुल लागत एक हजार करोड़ रुपये से अधिक है। जिससे आम शहरवासियों में गाजियाबाद नगर निगम की कार्यशैली को लेकर संतोष और भरोसा देखने को मिल रहा है। लेकिन इस विकास यात्रा के बीच हाउस टैक्स को लेकर चल रहा विवाद अस्थायी बाधा बनता दिख रहा है। यदि टैक्स बढ़ोत्तरी पर चल रहा राजनैतिक और कानूनी रार जल्द खत्म नहीं हुआ तो आगे विकास कार्य प्रभावित हो सकता है।

गाजियाबाद नगर निगम और शहर के नागरिक हाउस टैक्स से जुड़े निर्णय का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। नगर निगम को आत्मनिर्भर बनाने और बड़े विकास प्रोजेक्ट को गति देने के लिए टैक्स की नई दरें लागू होना आवश्यक माना जा रहा है। नई दरों के लागू होने से निगम की आय बढ़ेगी, जिससे शासन पर निर्भरता कम होगी और शहर के लिए बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पूरे किए जा सकेंगे। हाउस टैक्स बढ़ोत्तरी से जुड़ा यह मामला इस समय माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद में विचाराधीन है। याचिका संख्या 1427/2025 पर अभी अंतिम निर्णय आना बाकी है। न्यायालय में निर्धारित तिथियों पर सुनवाई हो रही है, लेकिन याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं की अनुपस्थिति के कारण बार-बार इसकी सुनवाई टल रही है। जानकारी के अनुसार 19 नवंबर 2025, 26 नवंबर 2025 और 16 जनवरी 2026 को भी वादी पक्ष की पुकार लगने पर अधिवक्ता अनुपस्थित पाए गए। इससे हाउस टैक्स प्रकरण के अंतिम निर्णय में अनावश्यक देरी हो रही है।

ऐसे में यह स्पष्ट किया जा रहा है कि अंतिम फैसला माननीय उच्च न्यायालय द्वारा ही लिया जाएगा और उससे पहले किसी प्रकार का बदलाव करना न तो न्यायसंगत होगा और न ही संवैधानिक दृष्टि से उचित। विदित हो कि टैक्स बढ़ोत्तरी का मामला कोर्ट में विचाराधीन होने के बावजूद कुछ लोगों द्वारा शहरवासियों को गुमराह करने और निराधार, तर्कहीन बातों को फैलाने के आरोप लग रहे हैं। इससे आम जनता में भ्रम की स्थिति बन रही है। नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि शहरवासियों की समस्याओं का समाधान उसकी प्राथमिकता है, लेकिन कोर्ट के निर्णय से पहले गलत जानकारी फैलाना शहरहित में नहीं है। गाजियाबाद नगर निगम ने शहरवासियों से अपील की है कि वे माननीय उच्च न्यायालय के निर्णय का इंतजार करें और किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें।

सुनील राय
मुख्य कर निर्धारण अधिकारी एवं राजस्व प्रभारी
गाजियाबाद नगर निगम

7 महीने से हाउस टैक्स संबंधित प्रकरण माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद के समक्ष विचाराधीन है। जो विषय कोर्ट के समक्ष विचाराधीन है उस पर किसी प्रकार की कार्यवाही विभाग द्वारा नहीं की जा सकती है। ऐसा करना ना तो न्याय संगत है बल्कि भारत संविधान की अवहेलना करना जैसा ही है। 27 जनवरी को हाउस टैक्स प्रकरण पर सुनवाई होगी इसके उपरांत माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिए जाने वाले आदेश के क्रम में ही आगामी कार्यवाही होगी उससे पहले किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया जाना है।
सुनील राय
मुख्य कर निर्धारण अधिकारी एवं राजस्व प्रभारी
गाजियाबाद नगर निगम