-ट्रंप के बयान से बदला माहौल, गिफ्ट निफ्टी की जोरदार छलांग ने जगाई उम्मीद
एनसीआर। भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को भारी उतार-चढ़ाव के बीच कारोबार हुआ और अंतत: प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी गिरावट के साथ बंद हुए। दिनभर बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना रहा, जिससे निवेशकों में चिंता और असमंजस की स्थिति देखने को मिली। वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव, विशेषकर अमेरिका और ईरान के बीच टकराव, का सीधा असर भारतीय बाजारों पर पड़ा और बिकवाली हावी रही। हालांकि, बाजार बंद होने के बाद आई एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय खबर ने निवेशकों को राहत दी है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर संभावित हमलों को रोकने और युद्धविराम के संकेत दिए जाने के बाद वैश्विक बाजारों में सकारात्मक माहौल बन गया है। इस खबर का असर एशियाई संकेतकों पर भी देखने को मिला और गिफ्ट निफ्टी में करीब 4 प्रतिशत की तेज उछाल दर्ज की गई।
वित्तीय सलाहकार रविंद्र तिवारी का मानना है कि गिफ्ट निफ्टी में यह मजबूती इस बात का संकेत है कि अगले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत सकारात्मक हो सकती है। यदि वैश्विक माहौल स्थिर बना रहता है, तो बाजार में रिकवरी देखने को मिल सकती है और प्रमुख सूचकांक मजबूती के साथ खुल सकते हैं। सोमवार को दिनभर बाजार में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी रही। शुरुआत में हल्की मजबूती देखने को मिली, लेकिन जैसे-जैसे वैश्विक तनाव की खबरें सामने आईं, निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया और बिकवाली बढऩे लगी।
इसका असर यह हुआ कि सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही गिरावट के साथ बंद हुए। खासकर ऊर्जा, बैंकिंग और धातु क्षेत्र के शेयरों में दबाव देखने को मिला। वहीं, अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम ने बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण निवेशकों में जोखिम की भावना बढ़ गई थी, जिससे पूंजी बाजारों में अस्थिरता आई। लेकिन देर शाम आई नरमी की खबरों ने माहौल को बदल दिया और वैश्विक निवेशकों का भरोसा कुछ हद तक लौटता नजर आया।
वित्तीय सलाहकार का कहना है कि वर्तमान गिरावट को लेकर निवेशकों को घबराने की आवश्यकता नहीं है। उनके अनुसार यह गिरावट अस्थायी है और आने वाले समय में बाजार में सुधार की पूरी संभावना है। उन्होंने बताया कि भारतीय अर्थव्यवस्था के मूलभूत आधार मजबूत हैं, जो दीर्घकाल में बाजार को सहारा देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले 5 से 6 महीनों से लेकर एक वर्ष के भीतर बाजार में अच्छा सुधार देखने को मिल सकता है। हालांकि, अल्पकाल में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, क्योंकि बाजार की दिशा कई बाहरी कारकों पर निर्भर करती है, जिनमें विदेशी निवेशकों का रुख, कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक राजनीतिक परिस्थितियां शामिल हैं।
दीर्घकालीन निवेशकों के लिए यह समय अवसर के रूप में देखा जा सकता है। गिरावट के दौरान अच्छे शेयरों में निवेश भविष्य में बेहतर रिटर्न दे सकता है। हालांकि, निवेशकों को सतर्क रहकर और सोच-समझकर निवेश करना चाहिए। कुल मिलाकर, मौजूदा परिस्थितियों में बाजार में अनिश्चितता जरूर बनी हुई है, लेकिन वैश्विक स्तर पर सकारात्मक संकेत मिलने से निवेशकों को राहत मिली है। अब सभी की निगाहें अगले कारोबारी दिन पर टिकी हैं, जहां बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक संकेतों और निवेशकों के भरोसे पर निर्भर करेगी।

















