-उम्मेद की गिरफ्तारी के लिए एसएसपी निवास पर चौकन्ना रहीं पुलिस
-मुख्य आरोपी प्रवेश गुर्जर को मिली जमानत, रिमांड पर लेना चाहती थी पुलिस
गाजियाबाद। बुलंदशहर के अनूपशहर के रहने वाले 73 वर्षीय बुजुर्ग अब्दुल समद की पिटाई करने और दाढ़ी काटने के मामले में दंगा भड़काने की साजिश रचने के आरोप में नामजद हुए सपा नेता उम्मेद पहलवान इदरीशी को पुलिस शुक्रवार देर रात तक गिरफ्तार नहीं कर पाई। उम्मेद ने एसएसपी निवास पर ही अपनी गिरफ्तारी देने के लिए फेसबुक पर लाइव किया था। वहीं, शुक्रवार को सुबह से ही राजनगर में एसएसपी अमित पाठक के निवास पर कविनगर थाना प्रभारी अजय कुमार सिंह समेत भारी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात रहते हुए चौकन्ना रहे। बुजुर्ग से मारपीट का वीडियो वारयल करने वालों की लिस्ट अब लंबी होती जा रही है। साइबर सेल टीम की जांच में 10 बड़े नाम ओर सामने आए है। उधर,एसपी ग्रामीण डॉ. ईरज राजा का कहना है कि विवेचना अधिकारी इंस्पेक्टर नरेश सिंह की ओर से ट्विटर इंडिया के हेड मनीष माहेश्वरी को जांच में सहयोग करने के लिए हाजिर होने को लेकर मेल भेज दिया गया है। मनीष माहेश्वरी को 7 दिन में मेल के माध्यम से कई ओर जानकारी मांगी गई हैं। एसपी ग्रामीण ने बताया कि उम्मीद है कि वह जांच में सहयोग करेंगे। बुजुर्ग के साथ मारपीट और अभद्रता के मामले में 9 लोगों की गिरफ्तारी होने के बाद जेल भेजा चुका हैं। वहीं, बुजुर्ग की पिटाई के मामले में मुख्य आरोपी प्रवेश गुर्जर को शुक्रवार को कोर्ट ने जमानत दे दी। पुलिस प्रवेश गुर्जर का रिमांड चाहती थी लेकिन नहीं मिल सका। इससे पहले कल गिरफ्तार किए गए 4 आरोपियों को भी जमानत दे दी गई। इस मामले अभी तक गिरफ्तार हुये सभी 9 लोगों को जमानत मिल चुकी हैं। एसपी ग्रामीण डॉ. ईरज राजा ने बताया कि मुख्य आरोपी प्रवेश गुर्जर को पुलिस कस्टडी रिमांड पर लिया जाएगा। उससे अभी काफी पूछताछ की जानी बाकी हैं। आरोपी की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। इसमें वह विधायक लिखी गाड़ी के पास खड़ा है और कमर में पिस्टल रखा है। रिमांड के दौरान पुलिस आरोपी से यह पिस्टल भी बरामद करने का प्रयास करेगी। बुजुर्ग अब्दुल समद के साथ लोनी के बेहटा हाजीपुर में कमरे में बंद कर मारपीट करने और दाढ़ी काटने के मामले को सांप्रदायिक रंग देने वालों की फेहरिस्त लंबी होती जा रही हैं। साइबर सेल टीम इन सभी नामों की भूमिका की जांच के बाद इन्हें मुकदमे की विवेचना में शामिल करेगी। एसपी ग्रामीण डॉ. ईरज राजा ने बताया कि वीडियो वायरल करने वालों की लंबी लिस्ट है,लेकिन अभी इनमें से किसी के नाम मुकदमे में शामिल नहीं किए गए हैं, लेकिन पुलिस ऐसे सभी लोगों की भूमिका की पड़ताल जरूर कर रही है। अब जो नए नाम सामने आए हैं, वह भूमिका के मुताबिक इन्हीं मुकदमों की विवेचना के दौरान बढ़ा लिए जाएंगे। सपा नेता उम्मेद पहलवान को अच्छी तरह पता था कि सभी आरोपी पीडि़त की जानकारी हैं और यह मारपीट विवाद के चलते हुई है। पीडि़त बुजुर्ग जब उनसे मदद मांगने गए तो उम्मेद ने इसे भुनाने का प्रयास किया। अपने प्रभाव में लेकर अपनी बात उनके मुंह से कहलवाई। हालांकि,इस वीडियो के साथ छेड़छाड़ कर आवाज गायब कर दी गई थी। इसका उद्देश्य धार्मिक नारे और दाढ़ी काटने के मुद्दे को लेकर माहौल को गर्म करना था। ट्विटर पर भड़काऊ वीडियो 14 और 15 जून को ट्रेंड हुई थी। इस मामले को कुछ लोगों ने सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की। पुलिस ने साफ कर दिया कि दाढ़ी काटे जाने की घटना तो हुई है,लेकिन यह सांप्रदायिक नहीं है। घटना पांच जून की थी। इसके बारे में वीडियो साजिश के तहत 9 दिन बाद ट्वीट किया गया। बगैर सत्यता की जांच किए वीडियो शेयर किया गया। इसी पर लोनी बॉर्डर थाने में पुलिस ने जुबैर अहमद, राना अय्यूब, सलमान निजामी, मशकूर उस्मानी, डॉ. समा मोहम्मद, सबा नकवी, ट्विटर आईएनसी व ट्विटर कम्यूनिकेशन इंडिया प्राइवेट और सपा नेता उम्मेद पहलवान के खिलाफ धार्मिक उन्माद फैलाने का केस दर्ज किया हैं। आरोप है कि ट्विटर ने भड़काऊ वीडियो रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाया। पुलिस को नामजद आरोपियों पर कार्रवाई करनी है, लेकिन उसके पास आरोपियों के बारे में कोई जानकारी नहीं है। आरोपियों की डिटेल लेने के लिए ही ट्विटर को नोटिस भेजा गया है। पुलिस की साइबर सेल द्वारा ट्विटर के अमेरिका स्थित हेड क्वॉर्टर को नोटिस भेजा हैं। इसमें 12 बिंदुओं पर जवाब मांगा गया है। नामजद आरोपियों की डिटेल के साथ-साथ उनके आपत्तिजनक ट्वीट को री-ट्वीट करने वालों की सूची भी मांगी है। इसके अलावा यह डाटा भी मांगा गया है कि ट्विटर पर आपत्तिजनक वीडियो कितनी बार शेयर की है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक आपत्तिजनक वीडियो वाले ट्वीट को री-ट्वीट करने वाले लोगों को भी केस में आरोपी बनाया जाएगा। फेसबुक भी वीडियो वायरल होने के मामले में लक्ष्मी गार्डन लोनी निवासी उम्मेद पहलवान इदरीसी के खिलाफ भी पुलिस फेसबुक के आधार पर केस दर्ज किया है। डीआईजी/एसएसपी अमित पाठक का कहना है कि पूर्व में ट्विटर को कानूनी संरक्षण का अधिकार प्राप्त था। कोई भी भड़काऊ या आपत्तिजनक ट्वीट हटाने के लिए ट्विटर को नोटिस भेजा जाता था। लेकिन, कानूनी संरक्षण हटने पर हर ट्वीट के लिए अब ट्विटर खुद जिम्मेदार हंै। अगर ट्विटर के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद कोई आपत्तिजनक ट्वीट किया गया तो ट्विटर के खिलाफ फिर से कार्रवाई की जाएगी।
















