-टेक्नोलॉजी के दौर में ऑनलाइन फ्रॉड का मकडज़ाल
-गिरोह सरगना भाई-बहन समेत 7 शातिर ठग गिरफ्तार
-6 साल में 500 लोगों से करोड़ो की ठगी
गाजियाबाद। टेक्नोलॉजी के इस दौर में ऑनलाइन फ्रॉड के जाल में आए दिन लोग फंस रहे हैं। हर रोज साइबर सेल में ऐसे धोखाधड़ी के मामले दर्ज होते हैं। बड़ी संख्या में ऑनलाइन ठगी के केस सामने आने लगे हैं। बीमा पॉलिसी के नाम पर लोगों के साथ करोड़ो रूपए की ठगी करने वाले गिरोह के सरगना एवं महिला समेत 7 शातिर ठगों को साइबर सैल और कविनगर पुलिस की संयुक्त टीम ने गिरफ्तार कर फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया है। पकड़े गये आरोपी विभिन्न बैंक और एजेंटों से इंश्योरेंस पॉलिसी होल्डर का डाटा खरीद लेते थे। फिर पॉलिसी होल्डर को फोन कर कहते थे कि उनकी पॉलिसी का 40 से 50 फीसदी प्रीमियम एजेंट के खाते में चला जाता है। अगर वह दूसरी पॉलिसी खरीदेंगे तो वह उन्हें ज्यादा से ज्यादा लाभ दिलाएंगे। उन्हें नई पॉलिसी की तीन प्रीमियम जमा कराने होंगे। आरोपी पीडि़त से आरटीजीएस या फिर एनईएफटी के जरिये खातों में प्रीमियम का पैसा फर्जी खाते में जमा करा लेते थे। आरोपी पीडि़त को इंश्योरेंस पॉलिसी के फर्जी कागजात मेल कर देते थे। इसके बाद गायब हो जाते थे। पकड़े गये आरोपी पूर्व में 80 लाख की ठगी में हैदराबाद से जेल जा चुके है। जेल से छूटने के बाद फिर से गिरोह बनाकर ठगी का कारोबार कर रहे थे।
शुक्रवार को कविनगर थाने में घटना का खुलासा करते हुए एसपी सिटी निपुण अग्रवाल ने सीओ प्रथम अभय कुमार मिश्र की मौजूदगी में बताया कि देर रात मुखबिर की सूचना पर चेकिंग के दौरान साइबर सैल प्रभारी सुमित कुमार एवं कविनगर थाना प्रभारी अजय पास सिंह की टीम ने आरडी फ्लाईओवर के पास से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। सख्ती से पूछताछ के बाद पुलिस ने शुक्रवार सुबह कौशांबी क्षेत्र में संचालित फर्जी कॉल सेंटर पर छापेमारी की कार्रवाई कर प्रदीप प्रसाद (12 वी पास) पुत्र राजेन्द्र प्रसाद निवासी सरिता विहार दिल्ली, राहुल उर्फ मोनू (12 वी पास) पुत्र किशनपाल निवासी इंदिरापुरम, सुमित मलिक (बीए पास) पुत्र गुलशन मलिक निवासी नोर्थ विनोद नगर मंडावली दिल्ली, रूपेश कुमार (12 वी पास) पुत्र जोगेन्द्र प्रसाद निवासी हरिओम गली सरीता विहार दिल्ली, अक्षय (12 वी पास) पुत्र भूपेन्द्र निवासी शिव विहार विकासनगर दिल्ली, ज्योति मलिक (बीकॉम पास) पुत्री गुलशन मलिक निवासी नोर्थ विनोद नगर मंडावली दिल्ली, पिंकी रावत (एमए पास) पुत्री मोहन सिंह रावत निवासी न्याय खण्ड प्रथम इंदिरापुरम को गिरफ्तार किया गया।
जिनकी निशानदेही पर 11 मोबाइल, 1 चैक बुक, चार चैक फोटो कॉपी, 41 डाटा पेपर शीट, लैपटॉप, विभिन्न बैंको 6 एटीएम कार्ड, दो आधार कार्ड, सीआईडी कार्ड, बुलेट बाइक बरामद किया गया। फर्जी कॉल सेंटर का संचालक सुमित मलिक है और ज्योति मलिक उसकी बहन है। उन्होने बताया कि आरोपियों के पास से मिले डाटा से आरोपी फोन कर पॉलिसी मैच्योरिटी के नाम पर कॉल करता था और जीतू साहनी गरीब एवं कम पढे लिखे लोगों का खाता खुलवाने के नाम पर दस्तावेज तैयार करता था। जिसके बाद उनके नाम से बैंक में खाता खुलवाता था और खाते का एटीएम कार्ड अपने पास रखता था। ठगी के रूपयों को खाते में डलवाने के बाद उन्हें एटीएम कार्ड से निकाल लेता था। एसपी सिटी ने बताया प्रदीप व सुमित 2017 में हैदराबाद पुलिस द्वारा 80 लाख रूपए की ठगी के मामले में पूर्व में जेल जा चुके है। 2015 से आरोपी 500 लोगों के साथ करोड़ो रूपए की ठगी की वारदात को अंजाम दे चुके है। उन्होने अपील करते हुए कहा कि ठगी से बचने के लिए किसी भी अनजान नंबर का फोन न उठाए और कई बार लोग आकर्षक ऑफर जैसे-लाखों की लॉटरी, फ्री कार आदि के लालच में आकर फोन पर आए मेसेज का रिप्लाई करते हैं या कॉल करते हैं। कभी उनके पास ऐसे ऑफर के लिए कॉल आए तो झट से उस पर विश्वास कर लेते हैं। अपने बैंक खाता, एटीएम कार्ड नंबर औैर आधार नंबर जल्दी से किसी को शेयर न करें।
झांसे में लेने के लिए युवतियों से करवाते थे फोन
सीओ प्रथम अभय कुमार मिश्र ने बताया गिरोह के संचालक इतने शातिर है कि आरोपी लोगों को झांसे में लेने के लिए संचालक की बहन ज्योति मलिक और कॉल एंंजेट पिंकी रावत से फोन करवाते थे। जिनकी मीठी बातों में आकर लोग ठगी का शिकार हो जाते थे। गिरोह के अन्य सदस्य भी फोन कर लोगों को पॉलसी के नाम पर लालच देते थे। उन्होने बताया अक्षय के मोबाइल से मिले डाटा बेस के आधार पर जांच की जा रही है कि उसके पास डाटा कहां से आया और किसने दिया है। क्योंकि ठगों को आपका नंबर जरूर किसी न किसी कंपनी से ही मिलता है, जो डेटा बेचती हैं। ऐसी कई कंपनियां हैं, जो कुछ पैसों के बदले लोगों की पर्सनल जानकारी इन ठगों के हाथों बेच देती हैं। जिसकी जांच की जा रही है।
















