-बोर्ड के समक्ष ग्रेनो प्राधिकरण के बिल्डर विभाग ने प्रस्तुत की ताजा रिपोर्ट
-फरवरी से अब तक 8106 फ्लैटों की हुई रजिस्ट्री, खरीदारों को मिला आशियाना
-शेष 8000 फ्लैटों की रजिस्ट्री मार्च 2025 तक कराने का लक्ष्य
ग्रेटर नोएडा। अमिताभ कांत समिति के सिफारिशों के आधार पर रियल एस्टेट के लिगेसी प्रोजेक्ट्स की अड़चनों को हल करने के लिए लाई गई पॉलिसी/पैकेज का अब तक 73 बिल्डर परियोजनाओं को लाभ मिला है। उनको पूरा कर खरीदारों को उनका आशियाना देने का रास्ता साफ हुआ है। इन 73 परियोजनाओं में शामिल लगभग 62912 फ्लैटों में से अब तक 30477 फ्लैटों की रजिस्ट्री हो चुकी है।
दरअसल, ग्रेटर नोएडा के कुल 98 प्रोजेक्ट्स हैं जो कि अमिताभ कांत समिति की सिफारिशों पर तैयार पॉलिसी के दायरे में आते हैं। इनमें से 73 परियोजनाओं के लिए 25 फीसदी धनराशि (पूर्ण व आंषिक मिलाकर) जमा कराई गई, जिससे प्राधिकरण को लगभग 547 करोड़ की बकाया धनराशि प्राप्त हुई है और एक वर्ष में लगभग 1300 करोड़ रुपये की धनराशि प्राप्त होने की संभावना है।
इन परियोजनाओं में 62912 फ्लैट हैं, जिनमें से 38661 के लिए कार्यपूर्ति प्रमाणपत्र जारी किया गया है। इसमें से 30477 फ्लैटों की रजिस्ट्री अब तक हो चुकी है। फरवरी से अब तक 8100 से अधिक फ्लैटों की रजिस्ट्री हुई है। शेष यूनिट्स के लिए कार्यपूर्ति प्रमाणपत्र जारी किया जाना है। मार्च 2025 तक इनकी रजिस्ट्री कराने का लक्ष्य है। इसके साथ ही जिन 7 बिल्डरों ने 60 दिन के बाद 25 प्रतिशत धनराशि जमा कराई है, उनको भी बोर्ड ने अनुमति दे दी है।
-वर्षों से इंतजार कर रहे 845 फ्लैट खरीदारों को भी मिल सकेगा मालिकाना हक
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण बोर्ड ने सीनियर सिटीजन सोसाइटी में घर खरीदने वाले मूल आवंटी के अलावा सबसीक्वेंट मेंबर्स को भी बड़ी राहत दे दी है। अब ऐसे खरीदारों के नाम भी फ्लैट की रजिस्ट्री हो सकेगी। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण बोर्ड ने इस आशय के प्रस्ताव पर अपनी सहमति दे दी है। इस सोसाइटी में कुल 845 फ्लैट हैं, जिनमें से 190 फ्लैटों की रजिस्ट्री हो चुकी है। प्राधिकरण की तरफ से सोसाइटी परिसर में ही शिविर लगाकर रजिस्ट्री की जा रही है। बता दें कि सीनियर सिटीजन सोसाइटी के नाम ग्रेटर नोएडा के पी-4, बिल्डर्स एरिया में 1997 में भूखंड दिया गया। विवादों के चलते 27 वर्षों तक इसकी कार्यपूर्ति न हो पाने के कारण इसके सदस्यों के पक्ष में लीज डीड नहीं हो पाई। इस प्रकरण मुख्यमंत्री के संज्ञान में आने के बाद और प्राधिकरण के चेयरमैन मनोज कुमार सिंह व सीईओ एनजी रवि कुमार के प्रयास से विगत मार्च 2024 से इसकी रजिस्ट्री प्रारंभ हो सकी।

















