खोखा चलाने वाली महिला के साथ मारपीट के मामले में पार्षद सुधीर कुमार को जेल भेजे जाने के बाद से शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। पार्षदों में पुलिस की कार्रवाई को लेकर गुस्सा है। लेकिन अब इस गुस्से का शिकार अन्य सरकारी विभाग भी बन रहे हैं। शुक्रवार को पार्षदों ने जीडीए कार्यालय पर हंगामा किया। पार्षद ने आरोप लगाया कि जब वह वीसी से मिलने उनके कार्यालय में पहुंची और अपना परिचय दिया तो वह भड़क गये। उधर, जीडीए वीसी ने इस आरोप को गलत और मनगढ़ंत बताया। जीडीए वीसी अतुल वत्स को सरल, सहज और मृदुल आचरण वाला अधिकारी माना जाता है। वह बड़े ही शालीनता से लोगों से मिलते हैं, उनकी बातों को सुनते हैं और ज्यादातर लोग वीसी से मिलकर संतुष्ट होकर लौटते हैं। अतुल वत्स को जीडीए वीसी का चार्ज संभाले अभी दो महीने भी नहीं हुए हैं लेकिन उनके कामकाज की चर्चा पूरे शहर में हो रही है। जीडीए की कार्यशैली में भी काफी बदलाव देखने को मिल रहा है। ऐसे में जीडीए में अनावश्यक और बेवजह की राजनीति करने से कामकाज भी प्रभावित होगा। शहर के ज्यादातर पार्षद सत्ताधारी दल बीजेपी से जुड़े हैं। ऐसे में पार्षदों को भी समझना चाहिये कि सरकारी विभागों में इस तरह के बर्ताव से सरकार की छवि को भी नुकसान पहुंचता है।
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। मोहन नगर में खोखा चलाने वाली महिला के साथ मारपीट के मामले में पार्षद सुधीर कुमार को जेल भेजे जाने के बाद से शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। पार्षदों में पुलिस की कार्रवाई को लेकर गुस्सा है। लेकिन अब इस गुस्से का शिकार अन्य सरकारी विभाग भी बन रहे हैं। शुक्रवार को पार्षदों ने जीडीए कार्यालय पर हंगामा किया। पार्षदों ने आरोप लगाया कि जीडीए वीसी उनकी बात नहीं सुन रहे हैं। पार्षदों ने शोर-शराबा करते हुए काफी देर तक जीडीए में हंगामा किया। जीडीए वीसी अतुल वत्स ने पार्षदों को समझाया और कहा कि वह अपनी बातों को सम्मानजनक ढ़ंग से रखें। उन्होंने कहा कि जीडीए वीसी रूप के रूप में शहरवासियों की शिकायतों को सुनना और शिकायतों का निस्तारण कराना उनकी प्राथमिकता है। लेकिन किसी भी व्यक्ति के गलत व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जीडीए वीसी ने पार्षदों के उत्तेजक रवैये की शिकायत मेयर सुनीता दयाल से भी की। मेयर ने कहा कि वह इस बारे में पार्षदों से बात करेंगी।

विदित हो कि मोहन नगर में रविवार की रात दो बजे खोखा चलाने वाली महिला उसके पति व बेटों से मारपीट के मामले में भाजपा पार्षद सुधीर कुमार को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। भाजपा पार्षद की गिरफ्तारी के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन चल रहा है। बृहस्पतिवार को पार्षदों के साथ पुलिस की नोक-झोक भी हुई थी और पार्षदों ने हापुड़ रोड पर जाम भी लगाया था। शुक्रवार को पार्षद नवयुग मार्केट स्थित नगर निगम मुख्यालय में एकत्रित हुए थे। इसके बाद इंदिरापुरम के वार्ड-99 वैभव खंड से पार्षद प्रीति जैन पति अभिनव जैन और अपने दर्जनभर से अधिक समर्थकों के साथ इंदिरापुरम के तिकोना पार्क की समस्या को लेकर जीडीए कार्यालय पहुंची। पार्षद ने आरोप लगाया कि जब वह वीसी से मिलने उनके कार्यालय में पहुंची और अपना परिचय दिया तो वह भड़क गये। उधर, जीडीए वीसी ने इस आरोप को गलत और मनगढ़ंत बताया। जीडीए कार्यालय में मौजूद लोगों ने बताया कि पार्षद जीडीए वीसी के कक्ष में पहुंच कर ऊंची आवाज में बोलने लगी। इस पर वीसी ने उन्हें सम्मानजनक ढ़ंग से अपनी बात रखने को कहा। फिर भी पार्षद जोर-जोर से बोलती रही। जीडीए वीसी ने पार्षद से कहा कि यह नगर निगम की बैठक नहीं है यहां पर आप शांति से भी अपनी बात रख सकती हैं। आपकी जो भी शिकायतें हैं उसका नियमानुसार निपटारा कराया जाएगा। इस बात से नाराज होकर पार्षद प्रीति जैन उनके पति अभिनव जैन और समर्थकों के साथ फिर से नगर निगम मुख्यालय पहुंची। उस समय नगर निगम कार्यकारिणी कक्ष में पार्षदों की बैठक चल रही थी। कक्ष में मौजूद पार्षदों के समक्ष प्रीति जैन ने बताया कि वह अपने वार्ड में पार्क की समस्या को लेकर जीडीए वीसी से मिलने गई थी। लेकिन जब उन्होंने पार्षद के रूप में वीसी को अपना परिचय दिया तो वह भड़क उठे। प्रीति जैन की बात सुनकर नगर निगम में मौजूद पार्षद शीलत देओल, पार्षद अमित त्यागी, मनोज त्यागी, पूर्व पार्षद वीरेंद्र त्यागी, मनोज गोयल और जीडीए बोर्ड सदस्य पवन गोयल सहित कई अन्य पार्षद जीडीए पहुंच गये। जीडीए वीसी अतुल वत्स ने फिर सभी पार्षदों को बातचीत के लिए अपने कार्यालय में बुलाया। थोड़ी देर की बातचीत के बाद पार्षदों का गुस्सा शांत हुआ। जीडीए वीसी ने शांति से सभी की बात सुनी और कहा कि पार्षद जनप्रतिनिधि होते हैं। ऐसे में उनसे सम्मानजक व्यवहार की उम्मीद की जाती है। वीसी ने कहा कि शहर के विकास एवं समस्याओं से संबंधित कोई भी व्यक्ति उनसे मिलने आता है तो वह सभी से मिलते हैं और समस्याओं का निराकरण कराते हैं।
उधर, इस प्रकरण में यह बात भी सामने आई है कि जिस पार्क को लेकर पार्षद जीडीए कार्यालय गये थे। उस तिकोना पार्क में नगर निगम द्वारा लगभग 30 लाख रुपए की लागत से विकास कार्य करवाये जा रहे हैं। पार्षद जीडीए से भी पार्क में कुछ और काम करवाना चाहती हैं। बहरहाल पार्षदों का जीडीए प्रकरण तो शांत हो गया है। लेकिन इस हंगामे को लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं। शहर के ज्यादातर पार्षद सत्ताधारी दल बीजेपी से जुड़े हैं। ऐसे में पार्षदों को भी समझना चाहिये कि सरकारी विभागों में इस तरह के बर्ताव से सरकार की छवि को भी नुकसान पहुंचता है। जीडीए वीसी अतुल वत्स को सरल, सहज और मृदुल आचरण वाला अधिकारी माना जाता है। वह बड़े ही शालीनता से लोगों से मिलते हैं, उनकी बातों को सुनते हैं और ज्यादातर लोग वीसी से मिलकर संतुष्ट होकर लौटते हैं। अतुल वत्स को जीडीए वीसी का चार्ज संभाले अभी दो महीने भी नहीं हुए हैं लेकिन उनके कामकाज की चर्चा पूरे शहर में हो रही है। जीडीए की कार्यशैली में भी काफी बदलाव देखने को मिल रहा है। ऐसे में जीडीए में अनावश्यक और बेवजह की राजनीति करने से कामकाज भी प्रभावित होगा।