-दिवंगत तीर्थयात्रियों और स्थानीय आत्माओं की शांति के लिए स्वर्गद्वारी से निकली जलयात्रा
-हनुमान ध्वजा स्थापित, देश-विदेश से श्रद्धालुओं से की गई आत्मिक सहभागिता की अपील
उदय भूमि संवाददाता
रुद्रप्रयाग। वर्ष 2013 की विनाशकारी आपदा में काल के गाल में समा गए हजारों तीर्थयात्रियों और स्थानीय नागरिकों की आत्मा की शांति, मोक्ष और स्मृति को समर्पित एक दिव्य आयोजन का शुभारंभ शुक्रवार को पवित्र केदारधाम में हुआ। 1 अगस्त तक चलने वाले इस सात दिवसीय श्रीमद्भागवत साप्ताहिक ज्ञान यज्ञ का आरंभ भावविभोर वातावरण और वैदिक अनुष्ठानों के मध्य हुआ। इस भव्य आयोजन की शुरुआत सरस्वती नदी के उद्गम स्थल ‘स्वर्गद्वारीÓ से निकली पवित्र जलयात्रा के साथ हुई। तत्पश्चात विधिवत पंच पूजा और हनुमान ध्वजा की स्थापना की गई, जिसने पूरे धाम को आध्यात्मिक ऊर्जा और श्रद्धा की भावना से ओत-प्रोत कर दिया। इस यज्ञ का आयोजन श्री केदार सभा और बद्री-केदार मंदिर समिति के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है।
मुख्य यजमान पं. राजकुमार तिवारी, अध्यक्ष, श्री केदार सभा रहेंगे, जबकि कथा वाचन का शुभ कार्य प्रसिद्ध भागवताचार्य आचार्य स्वयंवर सेमवाल के कर-कमलों से संपन्न होगा। यज्ञमंडप में वैदिक मंत्रों की दिव्य ध्वनि प्रतिदिन गूंजेगी, जिसका नेतृत्व मंडपाचार्य पं. अरुण शुक्ला कर रहे हैं। उनके साथ 11 विद्वान ब्राह्मणों की टोली प्रत्येक अनुष्ठान को विधिपूर्वक संपन्न कर रही है। कथा स्थल पर पवित्रता, श्रद्धा और आस्था का अनुपम संगम देखने को मिल रहा है। मीडिया प्रभारी पं. पंकज शुक्ला ने जानकारी देते हुए बताया कि यह महायज्ञ उन असंख्य पुण्यात्माओं की स्मृति में आयोजित किया गया है, जिनके नाम इतिहास में दर्ज नहीं हो सके, पर जिन्होंने 2013 की आपदा में अपने प्राण गंवाए। यह आयोजन उनके लिए सामूहिक श्रद्धांजलि और मोक्ष की प्रार्थना का प्रतीक है।
देश-विदेश के श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे अपने दिवंगत स्वजनों की तस्वीरें भेजें और ऑनलाइन माध्यम से यज्ञ में आत्मिक सहभागिता करें। यह आयोजन उन सभी के लिए एक आध्यात्मिक अवसर है, जो उन अमर आत्माओं को भावभीनी श्रद्धांजलि देना चाहते हैं। केदारधाम की घाटियों में गूंजती वेद ध्वनियां और भागवत कथा की दिव्यता इस यज्ञ को एक अद्वितीय आध्यात्मिक उत्सव बना रही हैं। यह न केवल स्मृति और श्रद्धा का पर्व है, बल्कि सामूहिक आत्मकल्याण की दिशा में एक भावपूर्ण पहल भी है।

















