-बर्ड फ्लू को लेकर अलर्ट मोड पर रहे पशु पालन और स्वास्थ्य विभाग
गाजियाबाद। जनपद में बर्ड फ्लू की रोकथाम के लिए जागरूकता फैलाने के साथ सभी विभाग सतर्क रहे। गुरुवार को विकास भवन के दुर्गावती देवी सभागार में जिलाधिकारी इन्द्र विक्रम सिंह ने सीडीओ अभिनव गोपाल,एसीपी गौतम राय, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. एसपी पांडेय, एसडीएम मोदीनगर पूजा गुप्ता, एसडीएम सदर अरूण दीक्षित, एसीएमओ, तहसीलदार, नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी, जिला सूचना अधिकारी योगेंद्र प्रताप सिंह आदि अधिकारियों के साथ बर्ड फ्लू टॉस्क फोर्स एवं अनुश्रवण, मूल्यांकन एवं समीक्षा समिति की बैठक में यह दिशा-निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि बर्ड फ्लू के संबंध में पशुपालन और स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड़ पर रहे। जिलाधिकारी ने बर्ड फ्लू (एवियन इन्फ्लूएंजा) बीमारी से बचाव के लिए आवश्यक तैयारियां और सावधानी के साथ सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर कार्य करते हुए सभी जनपद वासियों को बर्ड फ्लू के प्रति जागरूक करना हैं। पक्षियों में इसके लक्षण किस प्रकार से देखे जा सकते है और इससे बचाव के लिए क्या सावधानियां बरतनी हैं।
उन्होंने बर्ड फ्लू के लक्षणों के बारे में बताया कि बर्ड फ्लू से संक्रमित पक्षी की आंख व नाक से लाल रंग का पानी निकलता है, उन्हें हरे व लाल रंग का पतला दस्त (बीट) होता है। पक्षी को ज्वर आता है। कलगी बैठक व पैर बैंगनी हो जाते हैं। पक्षियों के गर्दन तथा आंखों के निचले हिस्से में सूजन आ जाती है। इसके साथ ही अंडा उत्पादन कम,श्वांस लेने में कठिनाई, छींक, खांसी, एक जगह पर बैठे रहना,सिर एवं गर्दन में सूजन आदि होना मुख्य लक्षण हैं। इससे प्रभावित पक्षियों की मृत्यु हो जाती है। उन्होंने कहा कि बर्ड फ्लू से बचाव के लिए बॉयो सिक्योरिटी, साफ-सफाई रखना। मुर्गी, बत्तख, मछली तथा सूकर पास-पास ना पालें। बीमार पक्षियों के बीट से बचें। मृत प्रवासी पक्षियों से प्रभावित कुक्कुट प्रक्षेत्रों से तथा एचपीएआई से ग्रसित पक्षियों के शव विच्छेदन से बचें। यदि कुक्कुट पालन का कार्य पूरी बायोसिक्योरिटी अपनाते हुए संतुलित आहार, स्वस्थ चूजों, उत्तम रखरखाव विधि से किया जाए तथा मृत पक्षियों का डिस्पोजल, डिस्पोजल पिट में किया जाए। बीमार पक्षियों को तुरंत निकाल दिया जाए तो रोग फैलने की संभावना कम हो जाती है।
जिलाधिकारी ने विशेष रूप से पशु पालन विभाग,स्वास्थ्य विभाग, लोक निर्माण विभाग,वन,पंचायती राज विभाग,पुलिस विभाग, राजस्व, नगर निगम, नगर पालिका परिषद, नगर पंचायत और सिंचाई विभाग सहित सभी विभागों को निर्देशित किया कि किसी भी कारण से जनपद में बर्ड फ्लू ना फैले। इसके लिए जागरूकता अभियान चलाते हुए जनता में बर्ड फ्लू के लक्षणों और उपाय की जानकारी दी जाएं। जिलाधिकारी ने सभी जनपदवासियों से अपील की है कि यदि बर्ड फ्लू से संबंधित कोई पक्षी या ऐसा कोई मामला संज्ञान में आता है तो वह इसकी जानकारी पशु पालन विभाग को अवश्य दें। किसी भी बीमारी को रोकना और सभी का बचाव कराना हम सभी की नैतिक व अहम जिम्मेदारी है। बर्ड फ्लू (एवियन इन्फ्लूएंजा) एक विषाणु जनित (वायरल) इन्फेक्शन है। यह आरएनए टाईप ए वायरस है। इसके तीन एन्टीजन टाईप ए,बी,सी होते हैं। बी एवं सी मनुष्यों में इन्फ्लूएंजा रोग के प्रमुख कारण है। टाईप ए पक्षियों में तथा मनुष्यों, सूकरों, घोड़े तथा बंदरों में भी रोग उत्पन्न करते हैं।
जिलाधिकारी ने कहा कि जनपद में शत्रु संपत्तियों की कृषि भूमि पर अगर कब्जा है,तो उसे कब्जा मुक्त कराई जाए। जो खाली भूमि है और एलएमसी की भूमि पर गोवंशों के लिए चारा उत्पादन किया जाएं। उन्होंने सभी एसडीएम, तहसीलदार, अधिशासी अधिकारी, खंड विकास अधिकारियों को निर्देशित किया कि उक्त कृषि भूमि पर चारा उत्पादन किया जाए। इसके साथ ही निराश्रित गोवंश सुपुर्दगी अभियान, निराश्रित गोवंश को ठंड से बचाव की व्यवस्था, निर्माणाधीन अस्थाई गो आश्रय स्थलों की प्रगति आदि की समीक्षा की। जिलाधिकारी ने कहा कि जनपद के सभी पोल्ट्री फॉर्म का निरंतर निरीक्षण किया जाए। जिनमें बर्ड फ्लू के लक्षण दिखाई दें, उन्हें तुरंत अलग रखते हुए जांच कराई जाए। बर्ड फ्लू का मामला संज्ञान में आते ही मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी या पशुपालन विभाग को सूचित किया जाए। उन्होंने पशुपालन विभाग और स्वास्थ्य विभाग को बर्ड फ्लू के संबंध में अलर्ट मोड़ पर रहने के लिए निर्देशित किया।

















