सरकारी खजाने को भरने में गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर के शौकीन निभा रहे अहम भूमिका, 8 माह में पी गए करोड़ों की शराब

• सरकारी खजाने को भरने में आबकारी विभाग निभा रहें अहम भूमिका, 8 माह में शौकीनों ने कर दिया मालामाल
• गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर आबकारी विभाग की कार्रवाई से टूटा शराब तस्करों का संगठित नेटवर्क
• बनाया नया रिकॉर्ड: गौतमबुद्ध नगर 1151 करोड़ तो गाजियाबाद को मिला 1093 करोड़ का राजस्व

उदय भूमि
गाजियाबाद/गौतमबुद्ध नगर। जीवन में सफलता के लिए सबसे जरूरी है लक्ष्य का निर्धारित होना। जब तक कोई लक्ष्य निर्धारित नहीं होगा, तब तक सफलता भी नहीं मिल सकती है। अपने इसी लक्ष्य को पूरा करने के लिए आबकारी विभाग की टीमें दिन-रात पसीना बना रही है। यह लक्ष्य सिर्फ राजस्व प्राप्ति करना ही तक सीमित नहीं बल्कि राजस्व को बढ़ाने के साथ-साथ अवैध शराब के कारोबार में शामिल लोगों को भी उनकी सही जगह पहुंचाना है। ऐसा इसलिए इस तरह के लोग अगर बाहर रहेंगे तो विभाग से ज्यादा आमजन के लिए खतरा है। अवैध शराब के कारोबार में शामिल लोग अपने फायदे के लिए कब क्या कर दें, इसका पता किसी को नहीं है, इसलिए आबकारी विभाग की टीमें दिन-रात शराब तस्करों पर कार्रवाई के लिए तत्पर रहती है। हरियाणा व दिल्ली की सीमा से गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद सटा होने के कारण एक तरफ जहां सबसे अधिक शराब तस्करी की आशंका रहती है, वहीं सरकार ने भी दोनों ही जिलो को राजस्व वसूली का टारगेट भी अधिक दिया हुआ है। गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर में देखा जाए तो मदिरा प्रेमियों की कमी नहीं। आबकारी विभाग के आंकड़े इसकी गवाही दे रहे हैं। शराब के प्रति इस दीवानगी से सरकारी खजाने में भी काफी वृद्धि हुई है। उत्तर प्रदेश सरकार की माली हालत को सुधारने के लिए दोनों ही जिलों की टीमें अपनी महत्वपूर्ण रोल अदा कर रही है। शराब की रिकॉर्ड तोड़ बिक्री हो रही है। इससे सरकार का खजाना भर रहा है। यह इसलिए कि दोनों ही जिलों में शराब तस्करों के खिलाफ लगातार हो रही कार्रवाई सबसे बड़ा कारण है।

गाजियाबाद जिले मेंं देशी, विदेशी और बीयर की कुल 539 शराब की दुकान हैं और गौतमबुद्ध नगर जिले में देशी, विदेशी और बीयर की कुल 570 शराब की दुकाने है। शराब बिक्री की एवज में यूपी सरकार को राजस्व उपलब्ध कराने के मामले में गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर भी अन्य जिलों से पीछे नहीं है। यानी सरकार के खजाने को भरने में गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर के शौकीनों की अहम भूमिका है। जनपद में शराब की रिकॉर्ड तोड़ बिक्री और राजस्व की प्राप्ति में आबकारी विभाग के रोल को कतई नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। जिला आबकारी अधिकारी के नेतृत्व में विभाग नए-नए कीर्तिमान स्थापित करता नजर आ रहा है। क्योंकि शराब तस्करों से निपटने के लिए जिले में जिस स्तर पर कार्रवाई होती है। वह शायद कहीं देखने को नहीं मिली है। यह राजस्व सिर्फ शराब बिक्री का नहीं है, बल्कि इसमें अगर ऑकेजनल बार लाइसेंस के लिए आने वाले आवेदनों को और जोड़ दिया जाए तो 10, 20 लाख का ग्राफ और बढ़ सकता है। प्रदेश सरकार को अगर अपने लक्ष्य से ज्यादा कहीं से राजस्व मिलता है तो वो आबकारी विभाग है। शराब सेहत के लिए भले ही हानिकारक हो लेकिन सरकार की कमाई के लिए यह बेहद लाभकारी है।

क्योंकि, अल्कोहल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी यानी आबकारी शुल्क से राज्यों सरकारों को बड़ा राजस्व मिलता है। आमतौर पर राज्यों की कमाई का मुख्य जरिया स्टेट जीएसटी, लैंड रेवेन्यू, पेट्रोल-डीजल पर लगने वाला टैक्स समेत अन्य कर शामिल हैं। लेकिन, आबकारी शुल्क का राज्य सरकार की कमाई अहम योगदान रहता है। जिसमें जनपद गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर का आबकारी विभाग पूरी शिद्दत के साथ जुटा हुआ है। देसी अंग्रेजी और बीयर के शौकीनों की स्थिति पर नजर डाली गई तो पता चला कि तीनों के शौकीन एक-दुसरे से होड़ करते नजर आ रहे है। अंग्रेजी शराब में महंगे ब्रांड के शौकीनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। गौरतलब हो कि उत्तर प्रदेश सरकार के खजाने में आबकारी राजस्व के रूप में रकम जुटाने में अपनी अहम भूमिका निभा रहा है। जिसमें हर वर्ष पिछले रिकॉर्ड को तोड़कर नया रिकॉर्ड स्थापित कर रहा है। शराब के शौकीन की बात करें तो देशी के मुकाबले इस वर्ष विदेशी पीने वालों ने बाजी अपने नाम की। विदेशी शराब की बिक्री एक और देसी दुसरे व बीयर की बिक्री गत वर्ष के मुकाबले इस वर्ष आगे है। शराब के शौकीनों ने उत्तर प्रदेश के राजस्व में योगदान देने में कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ी।

गौतमबुद्ध नगर आबकारी विभाग ने वर्ष 2023-24 पिछले 8 माह में करीब 1067 करोड़ का राजस्व वसूला किया था, मगर वर्ष 2024-25 में आबकारी विभाग की टीम ने पिछले वर्ष 8 माह के रिकॉर्ड को तोड़कर इस बार अपना नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। आबकारी विभाग की टीमें राजस्व की वृद्धि के मामले में हो या फिर कार्रवाई के मामले में हर बार खुद का रिकॉर्ड तोड़कर नया रिकॉर्ड बनाते हुए आगे बढ़ रही है। जो कि पिछले रिकॉर्ड से 90.89 करोड़ रुपये अधिक है। गौतमबुद्ध नगर दिल्ली और हरियाणा की सीमा से सटा हुआ है। दिल्ली व गौतमबुद्धनगर को जोड़ने वाले दर्जनों ऐसे रास्ते है। जिन रास्तों से अक्सर लोग दिल्ली व हरियाणा से शराब लेकर आते है। तीनों राज्यों में उत्तर प्रदेश की अपेक्षा शराब की कीमत कम है। कई वर्षों से यहां बड़ी मात्रा में शराब की तस्करी होती थी।

हरियाणा व दिल्ली के तस्कर तो शराब की होम डिलीवरी भी करते थे। मगर आबकारी विभाग की ठोस रणनीति और आपसी समन्वय के चलते शराब माफिया के चक्रव्यूह को ध्वस्त करते हुए अपना खुद का साम्राज्य स्थापित किया है। यहीं काम गाजियाबाद की आबकारी विभाग की टीम कर रही है। गाजियाबाद दिल्ली की सीमा से भले सटा हो, मगर राजस्व बढोत्तरी और कार्रवाई के मामले में सबसे आगे चल रही है। गाजियाबाद नगर आबकारी विभाग ने वर्ष 2023-24 पिछले 8 माह में करीब 988.04 करोड़ का राजस्व वसूला था, मगर वर्ष 2024-25 में आबकारी विभाग की टीम ने पिछले वर्ष 8 माह के रिकॉर्ड को तोड़ते हुए एक नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। जो कि पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष भी अपना नया रिकॉर्ड बनाया है। आबकारी विभाग की टीमें राजस्व की वृद्धि के मामले में हो या फिर कार्रवाई के मामले में हर बार खुद का रिकॉर्ड तोड़कर नया रिकॉर्ड बनाते हुए आगे बढ़ रही है। जो कि पिछले रिकॉर्ड से 105.66 करोड़ रुपये अधिक है। दोनों जिले की टीमें अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए कार्रवाई में कसर नहीं छोड़ रही है।

90.89 करोड़ रुपए का अधिक राजस्व हुआ हासिल
गौतमबुद्ध नगर आबकारी विभाग की टीम ने पिछले वर्ष 8 माह की अपेक्षा इस वर्ष करीब 90.89 करोड़ रुपए का अधिक राजस्व हासिल किया है। आबकारी विभाग ने वर्ष 2024-25 अप्रैल से नवंबर माह तक 1157.89 करोड़ का राजस्व हासिल किया है। वर्ष 2023-24 में अप्रैल से नवंबर माह तक 1067.05 करोड़ रुपए का लक्ष्य हासिल किया था। वर्ष 2024-25 अप्रैल से नवंबर माह तक देशी शराब पर 354.23 करोड़, अंग्रेजी शराब 474.34, बीयर 329.32 करोड़ रुपये की बिक्री हुई थी। वर्ष 2023-24 जुलाई से अप्रैल से नवंबर माह तक देशी शराब 355.89 करोड़, अंग्रेजी 443.90 करोड़, बीयर 267.26 करोड़ की बिक्री हुई थी। वहीं शराब तस्करों पर लगातार की कार्रवाई से जहां एक ओर राजस्व में वृद्धि हुई है तो वहीं दुसरी ओर अवैध शराब के कारोबार में शामिल तस्करों को सलाखों के पीछे भेजा गया है।

वर्ष 2024-25 अप्रैल से नवंबर माह तक हुई कार्रवाई में 837 मुकदमा दर्ज कर 248 तस्करों को सलाखों के पीछे भेजा है। शराब तस्करी में प्रयुक्त 28 वाहन को जब्त किया गया। इन वाहनों दुपहिया से लेकर लग्जरी कार और बडे वाहन शामिल है। जिनके कब्जे से 28 हजार 718.02 बल्क लीटर शराब बरामद किया गया। वहीं वर्ष 2023-24 अप्रैल से नवंबर माह तक 771 मुकदमा दर्ज करते हुए 221 तस्करों को अवैध शराब के मामले में जेल भेजा गया था। वहीं शराब तस्करी में प्रयुक्त 22 वाहनों को जब्त करते हुए 32 हजार 969.87 बल्क लीटर शराब बरामद किया गया। आबकारी विभाग के बढ़े इस राजस्व ने अपनी मंशा साफ कर दी है कि राजस्व वसूली को बढ़ाने के साथ-साथ शराब तस्करों को जेल भेजने में कोई कसर नहीं छोड़ा जाएगा। बाहरी राज्यों से होने वाली शराब तस्करी पर रोक लगने के बाद ही इस बार राजस्व में बढ़ोतरी हुई है।

105.66 करोड़ रुपए का अधिक राजस्व हुआ हासिल
गाजियाबाद आबकारी विभाग की टीम ने पिछले वर्ष 8 माह की अपेक्षा इस वर्ष करीब 105.66 करोड़ रुपए का अधिक राजस्व हासिल किया है। आबकारी विभाग ने वर्ष 2024-25 अप्रैल से नवंबर माह तक 1093 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल किया है। वर्ष 2023-24 में अप्रैल से नवंबर माह तक 988.04 करोड़ रुपए का लक्ष्य हासिल किया था। वर्ष 2024-25 अप्रैल माह में 122.83, मई में 140.86, जून में 133.85, जुलाई में 132.86, अगस्त में 130.34, सितंबर में 134.73, अक्टूबर में 153.55 और नवंबर माह में 144.44 करोड़ का राजस्व हासिल किया है। जिसमें अवैध शराब के मामले में 776 मुकदमा दर्ज करते हुए 87 तस्करों को जेल की हवा खिलाई है। शराब तस्करी में प्रयुक्त 7 वाहनों को सीज किया गया। वहीं शराब तस्करों से 24 हजार 588 बल्क लीटर शराब बरामद किया गया। शराब तस्करों पर कार्रवाई और राजस्व बढ़ोत्तरी में शुमार आबकारी विभाग की टीमें हर दिन अपने उम्दा प्रदर्शन कर रही है। यही वजह है कि जिले में अवैध शराब का कारोबार करने वालों में आबकारी विभाग का खौफ बरकरार है।

सुबोध कुमार श्रीवास्तव
जिला आबकारी अधिकारी

जिले का राजस्व बढ़ाने और शराब तस्करी रोकने के लिए हर दिन नई रणनीति के तहत कार्यवाही की जा रही है। जिसके लिए सभी आबकारी निरीक्षकों के साथ बैठक कर रोजाना होने वाली कार्रवाई पर मंथन किया जाता है और किसी तरह से आबकारी विभाग के राजस्व बढ़ाने के लिए अन्य स्रोतों पर कार्य कर सकते है इस पर विचार किया जाता है।
आबकारी विभाग राजस्व में बढ़ोतरी के साथ आमजन की सुरक्षा के लिए कार्रवाई भी कर रही है। जिससे लोगों को अवैध शराब के सेवन से बचाया जा सकें। बाहरी राज्यों की शराब में अल्कोहाल का कोई मानक नहीं होता है। अवैध शराब के खिलाफ लगातार हो रही कार्रवाई का ही परिणाम है कि राजस्व में बढ़ोतरी हो रही है। अवैध शराब के खिलाफ आबकारी विभाग की टीम तस्करों पर कार्रवाई करने के लिए लगातार छापेमारी की कार्रवाई कर रही है। आगे भी जनपद में शराब तस्करी पर कार्रवाई जारी रहेगी। अवैध शराब की बिक्री पर सख्ती बरती जा रही है। जनपद में जहां भी शराब तस्करों के ठिकाने थे, उन्हें पूरी तरह से ध्वस्त किया जा चुका है। इसके साथ ही आबकारी विभाग की टीम द्वारा शराब की दुकानों पर भी लगातार टेस्ट परचेजिंग कराई जा रही है। जिससे दुकानों पर नियमानुसार शराब की बिक्री हो सके और ओवर रेटिंग की शिकायत पर रोक लग सकें। बिना लाइसेंस के शराब पार्टी करने वाले होटल, ढाबा, रेस्टोरेंट, बार पर भी लगातार कार्रवाई की जा रही है और शराब पार्टी के लिए लाइसेंस लेने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है।
सुबोध कुमार श्रीवास्तव
जिला आबकारी अधिकारी
गौतमबुद्ध नगर

संजय कुमार
जिला आबकारी अधिकारी

जनपद में अवैध शराब के कारोबार को पूरी तरह से खत्म करने के लिए आबकारी विभाग की टीमें हर दिन नई रणनीति तैयार कर अपनी कार्रवाई को अंजाम दे रही हैं। साथ ही शासन द्वारा निर्धारित लक्ष्य को हासिल करने के लिए भी पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। अवैध शराब के खिलाफ आबकारी विभाग की टीम तस्करों पर कार्रवाई करने के लिए लगातार छापेमारी की कार्रवाई कर रही है। आगे भी जनपद में शराब तस्करी पर लगाम लगाने के लिए कार्रवाई जारी रहेगी। अवैध शराब की बिक्री पर सख्ती बरती जा रही है। राजस्व में वृद्धि करने के लिए भी हर संभव प्रयास किए जा रहे है। जनपद में जहां भी शराब तस्करों के ठिकाने थे, उन्हें पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया गया है। इसके अलावा लाइसेंसशुदा विक्रेताओं को भी सख्त हिदायत दी गई है। जिससे वह ओवर रेटिंग न कर सकें। होटल व बिना लाइसेंस चल रहे बार पर कार्रवाई कर उन पर जुर्माना लगाया जा रहा हैं। जिले में अवैध शराब का कारोबार बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिसके लिए आबकारी निरीक्षकों को भी सख्त निर्देश दिए गए है।
संजय कुमार प्रथम
जिला आबकारी अधिकारी