• संपत्तियों की बिक्री और नक्शा स्वीकृति से बढ़ेगी जीडीए की आय
• उपाध्यक्ष नंद किशोर कलाल की रणनीति, प्लानिंग और मार्केटिंग के लिए बनेंगे दो नए विंग
• मधुबन-बापूधाम समेत प्रमुख योजनाओं पर विशेष फोकस
• सोशल मीडिया और टेली कॉलिंग से होगा रिक्त संपत्तियों का प्रचार
• अवैध कॉलोनियों से बचाने को जनता को दी जाएगी पूरी जानकारी
• डीपीआर और डिजाइन तैयार करने के लिए आउटसोर्स टीम होगी तैनात
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंत तक अपनी आय में ऐतिहासिक बढ़ोतरी का लक्ष्य तय करते हुए 1000 करोड़ रुपये से अधिक की फंडिंग जुटाने का व्यापक खाका तैयार कर लिया है। जीडीए उपाध्यक्ष नंद किशोर कलाल के नेतृत्व में प्राधिकरण अब योजनाबद्ध रणनीति के तहत न केवल अपनी रिक्त और अनिस्तारित संपत्तियों को बाजार में उतारेगा, बल्कि नक्शा स्वीकृति, शमन शुल्क, कंपाउंडिंग शुल्क और अन्य वैधानिक स्रोतों से भी राजस्व में उल्लेखनीय इजाफा करेगा।
जीडीए अधिकारियों के अनुसार, इस पूरी योजना का उद्देश्य प्राधिकरण को आर्थिक रूप से और अधिक सशक्त बनाना है, ताकि शहर के विकास कार्यों को गति दी जा सके। उपाध्यक्ष नंद किशोर कलाल ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल 1000 करोड़ रुपये की आय बढ़ाने की योजना पर काम शुरू कर दिया गया है और इसे मिलाकर आने वाले समय में लगभग 6000 करोड़ रुपये तक की फंडिंग जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए संपत्ति अनुभाग, नियोजन अनुभाग और प्रवर्तन अनुभाग को स्पष्ट लक्ष्य सौंप दिए गए हैं और सभी संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध ढंग से काम करने के निर्देश दिए गए हैं।
जीडीए द्वारा तैयार किए गए रोडमैप के अनुसार, इनकम टैक्स से लगभग 200 करोड़ रुपये, नक्शा स्वीकृति शुल्क से करीब 400 करोड़ रुपये, शमन शुल्क से 150 करोड़ रुपये और रिक्त संपत्तियों की बिक्री समेत अन्य स्रोतों से लगभग 300 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। इस तरह कुल मिलाकर 1050 करोड़ रुपये से अधिक की आय प्राप्त करने की योजना बनाई गई है। उपाध्यक्ष का कहना है कि अगले तीन महीनों में इस लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में ठोस परिणाम सामने लाने का प्रयास किया जाएगा।
राजस्व बढ़ाने की इस रणनीति का एक अहम हिस्सा जीडीए की विभिन्न योजनाओं में मौजूद रिक्त और अनिस्तारित संपत्तियों की बिक्री है। इसके लिए प्राधिकरण में एक विशेष मार्केटिंग विंग गठित की जा रही है, जो आधुनिक तरीकों से संपत्तियों का प्रचार-प्रसार करेगी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, टेली कॉलिंग और डिजिटल प्रचार के माध्यम से लोगों तक जीडीए की संपत्तियों की जानकारी पहुंचाई जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि इससे न केवल बिक्री में तेजी आएगी, बल्कि लोगों का भरोसा भी प्राधिकरण की योजनाओं पर और मजबूत होगा।
इसके साथ ही जीडीए एक अलग विंग का गठन भी कर रहा है, जो शहर में विकसित की जाने वाली नई योजनाओं के लिए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) और डिजाइन तैयार करेगी। इस विंग में आउटसोर्स के माध्यम से विशेषज्ञ कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी, जिन्हें निजी एजेंसियों के जरिए रखा जाएगा। यह टीम योजनाओं की तकनीकी और डिजाइन संबंधी जरूरतों को पूरा करेगी, जिससे परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी। जीडीए उपाध्यक्ष के अनुसार, यह व्यवस्था अगले एक सप्ताह के भीतर काम करना शुरू कर देगी।
मार्केटिंग टीम का एक और अहम दायित्व लोगों को अवैध कॉलोनियों और गैर-स्वीकृत टाउनशिप से बचाना भी होगा। इस टीम के माध्यम से यह जानकारी सार्वजनिक की जाएगी कि जीडीए क्षेत्र में कौन-कौन सी टाउनशिप और योजनाएं स्वीकृत हैं और कौन सी नहीं। इससे आम नागरिकों को धोखाधड़ी से बचाया जा सकेगा और अवैध निर्माण पर भी प्रभावी अंकुश लगेगा। साथ ही, जीडीए की स्वीकृत योजनाओं और उपलब्ध संपत्तियों का व्यापक प्रचार कर उन्हें तेजी से निस्तारित किया जाएगा।
जीडीए की इस पूरी पहल में मधुबन-बापूधाम सहित प्रमुख योजनाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इन क्षेत्रों में उपलब्ध संपत्तियों को प्राथमिकता के आधार पर बाजार में उतारने की तैयारी है। उपाध्यक्ष नंद किशोर कलाल का कहना है कि बिल्डरों की तर्ज पर अब जीडीए भी आधुनिक मार्केटिंग टूल्स का उपयोग करेगा, ताकि प्राधिकरण की संपत्तियों की सही जानकारी सही लोगों तक पहुंचे और राजस्व में लगातार वृद्धि हो सके।
















