गाजियाबाद के पूर्व नगर आयुक्त जाएंगे जेल ? भ्रष्टाचार में बुरे फंसे, FIR दर्ज, गाजियाबाद से लखनऊ तक करोड़ों की काली कमाई का जाल बेनकाब

मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक राजधानी लखनऊ सहित प्रदेश के कई शहरों में पूर्व नगर आयुक्त द्वारा काली कमाई के जरिये संपत्ति अर्जित करने के आरोप लगे हैं। विजलेंस अधिकारी का कहना है कि विस्तृत जांच में कई और जानकारी मिल सकती है। आगे की जांच में और भी कई सरगना के नाम सामने आ सकते हैं, जिनसे पूर्व नगर आयुक्त के गहरे रिश्ते रहे हैं। आगरा सेक्टर विजिलेंस की जांच में खुलासा हुआ कि उन्होंने अपनी वैध आय के मुकाबले 113 प्रतिशत ज्यादा संपत्ति खड़ी कर ली। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज कर कार्रवाई का बिगुल बजा दिया गया। जांच में सामने आया कि जिस अवधि में पूर्व नगर आयुक्त की आधिकारिक आय 2 करोड़ 62 लाख रुपए थी, उस अवधि में उन्होंने 5 करोड़ 59 लाख रुपए से ज्यादा की संपत्ति और खर्च का ब्यौरा दिया। यानी, 2 करोड़ 97 लाख रुपए का अंतर। इतनी अधिक कमाई उन्होंने कहां से कि इसका वह कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। विजिलेंस को लखनऊ, जौनपुर और आजमगढ़ में भी उनकी करोड़ों की संपत्ति के दस्तावेज मिले हैं।

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। गाजियाबाद के पूर्व नगर आयुक्त एवं रिटायर्ड आईएएस अब्दुल समद भ्रष्टाचार के मामले में बुरी तरह फंस गये हैं। आय से अधिक संपत्ति के मामले में आरोप सही पाते हुए शासन की अनुमति के बाद पूर्व नगर आयुक्त के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। एफआईआर दर्ज होने के बाद विजलेंस द्वारा रिटायर्ड आईएएस की काली कमाई के बारे में छानबीन की जाएगी। मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक राजधानी लखनऊ सहित प्रदेश के कई शहरों में अब्दुल समद द्वारा काली कमाई के जरिये संपत्ति अर्जित करने के आरोप लगे हैं। विजलेंस अधिकारी का कहना है कि विस्तृत जांच में कई और जानकारी मिल सकती है।
कभी सपा सरकार में आजम खान के सबसे ताकतवर अफसर माने जाने वाले अब्दुल समद की कलई विजिलेंस ने खोल दी है। आगरा सेक्टर विजिलेंस की जांच में खुलासा हुआ कि उन्होंने अपनी वैध आय के मुकाबले 113 प्रतिशत ज्यादा संपत्ति खड़ी कर ली। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज कर कार्रवाई का बिगुल बजा दिया गया। जांच में सामने आया कि जिस अवधि में अबदुल समद की आधिकारिक आय 2 करोड़ 62 लाख रुपए थी, उस अवधि में उन्होंने 5 करोड़ 59 लाख रुपए से ज्यादा की संपत्ति और खर्च का ब्यौरा दिया। यानी, 2 करोड़ 97 लाख रुपए का अंतर। इतनी अधिक कमाई उन्होंने कहां से कि इसका वह कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। विजिलेंस को लखनऊ, जौनपुर और आजमगढ़ में भी उनकी करोड़ों की संपत्ति के दस्तावेज मिले हैं।

विवादों से है पुराना नाता
गाजियाबाद में नगर आयुक्त रहते हुए समद कई विवादों में घिरे। डस्टबिन, कंप्यूटर और स्ट्रीट लाइट की खरीद में करोड़ों की अनियमितता के आरोप उन पर लगे। भाजपा प्रभाव वाले गाजियाबाद में उनके कई फैसलों का खुला विरोध हुआ, लेकिन आजम खान की नजदीकी के चलते वे बेखौफ रहे। यह पहला मौका नहीं जब समद विवादों में आए हों। 2004 में कानपुर में विधायक सलिल बिश्नोई से दुर्व्यवहार और 2023 में यूपी विधानसभा में विशेषाधिकार हनन मामले में उन्हें दोषी ठहराया गया। कानपुर कांड में तो उन्हें और पांच पुलिसकर्मियों को रात 12 बजे तक की जेल की सजा भी काटनी पड़ी, जिसके बाद माफी मांगकर छूटे।

सपा सरकार में चलती थी हनक
पीपीएस से सफर शुरू कर पीसीएस और फिर आईएएस बनने वाले अब्दुल समद का करियर सपा राज में चमका। आजम खान के करीबी होने के कारण उन्हें अहम पदों का तोहफा मिलता रहा। आज वे रिटायर होकर ऐशो-आराम की जिंदगी बिता रहे हैं, लेकिन विजिलेंस की यह कार्रवाई उनकी नींद उड़ा सकती है।  सूत्रों के अनुसार, विजिलेंस को जांच के दौरान यह भी जानकारी मिली कि अब्दुल समद के पास आजमगढ़, जौनपुर और लखनऊ जैसे शहरों में संपत्तियां हैं। हालांकि, इन संपत्तियों का उल्लेख फिलहाल दर्ज मुकदमे में नहीं किया गया है। लेकिन जांच एजेंसियों द्वारा इन पहलुओं को भी ध्यान में रखकर आगे की कार्यवाही की संभावना है।

शासन की अनुमति के बाद दर्ज हुआ मुकदमा
एसपी विजिलेंस आगरा सेक्टर आलोक शर्मा के अनुसार, जांच रिपोर्ट शासन को भेजी गई थी। शासन से अनुमति मिलने के बाद अब्दुल समद के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। अब आगे की जांच के लिए विजिलेंस टीम उनके द्वारा अर्जित संपत्तियों और आय के स्रोतों की बारीकी से पड़ताल करेगी। इस मामले ने न सिर्फ पूर्व अफसरशाही की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी दिखाया है कि प्रभावशाली पदों पर रहकर लोग किस तरह से भ्रष्टाचार करते हैं। आलोक शर्मा ने बताया कि इंस्पेक्टर रविंद्र कुमार दुबे की रिपोर्ट पर यह मुकदमा दर्ज किया गया। अब उनकी जायदाद और लेन-देन की गहन छानबीन होगी। सूत्रों के मुताबिक, आगे की जांच में और भी कई सरगना के नाम सामने आ सकते हैं, जिनसे अब्दुल समद के गहरे रिश्ते रहे हैं।