शराब तस्करों का काल बनी लखनऊ आबकारी टीम, ऑपरेशन ‘शुद्ध सीमाएं’ से मचा हड़कंप

-यूपी की सीमा अब नहीं बनेगी माफियाओं का गलियारा, चुनावी तस्करी पर ‘लखनऊ मॉडल’ की सर्जिकल स्ट्राइक
-8 लाख की राजस्थान की शराब समेत चालक व परिचालक गिरफ्तार

उदय भूमि संवाददाता
लखनऊ। बिहार विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट ने एक ओर जहां राजनीतिक तापमान को बढ़ा दिया है, वहीं दूसरी ओर शराब माफियाओं के नेटवर्क ने भी अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं। चुनाव के दौरान मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए अवैध शराब का वितरण एक पुराना और खतरनाक ट्रेंड बन चुका है। इसी को देखते हुए इस बार भी माफिया तंत्र ने हरकत में आना शुरू कर दिया है और शराब की अवैध आपूर्ति के जरिए मोटी कमाई करने की फिराक में हैं। बिहार में पूर्ण शराबबंदी के कारण शराब माफियाओं को सप्लाई के लिए वैकल्पिक रास्तों की तलाश रहती है और उत्तर प्रदेश इसकी प्रमुख कड़ी बनता है। बिहार तक शराब पहुंचाने के लिए उन्हें यूपी की सीमाओं से होकर गुजरना ही होता है। ऐसे में यदि यूपी में सतर्कता न बरती जाए, तो अवैध शराब बड़ी मात्रा में बिहार तक पहुंच सकती है। लेकिन इस बार उनकी राह में एक बड़ी और मजबूत दीवार खड़ी है लखनऊ का आबकारी विभाग, जो माफियाओं के इरादों पर करारा प्रहार कर रहा है। जिला आबकारी अधिकारी करुणेन्द्र सिंह के नेतृत्व में चल रहा अभियान अब केवल एक विभागीय कार्रवाई नहीं, बल्कि “ऑपरेशन शुद्ध सीमाएं” नाम से एक संगठित रणनीति बन चुका है।

इस ऑपरेशन का मकसद है शराब तस्करी के हर संभावित रूट को पहचानकर सील करना, अवैध तस्करी को जड़ से खत्म करना और उत्तर प्रदेश की सीमाओं को ‘शुद्ध और सुरक्षित’ बनाना। लखनऊ की आबकारी टीम ने हाल के दिनों में जिस फुर्ती, साहस और सूझबूझ का परिचय दिया है, उसने यह साफ कर दिया है कि अब कानून, तस्करों से एक नहीं, कई कदम आगे है। चाहे वह फर्जी नंबर प्लेट हो, कैरेट की आड़ में छिपाई गई शराब, या रूट बदलकर भागने की तरकीब हर कोशिश को विभाग ने विफल किया है। यह टीम अब सिर्फ कानून का पालन नहीं करा रही, बल्कि अपराध के खिलाफ एक निर्भीक योद्धा की भूमिका निभा रही है। जिला आबकारी अधिकारी करुणेन्द्र सिंह ने बताया कि बिहार चुनाव के मद्देनज़र अवैध शराब की तस्करी पर पूरी तरह से नज़र रखी जा रही है। हमने तीन शिफ्टों में 24 घंटे सक्रिय टीमों की तैनाती की है, जो लगातार रोड चेकिंग, गोपनीय सूचनाओं पर कार्रवाई और संदिग्ध ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। हमारी रणनीति है माफिया के सोचने से पहले हम सोचें, और उनके पहुंचने से पहले हम कार्रवाई करें। हम हर उस कोशिश को विफल करेंगे, जो समाज को नशे की ओर धकेलने का प्रयास करे। यह सिर्फ एक जब्ती नहीं, बल्कि एक चेतावनी है कि अवैध कारोबारियों के लिए उत्तर प्रदेश अब सेफ ज़ोन नहीं रहा।

काली पन्नी, कैरेट और फर्जी नंबर प्लेट से भी नहीं बच सका माफिया का नेटवर्क
गुरुवार सुबह तड़के लखनऊ आबकारी विभाग को मुखबिर से सूचना मिली कि राजस्थान से अवैध शराब की एक बड़ी खेप किसान पथ होते हुए बिहार ले जाई जा रही है। सूचना मिलते ही विभाग ने बिना समय गंवाए विशेष रणनीति के साथ टीम गठित की। आबकारी निरीक्षक राम श्याम त्रिपाठी, दरोगा दिनकर वर्मा, धीरेन्द्र वर्मा और रवि यादव को लेकर तुरंत इलाके में चेकिंग अभियान तेज कर दिया गया। जैसे ही संदिग्ध पिकअप वाहन को देखा गया, चालक पुलिस को देख भागने लगा, लेकिन टीम की घेराबंदी में वाहन को पकड़ लिया गया। तलाशी लेने पर वाहन से 162 पेटी यानी 7776 टेट्रा पैक रॉयल क्लासिक व्हिस्की (राजस्थान ब्रांड) बरामद हुई। वाहन में मदिरा को इस तरह छिपाया गया था कि ऊपर से देखने पर कैरेट में सामान लदा हुआ प्रतीत हो रहा था। ऊपर से काली पन्नी की परत, नीचे शराब की खेप माफिया की पूरी चालाकी धरी की धरी रह गई।

फर्जी नंबर प्लेट से बचना चाहा, लेकिन नहीं बच सका कानून का शिकंजा
जयपुर के दो तस्कर गिरफ्तार, 8 लाख की शराब जब्त, बिहार में तीन गुना रेट पर बेचने की योजना थी। गिरफ्तार किए गए चालक सोनू बागरिया और सहायक सीताराम बागरिया, दोनों जयपुर निवासी हैं। इन्होंने पिकअप पर उत्तर प्रदेश का फर्जी नंबर प्लेट लगाकर वाहन को चलाया, ताकि वह चेकिंग के दौरान बच सके। लेकिन टीम की सतर्कता ने उनकी हर चाल को असफल कर दिया। जांच में गाड़ी असल में राजस्थान नंबर की निकली। जब्त शराब की अनुमानित कीमत 8 लाख रुपये बताई गई है, जिसे बिहार में तीन गुना कीमत पर बेचकर मोटा मुनाफा कमाने की योजना थी।

24×7 ऑपरेशन मोड में लखनऊ आबकारी विभाग
जिला आबकारी अधिकारी करुणेन्द्र सिंह ने स्पष्ट किया है कि विभाग 24 घंटे, तीन शिफ्टों में तैनात टीमों के साथ काम कर रहा है। सड़क मार्गों पर निरंतर चेकिंग की जा रही है, संभावित तस्करी मार्गों की मैपिंग की जा चुकी है और ठिकानों की पहचान कर त्वरित दबिश भी दी जा रही है। विभाग ने गुप्त मुखबिरी तंत्र को मजबूत कर इंटेलिजेंस बेस्ड कार्रवाई मॉडल को अपनाया है, जिसमें हर सूचना पर तुरंत ‘एक्शन’ और जवाबी रणनीति तय की जाती है।

शराब तस्करी के खिलाफ मोर्चे पर तैनात टीमें
लखनऊ आबकारी विभाग की कार्यशैली अब अन्य जिलों के लिए “मॉडल ऑफ एक्शन” बन चुकी है। जिला आबकारी अधिकारी करुणेन्द्र सिंह की अगुवाई में काम कर रही टीम का हर सदस्य हाई प्रोफेशनलिज़्म और जनहित की भावना से लैस है। विभाग ने साफ कर दिया है कि कोई भी तस्कर, चाहे वह कितनी भी तकनीकी चालाकी क्यों न अपना ले, विभाग की नजरों से बच नहीं सकता। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बिहार में चुनाव तक शराब माफियाओं की हर हरकत पर नजर रखी जाएगी और “नो टॉलरेंस” पॉलिसी के तहत कार्रवाई की जाएगी। उनके अनुसार, शराब माफिया सोचते हैं कि वे सिस्टम से तेज हैं, लेकिन लखनऊ की टीम उन्हें यह बता चुकी है कि कानून की गति धीमी नहीं, बल्कि रणनीतिक है।

बिहार चुनाव, यूपी की सीमा और सख्त कानून का तिकड़ी मॉडल
बिहार चुनाव के मद्देनजर यूपी के सभी सीमावर्ती जिलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। मगर लखनऊ जैसे बड़े सेंटर से गुजरना माफियाओं के लिए अब आसान नहीं। लखनऊ आबकारी विभाग की कार्यशैली, समर्पण और कठोर निगरानी व्यवस्था ने यह साबित कर दिया है कि यूपी अब अवैध शराब का कॉरिडोर नहीं, कानून का बुलेटप्रूफ बैरियर बन चुका है। लखनऊ आबकारी विभाग की यह कार्रवाई केवल एक जब्ती नहीं, बल्कि एक ठोस संदेश है कानून से लडऩे वालों को नतीजे भुगतने ही होंगे। चुनावी मौसम में व्यवस्था को बिगाड़ने की हर कोशिश को कुचलने के लिए टीम कमर कस चुकी है। कार्रवाई जारी है, रणनीति तैयार है और इरादा अडिग।