आरएसएस प्रमुख बोले, दूर हो गई गलत-फहमी
नागपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने विजयदशमी पर्व के अवसर पर चीन को खरी-खरी सुनाई। उन्होंने कहा कि चीन की मनमानी के खिलाफ भारत डटकर खड़ा हो गया है। उन्होंने कहा कि भारत दुर्बल देश नहीं है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संबंधों में चीन से आगे निकलने की जरूरत पर भी जोर दिया। महाराष्ट्र के नागपुर में रविवार को आरएसएस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में मोहन भागवत ने चीन को खरी-खोटी सुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने कहा कि चीन की आदत विस्तारवादी है। चीन ने भारत के अलावा अमेरिका आदि देशों के साथ भी विवाद पैदा किया है। भारत आज चीन के खिलाफ डटकर खड़ा है। चीन को परास्त करने के लिए अब भारत को अंतरराष्ट्रीय संबंधों में आगे निकलने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भारत मित्रवत संबंध के लिए हमेशा तैयार रहता है, मगर हम कमजोर नहीं हैं। भारत को कमजोर समझने वालों की गलत-फहमी दूर हो गई होगी। चीन को समझ में आ गया होगा कि भारत इतना कच्चा नहीं है। भारत को अपनी इस ताकत को बनाए रखना होगा। उन्होंने कहा कि देश के लिए भी सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है। कोरोना संकट की स्थिति में भारत बाकी देशों की तुलना में ज्यादा अच्छे ढंग से खड़ा दिखाई देता है। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने राम मंदिर का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 9 नवंबर को श्री रामजन्मभूमि प्रकरण में अपना असंदिग्ध निर्णय देकर इतिहास बनाया। देश की जनता ने इस निर्णय को संयम और समझदारी का परिचय देकर स्वीकार किया। यही इस देश की असल ताकत है, जिसे कई लोग देखना नहीं चाहते। उन्होंने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) पर भी बात की। भागवत ने कहा कि सीएए के खिलाफ देश में गलत प्रचार किया गया। सीएए को एक खास तबके के खिलाफ बताया गया। यह कानून किसी की नागरिकता नहीं लेता। यह कानून पड़ोसी देशों के पीड़ित अल्पसंख्यकों को भारत में शरण देने के लिए बनाया गया है।















