उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। मुरादनगर पुलिस ने हिमालय कंपनी की लोकप्रिय दवा लिव-52 के नाम से नकली टैबलेट बनाकर बाजार में सप्लाई करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 50 हजार नकली टैबलेट, 500 रैपर, 1200 ढक्कन व डिब्बियां तथा एक वैगनआर कार बरामद की है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मयंक निवासी तिबड़ा रोड बाग कॉलोनी मोदीनगर, नितिन त्यागी निवासी निवाड़ी, अनूप गर्ग निवासी बिंदापुर उत्तम नगर दिल्ली, तुषार ठाकुर निवासी घूकना नंदग्राम तथा आकाश ठाकुर निवासी दीवान फार्म हिंडन विहार नंदग्राम के रूप में हुई है। डीसीपी ग्रामीण सुरेंद्र नाथ तिवारी ने बताया कि हिमालय कंपनी के प्रतिनिधियों को अलीगढ़ में बाजार में फर्जी लिव-52 टैबलेट बिकने की सूचना मिली थी। जांच में सामने आया कि यह माल मुरादनगर से कोरियर के माध्यम से भेजा जा रहा था।
कोरियर एजेंसी से पूछताछ के बाद पता चला कि जोनी निवासी जलालाबाद थाना मुरादनगर के नाम से एक फर्म ट्रेडिंग के लिए पंजीकृत कराई गई थी, जिसके माध्यम से दवाएं भेजी जा रही थीं। इसके बाद पुलिस ने मामले की गहन जांच करते हुए एक-एक कर सभी आरोपियों की भूमिका उजागर की और गिरफ्तारी की। डीसीपी ने बताया कि नितिन त्यागी का मोदीनगर में मेडिकल स्टोर है, जिसके चलते उसकी पहचान तिबड़ा रोड निवासी मयंक अग्रवाल से हुई, जो पहले एमआर रह चुका है। अनूप गर्ग मयंक का रिश्तेदार है और पहले आकाश ठाकुर के साथ इलेक्ट्रीशियन का काम कर चुका था, लेकिन लंबे समय से बेरोजगार था। नितिन त्यागी की राजनीतिक सक्रियता के चलते उसने अन्य आरोपियों को अपने प्रभाव में लिया। तुषार ठाकुर गाजियाबाद के मेडिकल कॉलेज से पैरामेडिकल की पढ़ाई कर रहा है, इसलिए उसे दवाओं और उनकी संरचना की अच्छी जानकारी थी।
नकली दवा बनाने में उसकी भूमिका अहम बताई जा रही है। दवा तैयार होने के बाद उसे कोरियर के माध्यम से विभिन्न जिलों में भेजने की जिम्मेदारी आकाश ठाकुर की थी। पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने लिवर से जुड़ी दवा इसलिए चुनी, क्योंकि इसके सेवन से न तो तुरंत कोई लाभ दिखता है और न ही तत्काल नुकसान, जिससे उपभोक्ता को संदेह न हो। इस पूरी साजिश की योजना मयंक और नितिन ने मिलकर तैयार की थी। बरामद टैबलेट के सैंपल जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिए गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि इन दवाओं का मानव शरीर पर कितना गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि वे अलीगढ़ के अलावा मथुरा, बिजनौर, आगरा, मेरठ और शामली समेत कई जिलों में नकली दवाओं की सप्लाई कर चुके हैं। आरोपी बाजार मूल्य से करीब 20 प्रतिशत कम दाम पर मेडिकल स्टोर संचालकों को माल देते थे, ताकि अधिक मुनाफे के लालच में वे इसे खरीद लें। डीसीपी ने बताया कि इस मामले में जिन मेडिकल स्टोर संचालकों ने यह दवाएं खरीदीं और जिस कंपनी में नकली दवाएं तैयार की जा रही थीं, उनकी भूमिका की भी जांच की जा रही है। जल्द ही अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी।















