अब आरएलपी के तेवर गरम, छोड़ा एनडीए का साथ

कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के साथ का ऐलान

नई दिल्ली। नए कृषि कानूनों के खिलाफ अब राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) ने बागी तेवर अपना लिए हैं। आरएलपीए ने एनडीए का साथ छोड़ने का ऐलान कर दिया है। इसके पहले अकाली दल ने एनडीए को अलविदा कर दिया था। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के राष्ट्रीय संयोजक हनुमान बेनीवाल ने शनिवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वह एनडीए छोड़ने की घोषणा कर रहे हैं। इससे पहले कृषि कानूनों के विरोध में अकाली दल भी एनडीए छोड़ चुकी है। आरएलपी नेता बेनीवाल ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार के पास 303 सांसद हैं। नतीजन वह कृषि कानूनों को वापस नहीं ले रही है। सरकार को कृषि कानूनों को वापस लेना चाहिए। यह किसान हित में होगा। बेनीवाल ने मोदी सरकार की जमकर आलोचना की। उधर, आंदोलनरत किसानों ने केंद्र सरकार की वार्ता की पेशकश को स्वीकार कर लिया है। किसानों ने 29 दिसम्बर को वार्ता करने की इच्छा जाहिर की है। दिल्ली के विज्ञान भवन में सुबह 11 बजे यह वार्ता होगी। कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले 31 दिनों से आंदोलनरत किसानों ने आज सिंघु बॉर्डर पर बैठक की। बैठक में 40 किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस दौरान सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए बातचीत के प्रस्ताव पर चर्चा हुई। बैठक में किसानों ने सरकार से वार्ता की इच्छा जाहिर की। आंदोनकारी 40 किसान संगठनों के मुख्य संगठन संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में यह फैसला किया गया। किसान नेताओं ने पत्रकार वार्ता में इसकी घोषणा की। स्वराज इंडिया के नेता योगेंद्र यादव ने बताया कि हम केंद्र सरकार के साथ 29 दिसंबर को एक और दौर की बातचीत का प्रस्ताव रखते हैं। बातचीत के एजेंडे में पहले 2 बिंदु हैं। तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का तरीका और दूसरा बिंदु यह कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को कानूनी गारंटी देने के लिए कानून लाना।