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बिहार चुनाव से पहले लखनऊ आबकारी विभाग का कड़ा पहरा
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करुणेन्द्र सिंह की सख्ती से तस्करों की सांसें थमीं, तस्कर समेत 10 लाख की शराब बरामद
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24 घंटे की निगरानी से नाकाम हुई तस्करों की साजिश
उदय भूमि संवाददाता
लखनऊ। बिहार में विधानसभा का चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे शराब माफियाओं की सक्रियता भी तेजी से बढऩे लगी है। बिहार में शराबबंदी लागू होने के कारण तस्कर यूपी, हरियाणा और चंडीगढ़ से शराब की तस्करी कर बड़ी कमाई करने की फिराक में रहते हैं। लेकिन इस बार उनकी यह साजि़श लखनऊ जिले के आबकारी विभाग की पैनी नजर और सख्त कार्यशैली के आगे धराशायी हो रही है। जिला आबकारी अधिकारी करुणेन्द्र सिंह की अगुवाई में मंगलवार तड़के आबकारी निरीक्षक अखिल गुप्ता, प्रदीप भारती, अखिलेश कुमार और विजय की संयुक्त टीम पारा थाना क्षेत्र में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर चेकिंग कर रही थी। तभी मुखबिर से सूचना मिली कि बदायूं नंबर की एक महिंद्रा पिकअप गाड़ी में चंडीगढ़ की शराब भरकर बिहार भेजी जा रही है। सूचना मिलते ही टीम ने बैरिकेडिंग कर वाहनों की चेकिंग तेज़ कर दी। तभी संदिग्ध गाड़ी नज़र आई जिसे रुकने का इशारा किया गया। मगर चालक ने भागने का प्रयास किया। टीम ने घेराबंदी कर गाड़ी को रोक लिया और तस्कर को दबोच लिया।
जब गाड़ी की तलाशी ली गई तो ऊपर से तिरपाल डालकर उस पर सब्जियों के खाली क्रेट रखे गए थे। लेकिन जैसे ही क्रेट हटाए गए तो नीचे से 100 पेटियां चंडीगढ़ मार्का शराब और एक कुख्यात तस्कर को दबोच लिया। यह घटना आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे की है, जहां सब्जी की आड़ में चंडीगढ़ मार्का शराब की 100 पेटियां बिहार भेजी जा रही थीं। बिहार में शराबबंदी के कारण चुनावी सीजन में अवैध शराब की डिमांड अचानक बढ़ जाती है। सूत्र बताते हैं कि राजनीतिक फायदे के लिए कई बार तस्कर सक्रिय हो जाते हैं और हजारों पेटियां बिहार पहुंचाई जाती हैं। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों से लेकर लखनऊ जैसे बड़े शहरों तक आबकारी विभाग ने अपने अभियान को तेज कर दिया है। आबकारी अधिकारी करुणेन्द्र सिंह का कहना है कि बिहार चुनाव के मद्देनजर विभाग पहले से ही अलर्ट मोड में है। 24 घंटे निगरानी और मुखबिर तंत्र की मजबूती ने तस्करों की हर योजना को नाकाम कर दिया है। गिरफ्तार किए गए तस्कर शरवन कुमार ने पुलिस को बताया कि वह पिकअप गाड़ी में नीचे शराब की पेटियां रखकर उसके ऊपर खाली सब्जी के क्रेट जमाता था और फिर ऊपर से तिरपाल डालकर उसे सामान्य मालवाहक की तरह दिखाता था।
यह तरीका कई बार सफल हुआ, लेकिन इस बार आबकारी विभाग की पैनी नज़र और चेकिंग अभियान ने उसे रंगे हाथ पकड़ लिया। जब गाड़ी की तलाशी ली गई तो उसमें से 29 पेटी 750 एमएल, 35 पेटी 375 एमएल और 36 पेटी 180 एमएल की बोतलें बरामद हुईं। इनकी कुल कीमत लगभग 10 लाख रुपये आंकी गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आबकारी विभाग की ऐसी मुस्तैदी से न सिर्फ माफियाओं पर लगाम लग रही है बल्कि आम जनता का भी भरोसा बढ़ रहा है। अब लोग खुलकर शिकायत दर्ज करा रहे हैं क्योंकि उन्हें भरोसा है कि विभाग कार्रवाई करेगा। आबकारी विभाग की हालिया उपलब्धियां कहीं न कहीं जिला आबकारी अधिकारी करुणेन्द्र सिंह की सख्ती और कार्यशैली की देन हैं। वे खुद लगातार टीमों के साथ जुड़े रहते हैं, हर ऑपरेशन की निगरानी करते हैं और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हैं कि किसी भी कीमत पर तस्करी बर्दाश्त न की जाए।
उन्होंने साफ कहा है कि जब तक मैं इस पद पर हूं, जिले में शराब माफियाओं की दाल नहीं गलने दूंगा। हमारी प्राथमिकता सिर्फ और सिर्फ कानून व्यवस्था को सख्ती से लागू करना है। जिला आबकारी अधिकारी करुणेन्द्र सिंह ने कहा कि हमने साफ कर दिया है कि जिले की सीमा से एक भी बोतल अवैध शराब बिहार नहीं पहुंच पाएगी। आबकारी विभाग की टीमें दिन-रात सड़कों, चौराहों और राजमार्गों पर चौकसी कर रही हैं। मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया गया है और हर सूचना पर तुरंत कार्रवाई की जा रही है। तस्करों की चाहे कितनी भी चालाकी क्यों न हो, हम उससे एक कदम आगे रहकर काम कर रहे हैं। मेरी टीम ने जिस मुस्तैदी से 10 लाख की शराब की खेप पकड़ी है, वह साबित करता है कि शराब माफियाओं की दाल अब लखनऊ में नहीं गलने वाली। जब तक मैं इस पद पर हूँ, अवैध शराब के कारोबार को जिले में पनपने नहीं दूँगा।
आबकारी विभाग की रणनीति: 24 घंटे की चौकसी
जिला आबकारी अधिकारी करुणेन्द्र सिंह ने बताया कि उनकी टीम तीन शिफ्टों में काम कर रही है ताकि किसी भी समय तस्करों को मौका न मिले। सड़क, हाईवे और राष्ट्रीय राजमार्गों पर लगातार गाडिय़ों की चेकिंग की जा रही है। उन्होंने कहा, हमारा लक्ष्य साफ है उत्तर प्रदेश से होकर बिहार में एक भी बोतल अवैध शराब न जा सके। चाहे माफिया कितने भी हथकंडे अपनाएं, हमारी टीमें उनसे एक कदम आगे रहेंगी।
मुखबिर तंत्र बना गेम चेंजर
आबकारी विभाग ने अपने मुखबिर तंत्र को भी पूरी तरह सक्रिय कर दिया है। हाल ही में मिले कई इनपुट्स ने बड़ी खेप पकडऩे में अहम भूमिका निभाई है। करुणेन्द्र सिंह की कार्यशैली यही है कि हर छोटी से छोटी सूचना को गंभीरता से लिया जाए और तुरंत कार्रवाई की जाए। यही कारण है कि जिले में शराब माफियाओं की जड़ें अब हिलने लगी हैं। यह कार्रवाई केवल शुरुआत है। आबकारी विभाग ने साफ कर दिया है कि आगामी चुनाव तक और उसके बाद भी अवैध शराब के खिलाफ लगातार अभियान चलेगा। सड़कों से लेकर गोदामों तक, हर जगह पर छापेमारी होगी और माफियाओं की हर चाल नाकाम की जाएगी।
बिहार चुनाव पर सीधा असर
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर लखनऊ और आसपास के जिलों में ऐसी सख्ती बनी रही तो बिहार चुनाव में शराब की सप्लाई पर लगाम लगेगी। शराबबंदी वाले राज्य में यह तस्करी सिर्फ कानून तोडऩे तक सीमित नहीं रहती, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव भी डालती है। यही कारण है कि आबकारी विभाग ने इसे अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बना रखा है।
शराब माफियाओं में दहशत
लखनऊ में लगातार हो रही कार्रवाई ने शराब माफियाओं को बैकफुट पर ला दिया है। हाल ही में गिरफ्तार हुए तस्कर ने खुलासा किया कि हर चक्कर पर उसे पचास हजार रुपये गाड़ी के किराए से अलग मिलते थे। इससे अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि शराब तस्करी का यह धंधा कितना बड़ा है और इसमें कितने लोग जुड़े हैं। लेकिन आबकारी विभाग की लगातार छापेमारी और चेकिंग ने उनके नेटवर्क को कमजोर कर दिया है।
















