बरसात में भी नहीं डिगा नगर निगम का दम, जलभराव पर दिखाया फुल कंट्रोल

-नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक के नेतृत्व में सभी विभाग रहे अलर्ट
-20 प्रमुख जलभराव स्थलों पर की गई त्वरित जल निकासी, धिकारियों की सतत निगरानी से मिली सफलता

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। जिले मेंं मंगलवार को हुई मूसलधार बारिश के दौरान नगर निगम ने प्रभावशाली कार्यप्रणाली का परिचय देते हुए शहर की व्यवस्था को डगमगाने नहीं दिया। नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक के मार्गदर्शन और निगरानी में नगर निगम, जलकल, स्वास्थ्य एवं उद्यान विभाग की संयुक्त टीमों ने बेहतरीन तालमेल के साथ कार्य करते हुए जलभराव की आशंका वाले क्षेत्रों में त्वरित जल निकासी कराई। बारिश से पहले ही नगर आयुक्त ने वॉकी-टॉकी व नियंत्रण कक्ष के माध्यम से सभी विभागों को अलर्ट रहने के निर्देश दे दिए थे। टीमों को संवेदनशील और जलभराव संभावित क्षेत्रों में तैनात कर दिया गया था। शहर के 52 जलभराव स्थलों में से 20 प्रमुख स्थानों पर विशेष सतर्कता बरती गई। यहां पंपसेट लगाकर जल निकासी की व्यवस्था की गई और वरिष्ठ अधिकारी स्वयं मौके पर रहकर मॉनिटरिंग करते रहे।

मोहन नगर जोन में पसोंडा, अप्सरा बॉर्डर, विजयनगर अंडरपास, नेहरू नगर, घंटाघर, नवयुग मार्केट, कविनगर के डायमंड फ्लाईओवर, यूपी गेट, राजनगर एक्सटेंशन, साहिबाबाद अंडरपास सहित कई क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति से निपटने में कोई ढिलाई नहीं बरती गई। पांचों जोनों में जलनिकासी व नाला सफाई निरंतर जारी रही। उद्यान विभाग को पेड़ों की गिरावट से उत्पन्न बाधाओं के समाधान के लिए तैयार रखा गया। इंग्रॅहम स्कूल के बाहर गिरे पेड़ को समय रहते हटाकर यातायात को सामान्य किया गया। वहीं, स्वास्थ्य विभाग ने पोकलेन, जेसीबी, सफाई मशीनों की मदद से नालों की सफाई कर जल प्रवाह को अवरुद्ध नहीं होने दिया।

अपर नगर आयुक्त अवनींद्र कुमार ने बताया कि नगर आयुक्त के निर्देशों के तहत सभी विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों ने मोर्चा संभाले रखा। न सिर्फ बारिश के दौरान बल्कि पूर्व से ही की गई तैयारियों का नतीजा रहा कि गाजियाबाद जैसे व्यस्त शहर में जलभराव जैसी स्थिति उत्पन्न नहीं हुई। महापौर सुनीता दयाल और नगर आयुक्त मलिक के नेतृत्व में नगर निगम ने एक आपातकालीन परिस्थिति में अपनी क्षमता और प्रतिबद्धता का परिचय दिया। मानसून के पहले नालों की सफाई, उपकरणों की उपलब्धता और विभागीय तालमेल ने यह सिद्ध किया कि पूर्व नियोजन और तत्परता से किसी भी आपदा को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है।