-आपदा में दिवंगत आत्माओं की शांति हेतु हो रही श्रीविष्णु कथा के पंचम दिवस पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
-कथा व्यास आचार्य स्वयंवर सेमवाल ने सुनाई भगवान के अवतारों की अमृतमयी कथा
उदय भूमि संवाददाता
रुद्रप्रयाग। पवित्र श्री केदारनाथ धाम, जहां भगवान शिव स्वयं विराजते हैं, आज वहां भक्तिरस का अनुपम संगम देखने को मिला। वर्ष 2013 की विनाशकारी आपदा में कालकवलित पुण्य आत्माओं की शांति हेतु चल रही श्रीमद्भागवत कथा में मंगलवार को कथा का पंचम दिवस रहा। इस अवसर पर कथा व्यास आचार्य स्वयंवर सेमवाल जी ने श्रीहरि विष्णु के विभिन्न अवतारों की कथा सुनाते हुए जैसे ही श्रीकृष्ण जन्म का प्रसंग आरंभ किया, सम्पूर्ण तीर्थक्षेत्र भक्ति, भाव और उल्लास से सराबोर हो उठा। प्रात: विधिवत पंच पूजा और वैदिक आह्वान के साथ दिन की शुरुआत हुई। दोपहर एक बजे से आरंभ हुई कथा में व्यासपीठ से आचार्य स्वयंवर सेमवाल ने कच्छप अवतार, मोहीनी अवतार, राम अवतार, और अंतत: श्रीकृष्ण जन्म की दिव्य गाथा का श्रवण कराया। जैसे ही गोकुल की गलियों की कल्पना कथा में उतरी, और श्रीकृष्ण के जन्म की जीवंत झांकी मंच पर साकार हुई, भक्तों की आंखें नम हो गईं। कथा स्थल ‘जय कन्हैया लाल की’ और ‘नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ जैसे जयकारों से गूंज उठा।
कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, अपितु आध्यात्मिक चेतना और आत्मिक शांति का केंद्र बन गई। श्रद्धालुजन मंत्रमुग्ध होकर कथा का श्रवण करते रहे। भक्ति में रमा वातावरण, मंद बहती हवा और भगवान श्रीकृष्ण के रूप की झांकी, सब कुछ मानो समय को थामे खड़ा था। कथा व्यास आचार्य स्वयंवर सेमवाल ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म केवल पृथ्वी पर धर्म की पुन: स्थापना के लिए नहीं हुआ, बल्कि यह संदेश देने के लिए भी था कि हर अंधकार में जन्म ले सकता है प्रकाश। हम सभी को श्रीकृष्ण की तरह अपने जीवन में प्रेम, करुणा, साहस और विवेक का संचार करना चाहिए। इस पावन धाम में कथा करना स्वयं एक तप के समान है और यह पुण्य आत्माओं को समर्पित है जो उस भीषण आपदा में स्वर्गवासी हो गए। श्री केदार सभा अध्यक्ष पं. राजकुमार तिवारी ने बताय कि श्री केदारनाथ धाम में आयोजित यह दिव्य कथा न केवल श्रद्धालुओं को भगवान के अवतारों की महिमा से जोड़ रही है, बल्कि समाज को फिर से धर्म, सेवा और संवेदना के सूत्र में पिरो रही है। इस आयोजन के माध्यम से हम उन दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं, जिन्होंने 2013 की आपदा में अपने प्राण गंवाए।
हम सभी के सहयोग से यह कथा जनचेतना का माध्यम बन रही है। इस धर्ममय आयोजन में उपस्थित श्री केदार सभा के अध्यक्ष पं. राजकुमार तिवारी, बद्री-केदार मंदिर समिति के सदस्य विनीत पोस्ती, मुख्य कार्याधिकारी विजय थपलियाल, उपाध्यक्ष विष्णु कान्त कुर्मांचली, महामंत्री राजेन्द्र प्रसाद तिवारी, कोषाध्यक्ष प्रवीण चंद्र तिवारी, मंत्री अंकित सेमवाल, मीडिया प्रभारी पं. पंकज शुक्ला, तेज प्रकाश त्रिवेदी, रोशन लाल जी सहित कई संत, तीर्थ पुरोहित, श्रद्धालु व सेवकगण उपस्थित रहे और उन्होंने इस आयोजन को अपनी उपस्थिति से गरिमा प्रदान की। श्री केदारनाथ धाम, जो सृष्टि के आरंभ और अंत का साक्षी रहा है, आज पुन: एक बार भक्ति, सेवा और श्रद्धा का अनूठा संगम बन गया है। आयोजकों ने बताया कि कथा का प्रत्येक दिन किसी न किसी दिव्य प्रसंग के साथ समर्पित है और श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे अधिकाधिक संख्या में पहुँचकर पुण्यलाभ प्राप्त करें। यह कथा केवल दिव्य गाथाओं का श्रवण नहीं, बल्कि मन, आत्मा और समाज को पुन: संयम, सेवा और श्रद्धा के पथ पर लाने का प्रयास है जो केदारधाम जैसे देवभूमि में ही संभव है।
















