“सुरक्षा चक्र” से होगी आपदा प्रबंधन की असली परीक्षा: गाजियाबाद तैयार

• तीन राज्यों में एक साथ मॉक ड्रिल, गाजियाबाद और नोएडा बने उत्तर प्रदेश के केंद्रबिंदु
• आपदा में दिखे सिर्फ रिएक्शन नहीं, एक्शन भी:  योगेन्द्र डिमरी
• भूकंप, रासायनिक आपदा से निपटने के लिए पांच स्थानों पर अलग-अलग आपात परिदृश्य होंगे तैयार
• यह ड्रिल नहीं, जिम्मेदारी है गाजियाबाद को बनना होगा रोल मॉडल: दीपक मीणा

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। भूकंप और रासायनिक आपदा जैसी आपात परिस्थितियों से निपटने के लिए एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी कदम बढ़ाया है। उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के तत्वावधान में शनिवार को विकास भवन स्थित दुर्गावती सभागार में “सुरक्षा चक्र” नामक मॉक एक्सरसाइज की पूर्व तैयारी हेतु एक अहम बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के माननीय उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) योगेन्द्र डिमरी (पीवीएसएम, एवीएसएम, वीएसएम) ने की, जो देश की रक्षा और रणनीतिक समझ में एक लंबा अनुभव रखते हैं। इस बैठक में गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर उत्तर प्रदेश के दो नामित जनपदों की तैयारियों की गहन समीक्षा की गई। गौरतलब है कि एक अगस्त को उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा जैसे तीन महत्वपूर्ण राज्यों में एक साथ यह मॉक ड्रिल आयोजित की जानी है। इसी के अंतर्गत गाजियाबाद और नोएडा को उत्तर प्रदेश में प्रमुख अभ्यास स्थलों के रूप में चुना गया है। बैठक की शुरुआत में जिलाधिकारी दीपक मीणा ने उपाध्यक्ष का स्वागत प्रतीक चिन्ह और पौधा भेंट कर किया। इस अवसर पर कारगिल विजय दिवस के सन्दर्भ में शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए दो मिनट का मौन भी रखा गया। इसके पश्चात श्री डिमरी को गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया, जो इस बैठक के औपचारिक आरंभ का प्रतीक बना।

बैठक में उपाध्यक्ष डिमरी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आपदा का समय घबराने का नहीं, बल्कि सूझबूझ, समन्वय और तेजी से प्रतिक्रिया देने का होता है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि कोई भी तैयारी सिर्फ कागज़ पर नहीं, ज़मीनी स्तर पर दिखाई देनी चाहिए। हर नोडल अधिकारी को स्थानीय एनजीओ, समाजसेवियों और “आपदा मित्रों” से समन्वय बनाकर चलना होगा, ताकि आपात स्थिति में मानवीय संसाधन की कमी न हो। उन्होंने जन-जागरूकता के लिए व्यापक प्रचार अभियान चलाने पर बल दिया और कहा कि सूचना तंत्र, मीडिया, सोशल प्लेटफॉर्म, बैनर-पोस्टर जैसी विधियों को सक्रिय रूप से उपयोग में लाया जाए। बैठक में प्रशासन की ओर से एडीएम (वित्त एवं राजस्व) सौरभ भट्ट ने जिले की मॉक एक्सरसाइज की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि गाजियाबाद में पांच स्थलों पर यह मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी  जिसमें एक शिक्षण संस्थान, एक आवासीय क्षेत्र, एक औद्योगिक प्रतिष्ठान, एक सरकारी अस्पताल और एक तहसील भवन शामिल हैं।

इन सभी स्थलों पर अलग-अलग आपदाओं की काल्पनिक स्थिति बनाई जाएगी, जिनसे निपटने के लिए विभागीय प्रतिक्रिया की समीक्षा की जाएगी। वहीं गौतमबुद्ध नगर की ओर से एडीएम (एफ/आर) अतुल कुमार ने अपने जनपद की तैयारियों का ब्यौरा प्रस्तुत किया। बैठक का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि इसमें किसी एक विभाग की नहीं, बल्कि समूचे प्रशासन की सहभागिता और समर्पण झलकता दिखाई दिया। पुलिस, दमकल, स्वास्थ्य, शिक्षा, नगर निगम, विद्युत, जल, परिवहन, आपूर्ति, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, एनसीसी, सिविल डिफेंस, होमगार्ड, सूचना विभाग सभी को विशिष्ट जिम्मेदारियाँ सौंपी गईं। सभी विभागों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया कि मॉक ड्रिल सिर्फ एक ‘अभ्यास’ न होकर एक जीवंत, प्रभावशाली और शिक्षाप्रद प्रक्रिया बने। बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि अभ्यास की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कितनी तेजी, समन्वय और संवेदनशीलता से विभाग एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करते हैं।

उपाध्यक्ष श्री डिमरी ने अधिकारियों को चेताया कि ड्रिल के दौरान कोई लापरवाही या कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी, और इस अवसर को एक प्रशिक्षण के रूप में लिया जाना चाहिए, न कि औपचारिकता के रूप में। कार्यक्रम के अंत में जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों से अपील की कि वे इस अभ्यास को गंभीरता से लें और अपने विभागों को मॉक ड्रिल के लिए पूरी तरह तैयार रखें। उन्होंने कहा कि गाजियाबाद को राज्य स्तर पर जो यह दायित्व सौंपा गया है, उसका सम्मान बनाए रखने के लिए हमें एक टीम के रूप में कार्य करना होगा। इस उच्चस्तरीय बैठक के माध्यम से यह स्पष्ट हो गया कि गाजियाबाद प्रशासन आपदा प्रबंधन को लेकर पूरी तरह सजग और तैयार है। सुरक्षा चक्र मॉक एक्सरसाइज न केवल एक अभ्यास होगी, बल्कि वह परीक्षा होगी जिसमें प्रशासन की तत्परता, नागरिकों की जागरूकता और संस्थागत समन्वय का मूल्यांकन होगा।