जंग का माहौल, दुनिया भर में हलचल-पर भारत है निडर: मोदी हैं तो हर मुश्किल का हल है!

लेखक : तरुण मिश्र
(समाजसेवी एवं राजनीतिक चिंतक हैं। राजनीतिक और सामाजिक विषयों पर लिखते हैं। देश-विदेश में आयोजित होने वाले व्याख्यानों में एक प्रखर वक्ता के रूप में जाने जाते हैं। जनसेवक के रुप में प्रख्यात है।)

आज का समय वैश्विक अस्थिरता और अनिश्चितताओं से भरा हुआ है। पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और युद्ध जैसी परिस्थितियों ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। ऐसे हालात केवल सीमित क्षेत्र तक ही नहीं रहते, बल्कि उनके प्रभाव वैश्विक स्तर पर दिखाई देते हैं-चाहे वह अर्थव्यवस्था हो, आपूर्ति श्रृंखला हो या आम जनजीवन। ऐसे समय में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि हम एक राष्ट्र और समाज के रूप में किस तरह प्रतिक्रिया दें। भारत ने इससे पहले भी एक बड़े संकट-कोरोना महामारी-का सामना किया है। उस कठिन दौर में देश ने जो एकजुटता दिखाई, वह पूरे विश्व के लिए एक उदाहरण बन गई। लोग एक-दूसरे के साथ खड़े रहे, जरूरतमंदों की मदद की और सरकार द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों का पालन किया। यही कारण था कि दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देशों में शामिल होने के बावजूद भारत में कोरोना के दौरान मृत्यु दर अपेक्षाकृत कम रही। यह केवल सरकारी प्रयासों का परिणाम नहीं था, बल्कि जनता के सहयोग, अनुशासन और विश्वास का भी प्रतीक था।

आज जब विश्व फिर से एक संभावित संकट की ओर बढ़ रहा है, तो हमें उसी एकजुटता और समझदारी की आवश्यकता है। युद्ध या तनाव की स्थिति में सबसे पहले जो चीज प्रभावित होती है, वह है लोगों का मनोबल। अफवाहें, डर और अनिश्चितता माहौल को और अधिक खराब कर देते हैं। ऐसे समय में जरूरी है कि हम संयम बनाए रखें और किसी भी प्रकार की कालाबाजारी या अनावश्यक भंडारण से बचें। अक्सर देखा गया है कि जैसे ही किसी संकट की खबर फैलती है, लोग आवश्यक वस्तुओं को जरूरत से ज्यादा खरीदने लगते हैं। इससे कृत्रिम कमी पैदा होती है, जो वास्तव में समस्या को और बढ़ा देती है। उदाहरण के तौर पर एलपीजी सिलेंडर को लेकर लोगों में घबराहट देखी जा रही है, जबकि वास्तविकता यह है कि देश में इसकी कोई कमी नहीं है। समस्या केवल वितरण और अचानक बढ़ी मांग की है। यदि लोग संयम रखें और जरूरत के अनुसार ही खरीदारी करें, तो ऐसी स्थिति से आसानी से निपटा जा सकता है।

इसी तरह पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर भी भ्रम की स्थिति पैदा की जा रही है। जबकि वास्तविकता यह है कि कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है, फिर भी कुछ ट्रांसपोर्टर किराए बढ़ा रहे हैं। यह न केवल अनुचित है, बल्कि आम जनता पर अतिरिक्त बोझ डालने वाला कदम भी है। ऐसे मामलों में सरकार को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि बाजार में अनुशासन बना रहे और लोगों का भरोसा कायम रहे। आज के डिजिटल युग में एक और बड़ी चुनौती है-सोशल मीडिया। यह एक ऐसा माध्यम है जो जानकारी को तेजी से फैलाता है, लेकिन इसके साथ ही गलत जानकारी भी उतनी ही तेजी से फैलती है। एआई आधारित फर्जी खबरें (फेब्रिकेटेड न्यूज) लोगों के बीच भ्रम और डर पैदा कर रही हैं। युद्ध से जुड़ी कई खबरें बिना पुष्टि के वायरल हो रही हैं, जिससे पैनिक की स्थिति बन रही है।

ऐसे में यह बेहद जरूरी है कि लोग सोशल मीडिया पर आने वाली हर खबर को सच मानकर प्रतिक्रिया न दें। किसी भी जानकारी की पुष्टि आधिकारिक स्रोतों से करना ही समझदारी है। साथ ही सरकार को भी इस दिशा में सतर्क रहकर फर्जी खबरों पर अंकुश लगाना होगा, ताकि समाज में अनावश्यक भय और अफवाहें न फैलें। भारत जैसे बड़े और मजबूत देश के लिए यह समय धैर्य और आत्मविश्वास का है। हमें यह समझना होगा कि हर संकट का समाधान घबराहट में नहीं, बल्कि संयम और सहयोग में होता है। कोरोना महामारी ने हमें सिखाया कि जब पूरा देश एक साथ खड़ा होता है, तो सबसे बड़ी चुनौती को भी पार किया जा सकता है।

युद्ध जैसी परिस्थितियां निश्चित रूप से गंभीर होती हैं, लेकिन यह कोई निश्चित विनाश का संकेत नहीं होतीं। इतिहास गवाह है कि देश और समाज हर संकट से उबरते हैं, बशर्ते वे धैर्य और एकता बनाए रखें। हमें यह याद रखना चाहिए कि कोरोना जैसी महामारी, जिसे कई लोग “मौत की गारंटी” मानते थे, उससे भी हम बाहर निकल आए। ऐसे में वर्तमान परिस्थितियां भी स्थायी नहीं हैं। इस समय सबसे ज्यादा जरूरत है—विश्वास की। विश्वास अपने देश पर, अपनी सरकार पर और अपने समाज पर। जब हम एक-दूसरे का सहारा बनते हैं, तो कोई भी संकट बड़ा नहीं रहता। जरूरतमंद की मदद करना, संसाधनों का सही उपयोग करना और नियमों का पालन करना-यही असली देशभक्ति है। “मोदी हैं तो मुमकिन है” केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक विश्वास है, जो पिछले वर्षों में कई बार साबित हुआ है। लेकिन इस विश्वास को मजबूत बनाने की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं, बल्कि हर नागरिक की भी है। जब जनता और सरकार साथ मिलकर काम करते हैं, तभी कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। अंततः, यह समय घबराने का नहीं, बल्कि समझदारी से काम लेने का है। हमें अफवाहों से दूर रहकर, संयम और सहयोग के साथ आगे बढ़ना होगा। यही वह रास्ता है, जो हमें हर संकट से सुरक्षित बाहर निकाल सकता है।