विकास कार्यों में न गुणवत्ता से समझौता होगा, न समयसीमा से: जिलाधिकारी

-विकास की रफ्तार पर डीएम की सख्त नजर, निकायों को समयबद्ध और पारदर्शी कार्य के निर्देश
-महात्मा गांधी सभागार में हुई समीक्षा, सभी नगर निकायों के अधिकारियों ने रखा प्रगति विवरण
-पेयजल, सड़क, स्वच्छता, पार्क विकास सहित जनहित योजनाओं पर विस्तृत चर्चा
-मच्छरजनित रोगों की रोकथाम व एबीसी सेंटर स्थापना को प्राथमिकता देने के निर्देश
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। कलेक्ट्रेट स्थित महात्मा गांधी सभागार में बुधवार को जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मॉंदड़ की अध्यक्षता में जनपद के नगरीय निकायों द्वारा संचालित विकास योजनाओं एवं वित्तीय प्रगति की विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में नगर पालिका परिषद लोनी, मोदीनगर, खोड़ा-मकनपुर, मुरादनगर तथा नगर पंचायत डासना, फरीदनगर, पतला एवं निवाड़ी के अधिशासी अधिकारी एवं अध्यक्षगण उपस्थित रहे। बैठक के दौरान सभी निकायों द्वारा अपने-अपने क्षेत्रों में प्रस्तावित एवं प्रगति पर चल रहे विकास कार्यों का प्रस्तुतीकरण किया गया। प्रस्तुत योजनाओं में पेयजल आपूर्ति सुदृढ़ीकरण, सड़क निर्माण एवं मरम्मत, जल संरक्षण, विद्युत एवं प्रकाश व्यवस्था का विस्तार, शैक्षिक संस्थानों का निर्माण एवं सौंदर्यीकरण, कस्तूरबा गांधी विद्यालय सहित अन्य विद्यालयों में आवश्यक निर्माण कार्य, पार्कों का विकास, सामुदायिक शौचालय निर्माण, कूड़ा निस्तारण प्रणाली को सुदृढ़ करना, नालों का निर्माण तथा स्वच्छता व्यवस्था में सुधार जैसे महत्वपूर्ण जनहितकारी कार्य शामिल रहे।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि विकास कार्यों में गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन हो और आमजन को अधिकतम लाभ प्राप्त हो। आगामी समय में मच्छरों के बढ़ते प्रकोप एवं संक्रामक रोगों की आशंका को देखते हुए जिलाधिकारी ने सभी निकायों को आवश्यक एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन निकायों के पास फॉगिंग मशीन अथवा अन्य जरूरी उपकरण उपलब्ध नहीं हैं, वे तत्काल उनके क्रय हेतु प्रस्ताव प्रस्तुत करें, ताकि समय रहते प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
इसके अतिरिक्त, जिन क्षेत्रों में एबीसी (एनिमल बर्थ कंट्रोल) सेंटर की आवश्यकता है, वहां प्राथमिकता के आधार पर प्रस्ताव तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए, जिससे आवारा पशुओं की समस्या का स्थायी समाधान किया जा सके। बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने कहा कि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें और विकास कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करें, ताकि जनपद में योजनाओं का लाभ प्रभावी ढंग से धरातल पर दिखाई दे।