-14 वर्षीय छात्र ने अपनी बुद्धिमानी और धैर्य से बड़े खिलाडिय़ों को पछाड़ा, खेल और अनुशासन का परिचय दिया
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। उम्र भले ही कम हो, लेकिन सपने और जज्बा बड़े हों तो हर मुश्किल को पार किया जा सकता है। यह साबित किया है डीपीएस पब्लिक स्कूल, मेरठ रोड के कक्षा 9 के छात्र अक्षित शर्मा ने। मात्र 14 वर्ष की उम्र में अक्षित ने अपनी सोच, रणनीति और दृढ़ संकल्प के बल पर इंटर स्कूल चेस प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन किया। रविवार को वसुंधरा सेक्टर-11 के विद्या बाल भवन पब्लिक स्कूल में आयोजित इंटर स्कूल बॉयज़ एंड गर्ल्स चेस चैम्पियनशिप-2025 में अक्षित ने अंडर-17 वर्ग में हिस्सा लेकर सबको चौंका दिया। इस प्रतियोगिता में अंडर-9, 13, 15 और 17 के वर्गों में कुल 78 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। अक्षित ने अपनी उम्र से बड़े और अनुभवी खिलाडिय़ों के बीच अपनी बुद्धिमानी और शांत चित्त खेल का परिचय देते हुए दूसरा स्थान हासिल किया। यह पहली बार नहीं है जब अक्षित ने अपने से बड़े विरोधियों को चुनौती दी हो। इससे पहले भी वह कई जिला और राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में पदक जीत चुके हैं। हर मुकाबले में उनकी शतरंज की सूझबूझ, रणनीति और एकाग्रता ने विरोधियों को पीछे छोड़ दिया। डीपीएस पब्लिक स्कूल के प्रधानाचार्य और शिक्षक अक्षित की उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहे हैं और इसे अन्य छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत बता रहे हैं।
अक्षित की सफलता के पीछे उनका परिवार भी एक अहम स्तंभ रहा है। उनकी मां प्रीति शर्मा ने उन्हें अनुशासन, धैर्य और निरंतर अभ्यास का महत्व सिखाया। वहीं पिता मनोज शर्मा ने हर चुनौती को अवसर में बदलने की प्रेरणा दी। माता-पिता का यह सहयोग अक्षित को संतुलन, आत्मविश्वास और मानसिक मजबूती प्रदान करता है, जो शतरंज की हर चाल में दिखाई देता है। अक्षित शर्मा ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि शतरंज मेरे लिए सिर्फ खेल नहीं, बल्कि सोचने का तरीका है। यह सिखाता है कि हर कदम सोच-समझकर उठाना चाहिए और मुश्किल स्थिति में भी धैर्य नहीं खोना चाहिए। उनके इस दृष्टिकोण ने उन्हें न केवल स्कूल और जिले में बल्कि अब पूरे गाजियाबाद के खेल जगत में ‘मास्टर माइंड’ के रूप में स्थापित कर दिया है।
आने वाले समय में अक्षित का लक्ष्य राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर भारत का नाम रोशन करना है। उनका मानना है कि लगातार अभ्यास, एकाग्रता और आत्मविश्वास ही सफलता की असली कुंजी हैं। डीपीएस पब्लिक स्कूल के शिक्षक और प्रबंधन आश्वस्त हैं कि अक्षित शर्मा की मेहनत और समर्पण उन्हें राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर गाजियाबाद का नाम रोशन कराने में मदद करेगा। अक्षित की यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार और स्कूल के लिए गर्व का विषय है, बल्कि जिले के युवा खिलाडिय़ों के लिए भी प्रेरणा बन रही है। उनकी जीत यह साबित करती है कि छोटी उम्र में भी बड़ा जज्बा और सही दिशा में मेहनत हर बाधा को पार कर सकती है।
माता प्रीति शर्मा ने कहा कि मैं हमेशा अक्षित को पढ़ाई और खेल दोनों में अनुशासन, धैर्य और नियमित अभ्यास की आदत डालने की प्रेरणा देती रही हूं। उसकी मेहनत और समर्पण देखकर मुझे गर्व है। शतरंज ने उसे सोचने और निर्णय लेने की क्षमता सिखाई है। मैं चाहती हूं कि वह हर खेल और जीवन में संतुलित और धैर्यपूर्ण बने। वहीं पिता मनोज शर्मा ने बताया कि मैं हमेशा अक्षित को यही सिखाता हूं कि जीवन की हर चुनौती को अवसर के रूप में लें और हिम्मत न छोड़ें। शतरंज की बिसात पर भी धैर्य और साहस के साथ खेलना जरूरी है। हमें खुशी है कि अक्षित ने अपनी सोच, रणनीति और जज्बे से यह साबित कर दिया कि उम्र बड़ी बाधा नहीं होती। मैं चाहूंगा कि वह आने वाले समय में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गाजियाबाद का नाम रोशन करे।

















