अवैध रूप से लिंग परीक्षण करने वाले गिरोह का भंडाफोड़

-एक अभियुक्त गिरफ्तार, साथी पोर्टेबल अल्टासाउंड मशीन लेकर हुआ फरार

गाजियाबाद। हरियाणा के गुरूग्राम जनपद और गाजियाबाद की पीसीपीएनडीटी (गर्भ धारण एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक विनियमय तथा दुरुपयोग) टीम ने मंगलवार को इंद्रप्रस्थ आवासीय योजना के ईडब्ल्यूएस फ्लैट नंबर 564 में अवैध रूप से संचालित पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन से गर्भ में पल रहे भ्रूण का लिंग परीक्षण करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। पीसीपीएनडीटी टीमों ने मौके से दिल्ली के नगलू राया निवासी कुलदीप पुत्र राजसिंह को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। उसका साथी कपिल, जो पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन लेकर आया था, मोटरसाइकिल से मशीन लेकर भाग गया। गाजियाबाद पीसीपीएनडीटी टीम के नोडल अधिकारी एसीएमओ डा. सुनील त्यागी ने मौके से ही मुख्य विकास अधिकारी अस्मिता लाल और मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. एनके गुप्ता व उप जिला अधिकारी लोनी को सूचित किया और थाना टीला मोड़ में एफआईआर दर्ज करा दी गई है। बता दें कि जिलाधिकारी गाजियाबाद ने फरवरी, 2021 में हरियाणा के स्टेट नोडल अधिकारियों के साथ समन्वय बैठक कर लिंगानुपात बढ़ाने के संबंध में चर्चा की थी और वर्तमान लिंगानुपात को 913 से बढ़ाकर 950 तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया था। इसके लिए सबसे पहली जरूरत भ्रूण हत्या पर रोक लगाना है। इसके लिए जरूरी है कि पीसीपीएनडीटी के साथ खिलवाड़ कर अवैध रूप से अल्ट्रासाउंड के जरिए गर्भ में पल रहे लिंग की पहचान करने वाले गिरोहों की धरपकड़ की जाए। जिलाधिकारी ने ऐसे गिरोहों की धरपकड़ के लिए जिला स्तर पर एक सचल दस्ते का गठन किया था। दस्ते में एक मजिस्ट्रेट, दो चिकित्सक और एक पुलिस अधिकारी शामिल है। इसके साथ ही जिलाधिकारी की ओर से इंटर स्टेट समन्वय के लिए मुख्य विकास अधिकारी नामित प्रतिनिधि हैं।
परीक्षण पर पांच साल तक की सजा का प्रावधान :
एसीएमओ डा. सुनील त्यागी ने बताया पीसीपीएनडीटी अधिनियम-1994 भारत में कन्या भ्रूण हत्या और गिरते लिंगानुपात को रोकने के लिए भारत की संसद द्वारा पारित एक संघीय कानून है। इस अधिनियम के जरिए प्रसव पूर्व लिंग निर्धारण कानूनी अपराध है। प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्नीक एक्ट-1996 के तहत जन्म से पूर्व शिशु के लिंग की जांच पर पाबंदी है। ऐसे में अल्ट्रासाउंड या अल्ट्रासोनोग्राफी कराने वाले जोड़े, या करने वाले चिकित्सक, लैब कर्मी को तीन से पांच साल की सजा और 10,000 से 50,000 रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।