वायु प्रदूषण नियंत्रण को ग्रैप-1 में सख्त कदम उठाए अधिकारी: इन्द्र विक्रम सिंह

गंगा समिति की बैठक में डीएम ने आपसी समन्वय बनाकर प्लान बनाने के दिए निर्देश

गाजियाबाद। जनपद में डिस्ट्रिक्ट गंगा प्लान बनाने के लिए विभाग आपसी समन्वय करते हुए इस प्लान को बनाएं। इसके साथ वायु प्रदूषण के प्रभावी नियंत्रण को लेकर ग्रैप1 के तहत अधिकारी प्रभावी तरीके से कदम उठाएं। सोमवार को कलेक्ट्रेट स्थित सभागार में जिलाधिकारी इन्द्र विक्रम सिंह ने अधिकारियों के साथ बैठक करते हुए गंगा समिति की बैठक में यह दिशा-निर्देश दिए। जिलाधिकारी इन्द्र विक्रम सिंह ने प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी ईशा तिवारी, प्रोजेक्ट एसोसिएट सिमरन यादव, उत्तर प्रदेश प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी विकास मिश्रा, उपायुक्त उद्योग श्रीनाथ पासवान, पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता रामराजा, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ओपी यादव, मोदीनगर नगर पालिका परिषद, लोनी नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी,नगर पंचायत डासना के अधिशासी अधिकारी, डॉ. विधि आदि अधिकारियों के साथ बैठक की। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी), दिल्ली के पत्र के अनुसार गंगा संरक्षण समिति के निर्देश पर डिस्ट्रिक्ट गंगा प्लान बनाने के लिए भारतीय लोक प्रशासन संस्थान को कार्यदायी विभागों से सूचनाएं उपलब्ध कराने के संबंध में बैठक की गई।

जिलाधिकारी ने डिस्ट्रिक्ट गंगा प्लानÓ को बनाने में सहयोग के लिए सिंचाई विभाग एवं जल संसाधन,नगर निगम,गाजियाबाद विकास प्राधिकरण, एवं नगर विकास विभाग, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड,वन विभाग,जिला भूगर्भ जल प्रबंधन विभाग,स्वास्थ्य विभाग,कृषि विभाग,खनन विभाग,पंचायती राज विभाग, लोक निर्माण विभाग एवं उद्योग विभाग से एक-एक नोडल अधिकारी नामित करते हुए कार्य को जल्द से जल्द पूर्ण कराने के लिए निर्देशित किया। बैठक में जल प्रदूषण करने वाले सभी कारकों पर विस्तार से चर्चा की गई। जिसमें फैक्ट्री, कारखानों, नाली, वाशिंग कंपनी, घरों, कंपनियों, नदी, नालों, तालाबों, खेतों आदि से आने वाले प्रदूषित पानी के नदी में गिरने के कारकों पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके साथ ही जनपद में पेयजल सहित घरेलू एवं अन्य कार्यों में जल का उपयोग के बारे में भी विस्तार से चर्चा की गई।

एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण के प्रभावी नियंत्रण के लिए कमिशन फॉर एयर क्वॉलिटी मैनेजमेंट इन एनसीआर एंड एडज्वानिंग क्षेत्र और ग्रेडेड रेस्पांस एक्शन प्लान(जीआरएपी)गै्रप की स्टेज-1के लागू होने पर इससे जनपद वासियों को जागरूक कराने और प्रभावी रूप से लागू कराने के लिए विस्तार से चर्चा की गई। दिल्ली-एनसीआर  क्षेत्र में एक्यूआई में वृद्धि हो जाती हैं। एक्यूआई के अनुसार ग्रैप लागू किया जाता है। एक्यूआई के अनुसार ही गै्रप को अलग-अलग श्रेणी मे वग्रीकृत किया जाता है।गै्रप स्टेज-1 में एक्यूआई-201-300 ग्रैप सेकेंड स्टेज-एक्यूआई-301-400 व एक्यूआई-401-450 और लेवल-5 में एक्यूआई-450 खतरनाक श्रेणी में माना गया हैं।

इसके तहत सीएक्यूएम द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार विभिन्न विभागों द्वारा कार्रवाई की जाती है। जैसे सड़कों पर पानी का छिड़काव,सड़कों की मैकेनिकल स्वीपिंग,ट्रैफिक का सुचारू संचालन,निर्माण कार्यों में प्रदूषण नियंत्रण  के लिए प्रभावी कदम उठाया जाना और प्रदूषणकारी उद्योगों पर कार्रवाई के अलावा कूड़ा जलाने पर प्रभावी कार्रवाई किए जाना शामिल हैं। बता दें कि 13 अक्टूबर से दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई)200 से अधिक होने के दृष्टिगत सीएमक्यूएम द्वारा 14 अक्टूबर से ग्रैप-1 को लागू किया गया है।

जिले में प्रदूषण के टॉप 6 हॉटस्पॉट चिहिंत

जनपद में कुल 6 हॉट स्पॉट (साहिबाबाद, राजनगर एक्सटेंशन, लोनी, भौपुरा दिल्ली बॉर्डर, वसुंधरा, सिद्धार्थ विहार, कनावनी पुस्ता रोड) चिन्हित हैं। इसके संबंध में एक्शन प्लान तैयार किया गया है। जनपद में निर्माणाधीन परियोजना के रिमोट एंड सेल्फ  मॉनिटरिंग के लिए उत्तर प्रदेश इन्वायरमेंटल कम्पलैंस पोर्टल एमएलवी डस्ट पोर्टल पर सभी निर्माणाधीन परियोजनाओं जिनका भूखंड क्षेत्रफल 500 वर्गमीटर से अधिक है। उन्हें इस पोर्टल पर पंजीकरण करते हुए सेल्फ  ऑडिट करना अनिवार्य। जनपद में ऐसे निर्माणधीन प्रोजेक्ट को चिन्हीकरण कर नोटिस जारी किए जा रहे हैं। इसके साथ ही निर्माण साईट पर स्थलीय निरीक्षण किया जाता है।

निरीक्षण आख्या कार्रवाई रिपोर्ट के साथ डस्ट पोर्टल पर दर्ज की जाती है। जिलाधिकारी ने ग्रैप लागू होने के चलते सभी विभागों के अधिकारियों को इसको कठोरता से सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए हैं। ग्रैप के अंतर्गत खुले में निर्माण सामग्री, भंडारण एवं आवागमन किए जाने पर विभागों द्वारा पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति अधिरोपित किए जाने का भी प्राविधान है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 14 अक्टूबर से 21 अक्टूबर तक खुले में निर्माण सामग्री रखने,भंडारण एवं आवागमन किए जाने पर 8 इकाइयों पर 23 लाख रुपए की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति अधिरोपित की गई हैं।