लाइसेंस शुल्क की वसूली कराने को डीएम को भेजा पत्र
गाजियाबाद। शहर में बगैर लाइसेंस संचालित निजी प्रतिष्ठानों पर जल्द शिकंजा कसा जाएगा। 385 प्रतिष्ठानों से लाइसेंस फीस की एवज में नगर निगम को 20 लाख रुपए की वसूली करनी है। ऐसे में नगर निगम इन संस्थानों को वसूली प्रमाण पत्र (आरसी) जारी कर वसूली कराने को जिलाधिकारी राकेश कुमार सिंह को पत्र लिखा है। शहर में वित्तीय वर्ष 2020-21 में बगैर लाइसेंस के 385 प्रतिष्ठान संचालित होते रहे थे। नोटिस जारी किए जाने के बाद भी इन प्रतिष्ठान के स्वामियों ने नगर निगम से लाइसेंस नहीं लिया। नगर निगम अब इन प्रतिष्ठानों के खिलाफ कड़ा रूख अपना रहा है। नगरायुक्त महेंद्र सिंह तंवर के आदेश पर संबंधित संस्थानों को नोटिस जारी करने के बाद भी लाइसेंस नहीं लिया गया। मुख्य कर निर्धारण अधिकारी डॉ. संजीव सिन्हा ने बताया कि शासन के आदेश के अनुसार 39 मदों में लाइसेंस जारी किया जाता हैं।
नगर निगम द्वारा 39 मदों में लाइसेंस जारी किए जाने के चलते इसके तहत मुख्य रूप से प्रत्येक साल गेस्ट हाउस, लॉज, बारात घर, बैंक्वेट हॉल के लिए एक हजार रुपए, तीन सितारा होटल के लिए 9 हजार रुपए, पांच सितारा होटल के लिए 12 हजार रुपए, 20 बेड तक के नर्सिंग होम के लिए दो हजार रुपए, 20 बेड से ऊपर के नर्सिंग होम के लिए पांच हजार रुपए, 20 बेड तक के प्रसूति गृह के लिए चार हजार रुपए, 20 बेड से ऊपर के प्रसूति गृह के लिए पांच हजार रुपए, प्राइवेट अस्पताल के लिए पांच हजार रुपए, पैथोलोजी सेंटर 1 हजार रुपए, एक्सरे क्लीनिक के लिए 2 हजार रुपए, डेंटल क्लीनिक के लिए चार हजार रुपए, प्राइवेट क्लीनिक के लिए तीन हजार रुपए, फाइनेंस कंपनी चिट फंड-6 हजार रुपए,इंश्योरेंस कंपनी शाखा-12 हजार रुपए, बीयर बार-6 हजार रुपए, आईस फैक्ट्री-एक हजार रुपए, बिल्डर्स ऑफिस-5 हजार रुपए, शराब दुकान-6 हजार रुपए, अंग्रेजी शराब दुकान-12 हजार रुपए एक साल का लाइसेंस दिया जाता हैं।
मगर इन्होंने लाइसेंस नहीं लिया है। मुख्य कर निर्धारण अधिकारी ने बताया कि मदों के अनुसार लाइसेंस नहीं लिया गया। वित्तीय वर्ष 2021-22 में अब तक 1,892 प्रतिष्ठानों को लाइसेंस शुल्क लेकर लाइसेंस दिया गया। ऐसे 385 प्रतिष्ठानों ने पिछले वित्तीय वर्ष में लाइसेंस नहीं लिया था,इनके खिलाफ अब आरसी जारी की गई हैं। इन प्रतिष्ठान संचालकों से जिला प्रशासन द्वारा 10 प्रतिशत अधिक रकम के साथ वसूली की जाएगी।इसके लिए जिलाधिकारी को पत्र भेजा गया है ताकि इनसे लाइसेंस फीस वसूल की जा सके।
















