शिविर के दूसरे दिन साधकों ने की श्वास-प्रश्वास की क्रिया
गाजियाबाद। योग-क्रियाओं के तहत प्राणायाम का अतिविशिष्ट महत्व है। श्वास-प्रश्वास , जीवन और प्राणायाम का मुख्य आधार है। प्राणायाम का तात्पर्य एक ऐसी क्रिया से है जिसके द्वारा प्राण का प्रसार विस्तार किया जाता है। उसे नियंत्रण में रखा जाता है। सिद्धि होने पर श्वास-प्रश्वास की गति को लयबद्ध करना प्राणायाम है। यह बातें अखिल भारतीय योग संस्थान कार्यकारिणी द्वारा ब्रह्मऋषि आचार्य नीरज योगी ने सानिध्य में ध्यान योग कार्यशाला के दूसरे दिन मंगलवार को साधकों को क्रिया कराते हुए कहीं। उन्होने कहा प्राणायाम करना केवल श्वाश का लेना और छोडऩा मात्र नहीं होता, वायु के साथ ही प्राण-शक्ति या जीवनी-शक्ति को भी ग्रहण करना होता है।
प्राणायाम करने से शरीर की संपूर्ण नस नाडिय़ां शुद्ध होती हैं। शरीर तेजस्वी और फुर्तीला बनता है। भूख बढ़ती है। रक्त शुद्ध होता है। गोल्फ लिंक सोसाइटी के पार्क में चार द्विवसीय आयोजित यौगिक कार्यशाला में कार्यक्रम की शुरूआत दीप प्रज्वलित कर सरोज सिरोही द्वारा ओमकार ध्वनि के उच्चारण के साथ की गई। कार्यक्रम में विशेष भूमिका निभाते हुए अखिल भारतीय योग संस्थान के संरक्षक संस्थापक राजकुमार त्यागी, उपाध्यक्ष डॉ चरत कुमार, महामंत्री भूत पूर्व डिप्टी कमिश्नर खाद्य एवं रसद विभाग आरआर पाल, कोषाध्यक्ष गिरधर, राज्यसभा सदस्य प्रतिनिधि देवेंद्र हितकारी, पूर्व जिला जज प्रदीप कंसल सहित अनेकों साधकों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का संचालन बीके एस पाल ने किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संंयुक्त सचिव शिक्षा (भारत सरकार) संतोष यादव का संस्थान के महामंत्री आरआर पाल एवं देवेन्द्र हितकारी ने फूलों की माला व पटका पहनाकर स्वागत किया। आचार्य नीरज शास्त्री ने चेतना विस्तार श्वास-प्रश्वास का सही तरीका,भस्त्रिका,अनुलोम विलोम, कपाल भारती से होने वाले अनेकों शारीरिक लाभ के लिए क्रियाएं कराई।
योगिक शाखा में संपूर्ण शहर के विभिन्न क्षेत्रों से प्रतिभागिता निभाने वाले सदस्यों में अशोक नगर, वसुंधरा से डॉ शरद कुमार जी ,विजय नगर से मोहर सिंह, लैंड क्राफ्ट पूर्व डिप्टी एसपी पीपी कर्णवाल हिस्सा लिया। इस दौरान अंकुरित सीड (मूंग, चना, सोयाबीन, गाजर, खीरा इत्यादि) का प्रसाद वितरण किया गया।















