गाजियाबाद। दिल्ली मेरठ रोड़ स्थित आईटीएस इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एण्ड एलाइड साइंसेज ने 29 एवं 30 मई को फिजियोकॉन- की दूसरी कार्यशाला का सफलतापूर्वक आयोजन किया। कार्यशाला की संचालन प्रख्यात फिजियोथेरेपिस्ट, डॉ जीके बालाजी द्वारा स्ट्रोक में एकीकृत कार्यात्मक थेरेपी (आईएफटी) पर किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य प्रतिभागियों को एकीकृत कार्यात्मक थेरेपी की समग्र और बहु-विषयक प्रकृति के बारे में शिक्षित करना था। डॉ जीके बालाजी फिजियोथेरेपी के क्षेत्र में अत्याधुनिक अनुभवी फिजियोथेरेपिस्ट हैं। डॉ बालाजी सायनेप्स फिजियो प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक और फोर्टिस अस्पताल मोहाली में फिजियोथेरेपी विभाग के एचओडी हैं। उन्होंने उन्नत उपचार तकनीकों के साथ अपने ज्ञान को बढ़ाने के लिए विदेशों से विभिन्न प्रमाणित पाठ्यक्रम पूरे किए हैं।
डॉ बालाजी ने यूके से टेपिंग तकनीक, यूएस से एनडीटी, दुबई से ड्राई नीडलिंग आदि में प्रमाण हासिल किए हैं। उन्होंने स्ट्रोक के रोगियों के इलाज के लिए अपनाई जाने वाली विभिन्न तकनीकों से छात्रों को अवगत कराया। तकनीकों का प्रदर्शन शुरू करने से पहले, डॉ बालाजी ने सैद्धांतिक रूप से फालिज और उपचार तकनीकों के बारे में अवधारणाओं को स्पष्ट किया। उन्होंने प्रदर्षित किया कि फालिज- रोगियों के इलाज के लिए पीएनएफ, एनडीटी आदि जैसे विभिन्न न्यूरो तकनीकों को कैसे लागू किया जा सकता है। उन्होंने छात्रों को धड, ऊपरी अंग और निचले अंग के मूल्यांकन और उपचार के बारे में सिखाया। इसके अलावा, उन्होंने इन तकनीकों का उपयोग करके संतुलन और चाल प्रशिक्षण के बारे में भी विस्तार से बताया।
आईटीएस ओपीडी के न्यूरो- रोगियों के मूल्यांकन और उपचार में इन सभी तकनीकों का प्रभाव डॉ0 बालाजी ने इस कार्यशाला में बताया। इन उदाहरणों से पता चला कि केसे एक बहु-विषयक दृष्टिकोण रोगी के परिणामों में उल्लेखनीय सुधार कर सकता है। इस कार्यशाला में उपस्थित सभी लोगों को प्रश्न पूछने और स्ट्रोक उपचार में चुनौतियों और समाधानों पर चर्चा करने का अवसर मिला। सभी छात्रों ने फिजियोथेरेपी क्षेत्र के विशेषज्ञों से सीखने का अवसर देने के लिए आईटीएस-दी एजूकेशन ग्रुप के वाइस चेयरमैन अर्पित चड्ढा को धन्यवाद दिया।


















