चीन-अमेरिका को खटका व्हादिमीर पुतिन का भारत दौरा

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत का दौरा कर स्वदेश लौट चुके हैं। कोरोना संकट काल में पुतिन का यह दौरा बेहद अह्म माना गया है। पुतिन बेशक कुछ घंटे के लिए भारत आए, मगर समूची दुनिया में इसका अलग संदेश गया है। खासकर अमेरिका, चीन और पाकिस्तान के कान जरूर खड़े हो गए हैं। पिछले कुछ समय से भारत-रूस के संबंधों में नरमी देखने को मिल रही थी। ऐसे में व्लादिमीर पुतिन ने अचानक भारत आकर सभी अटकलों को विराम लगा दिया है। वैसे भारत और रूस के संबंध आज के नहीं हैं। यह रिश्ते काफी पुराने हैं। रूस ने जरूरत के वक्त हमेशा भारत का साथ दिया है। इससे दोनों देशों के रिश्तों में कभी इतनी कड़वाहट नहीं आई कि बात पटरी से उतर जाए।

पुतिन के भारत भ्रमण से अमेरिका भले ही टेंशन में आ गया है, मगर वह नई दिल्ली के साथ संबंधों को खराब करने के मूड में कतई नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन पहले ही भारत के प्रति अपने रूख को जाहिर कर चुके हैं। फिलहाल अमेरिका के रूस और चीन के साथ रिश्ते बेहद खराब दौर से गुजर रहे हैं। चीन के बढ़ते प्रभुत्व को रोकने के लिए वाशिंगटन हरसंभव प्रयास कर रहा है। अमेरिका और रूस को एक साथ साधने की भारत की रणनीति कामयाब हो रही है। इससे बीजिंग और इस्लामाबाद का तनाव में आना स्वभाविक है। जानकारों का कहना है कि भारत और रूस की मित्रता सात दशक से अधिक पुरानी है।

रूस ने इंटरनेशनल मंच पर नई दिल्ली का हमेशा साथ देने से लेकर 1965 के युद्ध में पाकिस्तान के साथ युद्ध होने पर मध्यस्थता कराने जैसे कई मामलों में भारत का साथ दिया था। रूस और भारत के मध्य सिर्फ राजनयिक ही नहीं बल्कि आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संबंध भी रहे हैं। भारत के औद्योगिकरण में रूस के योगदान को कतई नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। रूस की तकनीक एवं आर्थिक मदद ने भारत के विकास में अह्म भूमिका निभाई है। रक्षा, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, औद्योगिक तकनीकी से लेकर विभिन्न प्रकार के विकास में रूस का भारत के प्रति महत्वपूर्ण रोल रहा है।

मौजूदा समय में भारत और अमेरिका की नजदीकी ने रूस और भारत के संबंधों को थोड़ा असहज जरूर किया है, मगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आज भी भारत के साथी के तौर पर रूस की तरफ ही देखा जाता है, मगर अब इस पुरानी दोस्ती का एक नया अध्याय लिखने के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत का हालिया दौरा किया है। भारत एवं रूस हमेशा एक-दूसरे के अच्छे सहयोगी रहे हैं, मगर पिछले कुछ समय में अफगानिस्तान के घटनाक्रम को लेकर दोनों राष्ट्रों के मध्य रिश्तों पर असर पड़ा था। भारत एवं चीन सीमा पर तनाव से भी पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अपने सामरिक हितों को ध्यान में रखकर रक्षा क्षेत्र से संबंधित अपने आयात को रूस तक सीमित न रख इसे अमेरिका और फ्रांस के साथ विकेंद्रीकृत करने की कोशिश की है।

इसके अतिरिक्त चीन के साथ सीमा पर तनाव में वृद्धि के कारण भारत एवं अमेरिका की नजदीकी बढ़ने से भारत-रूस संबंधों में दूरी बनने की संभावना बढ़ने लगी थी। फिलहाल रूस के साथ भारत का कोई भी बड़ा मतभेद नहीं रहा है। रूस असहज हो रहा है, क्योंकि चीन के साथ रूस के कई क्षेत्रों में अच्छे रिश्ते हैं। आशंका जताई जा रही है कि संबंधों की इस खाई को पाटने के लिए पुतिन की भारत यात्रा काफी कारगर सिद्ध हुई है। भारतीय रक्षा क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस का सहयोग बेहद महत्वपूर्ण है। लंबे समय से भारतीय रक्षा क्षेत्र में जरूरी हथियार एवं तकनीकी आदि के एक बड़े भाग का आयात रूस से किया जाता है।

रूस से आयात होने वाले हथियारों और अन्य आवश्यक उपकरणों की लागत का अधिक होना एक चिंता का विषय रहा है। महत्वपूर्ण कलपुर्जों और उपकरणों की आपूर्ति में होने वाली देरी की समस्या रक्षा क्षेत्र तक ही सीमित नहीं है, जो रूस के साथ व्यापारिक और रणनीतिक संबंधों की प्रगति में बड़ी बाधा है। रूस को दुनिया का दूसरा सबसे ताकतवर मूल्क माना जाता है। इस श्रेणी में भारत चौथे नंबर पर है। चीन और पाकिस्तान के साथ जब-जब भारत का तनाव बढ़ा है, रूस ने एक अच्छे मित्र की भूमिका निभाकर नई दिल्ली का साथ दिया है। रूसी राष्ट्रपति व्हादिमीर पुतिन समय-समय पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की प्रशंसा करते रहे हैं।

भारत-चीन के रिश्तों में कड़वाहट के बावजूद वह दोनों देशों को साधने में भी सफल हो रहे हैं। दरअसल व्हादिमीर पुतिन को राजनीति में कुटनीति का मास्टर माना जाता है। वह कम बोलकर ज्यादा कर दिखाने में यकीन करते हैं। यही वजह है कि पुतिन कभी अपने विरोधियों के सामने हल्के नहीं पड़े हैं। विरोधियों को मात देकर वह बार-बार अपनी काबिलियत का लोहा मनवाते रहे हैं। व्लादिमीर पुतिन को भी यह मालूम है कि वह चीन के साथ संबंधों को मजबूत कर भारत की कतई उपेक्षा नहीं कर सकते। अलबत्ता पुतिन ने एक बार फिर भारत के साथ संबंधों को तवज्जो देकर पूरी दुनिया की सोच को गलत ठहराने की कोशिश की है।

पिछले करीब 2 साल में पुतिन यदा-कदा देश से बाहर निकले हैं। ऐसे में उनका भारत दौरा यकीनन कम करके नहीं आंका जा सकता है। भारत ने भी रूस को भरोसा दिलाया है कि वह रशिया की उम्मीदों पर खराब उतरता रहेगा। रूस के साथ रक्षा सौदा कर भारत ने अमेरिका को भी दो टूक संदेश दे दिया है कि वह कारोबार करने के लिए स्वतंत्र है। किसी के दबाव में आकर वह अपनी नीतियों में बदलाव नहीं करेगा।