-डॉ भीमराव अम्बेडकर के चित्र पर पुष्प अर्पित कर डीएम ने दी श्रद्धांजलि
-बाबा साहब ने समाज को एक समान जोडऩे का किया कार्य: एडीएम प्रशासन बिपिन
-अम्बेडकर जी ने देश की विभिन्न जातियों को एक दूसरे से जोडऩे के लिए एक पुलिया का काम किया: गंभीर सिंह
गाजियाबाद। कलेक्ट्रेट सभागार में शुक्रवार को संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की 132वीं जयंती धूमधाम एवं हर्षोल्लास से मनाई गर्ई। जिलाधिकारी राकेश कुमार सिंह, अपर जिलाधिकारी प्रशासन बिपिन कुमार, अपर जिलाधिकारी नगर गंभीर सिंह, नगर मजिस्ट्रेट शुभांगी शुक्ला, एसीएम चंद्रेश कुमार सिंह, एसीएम निखिल चक्रवर्ती, उप क्रीडा अधिकारी पूनम विश्नोई एवं प्रशानिक अधिकारी एवं कर्मचारियों ने बाबा साहेब के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। जिलाधिकारी ने कहा डॉ. अंबेडकर का जीवन अनुकरणीय है, जिनके योगदान से पूरा देश गौरवान्वित है। डॉ. अम्बेडकर का जीवन एक संघर्ष का इतिहास रहा है। उन्होंने भारत देश में छुआछूत और सामाजिक असमानता के उन्मूलन के लिए संघर्ष किया। अस्पृश्यता को हटाये बिना राष्ट्र की प्रगति नहीं हो सकती। बाबा साहेब ने भारत के संविधान के निर्माण में सबसे अहम भूमिका निभाई। इसके चलते उन्हें संविधान का जनक भी कहा जाता है, डॉ. भीमराव अम्बेडकर का जन्म 14 अप्रैल सन् 1891 में मध्य प्रदेश के माहु में हुआ था। उन्होंने अपने जीवन काल में भारतीय समाज में समानता लाने के लिए काफी प्रयास किया।
जिलाधिकारी ने कहा कि आज जो हम प्रशासनिक अधिकारियों को आम नागरिकों को बराबरी के दर्जे के साथ उनका हक दिलाने का मौका मिला है, वह भारतीय संविधान की देन ही है। उन्होंने कहा कि कभी भी भेद-भाव होते देखें, तो उसे रोके, किसी के साथ अन्याय न होने दें। समस्याओं का समाधान प्राप्त सामथ्र्य के अनुसार तत्परता से करें, गरीबों की मदद करें, तभी बाबा साहब डॉ भीमराव अम्बेडकर का सपना साकार होगा। बाबा साहेब वो शख्सियत थी जिन्हें आजादी के बाद पंडित जवाहरलाल नेहरु ने कैबिनेट में पहली बार लॉ मिनिस्टर बनाया था। अपने कर्तव्य, अच्छे काम व देश के हित के लिए अम्बेडकर को 1990 में देश के सबसे बड़े सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया। आज समाज के उसी उद्धार कर्ता नारी के मुक्तिदाता दलित समाज के प्रणेता संविधान निर्माता डॉ बीआर अम्बेडकर की 132वीं जयंती का जश्न मनाने का सौभाग्य है।

जब हम बाबा साहब के बारे में पढ़ते हैं तो पता चलता है कि उन्होंने 16 डिग्रियां अपने पूरे जीवन काल में प्राप्त की थी जिसमें उन्होंने विदेश में पढ़ाई की थी। साथ ही जो उन्होंने भारतीय समाज से जाना समझा और सीखा था उसका जो प्रतिध्वनी है, वह हमारे संविधान में प्रस्फुटित हुई। आज नीति निदेशक सिद्धांतों को अगर पढ़ें तो उसमें देखे कि उन्होंने स्टेट के लिए क्या-क्या चीजें ड्राफ्ट की हैं। किस तरह की सामाजिक आर्थिक और न्याय की बात की, उन्होंने धर्मनिरपेक्षता की बात की, परस्पर भाईचारे की बात की, उन्होंने व्यक्ति की गरिमा बढ़ाने की बात की, उन्होंने बंधुता बढ़ाने की बात की और अगर आप देखे तो उन्होंने राज्य को इस तरह की इकाई के रूप में बताया कि उत्पादन और वितरण के साधनों पर सभी का नियंत्रण हो। राज्य इस तरह से व्यवस्था करें कि जो उत्पादन और वितरण की कम्युनिकेशन है, उसका लाभ सभी तक पहुंचे।

अपर जिलाधिकारी नगर गंभीर सिंह ने कहा कि अम्बेडकर जी ने अपने जीवन में इतने उतार चढ़ाव देखे, ऐसा वक्त देखा जब समाज में कुरीतियां व्याप्त थी जिसने समाज को बुरी तरह झकझोर रखा था तब उन्होंने ठान लिया था कि देश से न सिर्फ जातिवाद की खाई पाटनी है बल्कि दलितों के उत्थान के लिए समाज में उन्हें उनका हक दिलाना है। उन्होंने अपने बलबूते पर उच्च शिक्षा ग्रहण की। वे आजाद भारत के पहले लॉ मंत्री बने, दलित होने के बावजूद उनका मंत्री बनना उनके लिए बहुत बड़ी उपाधि थी। उन्होंने कहा कि डॉ भीमराव अम्बेडकर जी को संविधान गठन कमिटी का चेयरमैन बनाया गया। उनको स्कॉलर व प्रख्यात विदिबेत्ता भी कहा गया। अम्बेडकर जी ने देश की भिन्न भिन्न जातियों को एक दूसरे से जोडऩे के लिए एक पुलिया का काम किया। वे सबके सामान अधिकार की बात पर जोर देते थे।
एसीएम चंद्रेश कुमार सिंह ने कहा कि देश के निर्माण में बाबा साहब डॉ भीमराव अंबेडकर जी का बहुत बडा योगदान है। उन्होने कहा कि नारी शक्ति, शिक्षा, मताधिकार सहित आदि अधिकार दिलाने में उनका योगदान हैं। भारत एक विविधता भरा देश है और तत्कालीन समय मे यह अनेक विषमताओं से जूझ रहा था। ऐसी परिस्थिति में इन विविधताओं को स्वीकारते हुए अखंड राष्ट्र का निर्माण बहुत बड़ी चुनौती थी। लेकिन डॉ आंबेडकर जी के नेतृत्व में प्रारूप समिति ने न सिर्फ इस चुनौती का सफलतापूर्वक सामना किया बल्कि एक ऐसे संविधान का निर्माण किया जो विविधता में एकता जैसे भारतीय मूल्य का साकार रूप था। भारत को एक राष्ट्र के रूप में खड़ा करने में संविधान निर्माणकर्ता बाबा साहब की अतुलनीय भूमिका है।
एसीएम निखिल चक्रवर्ती ने बाबा साहब के जन्म दिवस पर बधाई देते हुए कहा कि संविधान में समाज के हर वर्ग, जाति को बराबर का दर्जा दिया गया है। जिस व्यक्ति को जो जिम्मेदारी सौंपी गई है उसे समय से निभाए। बाबा साहब चाहते थे कि गरीब व्यक्तियों को किसी प्रकार की समस्या न होने पाए। डॉ0 भीमराव अंबेडकर साहब की इच्छा थी कि संविधान को मजबूत बनाना हैं। प्रत्येक वर्ग को एकजुट होकर समाज के लिए योगदान करते रहें। उन्होंने कभी अपने मूल्यों से समझौता नहीं किया। आज हम एक सफल लोकतंत्र के रूप में दुनिया भर में सम्मान की दृष्टि से देखे जाते हैं तो इसके पीछे उस संविधान की सबसे बड़ी भूमिका है, जिसके शिल्पकार डॉ अम्बेडकर हैं।
















